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मोजांबिक रेलवे के सदस्यों ने बनारस का किया दौरा:रोजाना बन रहे डीजल और इलेक्ट्रिक इंजनों की ली तकनीकी जानकारी, आगे भी व्यापार की जताई इच्छा

वाराणसी3 महीने पहले
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मोजांबिक से आए प्रतिनिधिमंडल को रेल इंजन निर्माण की तकनीक के बारे में बताते बरेका के अधिकारी। - Money Bhaskar
मोजांबिक से आए प्रतिनिधिमंडल को रेल इंजन निर्माण की तकनीक के बारे में बताते बरेका के अधिकारी।

पिछले माह रेल इंजन निर्यात करने के बाद बनारस रेल कारखाने को फिर से नए इंजनों के व्यापार की उम्मीद जगी है। 6 रेल इंजन आयात करने के बाद अफ्रीका के मोजांबिक देश से उच्च स्तरीय प्रतिनिधि मंडल सोमवार को वाराणसी के बरेका (बनारस रेल कारखाना) पहुंचा। मोजांबिक रेलवे के इस 6 सदस्यीय दल ने बनारस रेल इंजन कारखाना का मुआयना किया।

वहीं, रोजाना बन रहे डीजल और इलेक्ट्रिक इंजनों की तकनीकी जानकारियां हासिल की। बरेका की महाप्रबंधक अंजली गोयल की अध्यक्षता में इंजन निर्माण के तकनीकी पहलुओं पर एक संगोष्ठी भी आयोजित हुई। बरेका की ओर से मोजांबिक को निर्यात किए गए रेल इंजनों को उच्च क्षमता के बारे में जानकारी मेहमानों को दी गई। प्रतिनिधिमंडल की ओर से आगे भी ऐसे भी व्यापार को आगे बढ़ाने की सहमति दी गई।

वाराणसी के रेलवे प्रतिनिधिमंडल के साथ बनारस रेल इंजन कारखाना के अधिकारी।
वाराणसी के रेलवे प्रतिनिधिमंडल के साथ बनारस रेल इंजन कारखाना के अधिकारी।

बता दें कि बीते माह अगस्त में मोजांबिक को बरेका ने छठवां रेल इंजन निर्यात किया। वहीं, नवंबर, 2020 में मोजांबिक को छह इंजनों की आपूर्ति के लिए बरेका ने अनुबंध पर हस्ताक्षर किया था। इसी परिप्रेक्ष्य में सोमवार को मोजांबिक रेलवे के अधिकारी कारखाना में सभी इंजन वर्कशॉप, न्यू ब्लाॅक शाॅप, इंजन टेस्ट शॉप, लोको असेंबली शॉप में किए जाने वाले कार्याें को समझा। इंजन निर्माण से संबंधित प्रक्रिया और मौजूदा संसाधनाें के बारे में हर जानकारी ली। माेजांबिक से आए दल काफी खुश नजर आए। मेहमानों ने बताया कि इंजन निर्माण में उन्हें वाराणसी में काफी बेहतर जानकारी मिली।

2255 टन क्षमता वाले इंजनों का हुआ था निर्यात

10 मार्च, 2021 से मोजांबिक को रेल इंजन का निर्यात शुरू किया गया था। 3000 एचपी केप गेज का पहले 2 रेल इंजन भेजा गया था। केप गेज डीजल लोको को भारत की ओर से ही वित्तपोषित किया गया है, जिसे मोजांबिक को निर्यात किया गया है। इन सभी 6 लोकोमोटिव इंजन की क्षमता 2255 टन है। वहीं, इनकी गति 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार होगी।

इंजन का सबसे महत्वपूर्ण उपकरण यानी क्रैंक-केस असेंबली बरेका में इन-हाउस तैयार किया है। इन्हें भारतीय रेलवे के पीएसयू, राइट्स लिमिटेड के माध्यम से निर्यात किया गया था। मोजांबिक प्रतिनिधिमंडल में रेलवे के अध्यक्ष मीगुल जोस माताबेल, परिवहन और संचार मंत्रालय के कैबिनेट के प्रमुख एंटोनियो मैनुअल माट्यूस, फाइनेंसर सीएफएम, अबूबकर अदामों मुसा, सीएफएम-सी. कार्यकारी निदेशक एंटोनियो फ्रांसिस्को मैनुएल बाई, टियोडोमिरो एंजेलो और सलाहकार अरूणकुमार नरसिम्हा पाई मौजूद थे।

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