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देव दीपावली... बाबा विश्वनाथ और गंगा का होगा मिलन:32 लेजर और 500 लाइट दिखाएंगी काशी की आभा; कॉरिडोर का अक्स देखेंगे श्रद्धालु

वाराणसी7 महीने पहले
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वाराणसी में देव दीपावली पर चेत सिंह किला घाट पर लेजर लाइटिंग की तैयारी अब अपने अंतिम फेज में है। - Money Bhaskar
वाराणसी में देव दीपावली पर चेत सिंह किला घाट पर लेजर लाइटिंग की तैयारी अब अपने अंतिम फेज में है।

वाराणसी की देव दीपावली में भक्तजन बाबा विश्वनाथ और गंगा का मिलन देखेंगे। वाराणसी में कल शाम लेजर और लाइट से दिसंबर में लोकार्पित हो रहे श्रीकाशी विश्वनाथ कॉरिडोर का अक्स भी दिखाने की तैयारी चल रही है। वहीं बनारस में अयोध्या से भी भव्य लेजर लाइट एंड साउंड शो का नजारा होगा।

राता चेत सिंह किला।
राता चेत सिंह किला।

पिछले साल 12 तरह के लेजरों की चमक ने ही पूरे बनारस को चंकाचौंध कर दिया था, मगर इस साल 32 भव्य लेजर और करीब 500 लाइटें लगाई गईं हैं। हालांकि आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार लेजर की संख्या 24 ही बताईं गईं हैं। मगर ग्राउंड पर पड़ताल करने के बाद मालूम चला कि यहां पर 32 तरह की लेजर लगाईं जा रही हैं।

इन लेजर लाइटों की फ्रिक्वेंसी इतनी अधिक होगी कि गंगा में 6 किलोमीटर दूर शास्त्री और मालवीय दोनों ब्रिज से इसकी चमक दिखाई देगी। वहीं घाट के उस पार रेती तक लेजर की रेज आएंगी।

अयोध्या में लाइट लगाने वाली कंपनी को जिम्मेदारी
पूरे किले की दीवारों पर भगवान शंकर, गंगा और राम की ही छाया दिखाई जाएगी। वहीं साउंड पर तांडव की धुन होगी, जिस पर लेजर के सहारे बाबा का अनोखा नृत्य भी दिखाया जाएगा। दिल्ली से वाराणसी आई लेजर कंपनी ई-फैक्टर शो ने ही अयोध्या के दीपोत्सव में लेजर शो किया था। इस बार भी यही प्रयास है कि चेत सिंह किला पर अयोध्या की आभामंडल दिखाई जाए। टीम के लोगों ने कहा कि इस बार खास यह होगा कि लाइटों की संख्या बढ़ा दी गई गई है। वहीं कुछ लेजर का प्रयोग तो देश में पहली मर्तबे किया जा रहा है।

चमगादड़ और नशाखोरों का अड्डा है चेत सिंह किला

देव दीपावली पर शहर के आकर्षण का केंद्र बना चेत सिंह किला आज चमगादड़ों का स्थाई आवास बन चुका है। यह किला जर्जर ही नहीं बल्कि अपनी बदहाली पर भी रो रहा है। यहां जल्द रिलीज होने वाली सत्यमेय जयते और तमाम फिल्मों की शूटिंग हुई। कई सांस्कृतिक गतिविधियां होती हैं मगर बाकी के दिनों में यह नशाखोरी का अड्डा बन जाता है।

यहां की विरासत के संरक्षण के लिए कोई आगे नहीं आया। किले की छत पर मंदिरों को देख कर लगता है कि दशकों से ताला तक नहीं खोला गया। आखिरकार क्या कारण है कि इस किले से लोगों को करोड़ों का लाभ होता है मगर इस विरासत के रखरखाव पर कोई सोचने के लिए कोई आगे नहीं आता।