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आज है संविधान दिवस:1968 में कुंजरू ने भारत रत्न लेने से इंकार कर दिया था, जानिए संविधान सभा के यूपी के 5 किरदारों को

वाराणसी6 महीने पहलेलेखक: हिमांशु अस्थाना
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26 नवंबर को संविधान दिवस मनाया जाता है। इस दिन भारत का संविधान अंगीकृत किया गया। संविधान सभा के कुल 299 सदस्यों में BHU से जुड़े कुल 89 लोग (पूर्व छात्र, प्रोफेसर और कुलपति) शामिल थे। BHU से जुड़े ये सदस्य देश के विभिन्न प्रांतों से थे। संविधान सभा में शामिल रहे हृदय नाथ कुंजरू ने तो 1968 में भारत रत्न लेने से इंकार कर दिया था।

BHU में राजनीति विज्ञान के विशेषज्ञ प्रोफेसर आरपी पाठक बताते हैं कि देश की राजनीति की दिशा उत्तर प्रदेश से ही तय होगी, यह बात संविधान सभा में भी लोगों ने मानी थी। बंबई, बंगाल और मद्रास प्रेसिडेंट के प्रभाव के बावजूद संविधान सभा में सबसे अधिक UP के 55 सदस्यों को प्रतिनिधित्व दिया गया था।

डिप्टी लाइब्रेरियन डॉ. राम कुमार दांगी ने बताया कि लाइब्रेरी में संविधान की कॉपी रखी है।
डिप्टी लाइब्रेरियन डॉ. राम कुमार दांगी ने बताया कि लाइब्रेरी में संविधान की कॉपी रखी है।

प्रो. पाठक बताते हैं कि संविधान निर्माण में यूपी के इन 5 किरदारों के बिना इसकी परिकल्पना ही नहीं हो सकती थी।

पंडित जवाहर लाल नेहरू - संविधान का पहला पेज यानी प्रस्तावना 13 दिसंबर, 1946 को पंडित जवाहरलाल नेहरू ने उद्देश्य प्रस्ताव के रूप में प्रस्‍तुत किया। संविधान बनाने के लिए यह एक आधार और सिद्धांत बन गया। संविधान सभा बनाने के साथ ही 1948 में इंडस्ट्रियल पॉलिसी लेकर आए। संविधान में भूमि और सामाजिक सुधार, मिश्रित अर्थव्यस्था और सेक्युलरिज्म की बात उन्होंने स्थापित की।

पं. जवाहरलाल नेहरू ने संविधान में सेक्युलरिज्म की बात स्थापित की।
पं. जवाहरलाल नेहरू ने संविधान में सेक्युलरिज्म की बात स्थापित की।

गोविंद वल्लभ पंत - गोविंद वल्लभ पंत ने संविधान लागू होने के बाद यूनाइटेड प्रॉविंस का नाम बदलकर उत्तर प्रदेश कर दिया। नाम बदलने के बाद उन्हें काफी लोकप्रियता मिली और तीसरी बार सरकार में आए। उत्तर प्रदेश ही नहीं गुलाम और आजाद भारत में देश के पहले मुख्यमंत्री पंत ही थे। भारतीय संविधान में हिंदी भाषा को राजभाषा का दर्जा दिलाना और जमींदारी प्रथा को खत्म कराने के लिए उन्होंने कई प्रावधान बनाए।

गोविंद वल्लभ पंत ने संविधान लागू होने के बाद यूनाइटेड प्रॉविंस का नाम बदलकर उत्तर प्रदेश कर दिया।
गोविंद वल्लभ पंत ने संविधान लागू होने के बाद यूनाइटेड प्रॉविंस का नाम बदलकर उत्तर प्रदेश कर दिया।

हृदय नाथ कुंजरू - संविधान सभा के नियमों पर सबसे पैनी दृष्टि कुंजरू की ही थी। उन्होंने सभा में कहा था कि संविधान ऐसा बने जो समतावादी समाज और सांप्रदायिक सौहार्द की रक्षा करे। 1968 में कुंजरू को भारत रत्न के लिए चुना गया, मगर उन्होंने एक गणतांत्रिक देश में ऐसे सम्मानों को लेना मुनासिब नहीं समझा और इनकार कर दिया। राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC) और राष्ट्रीय रक्षा अकादमी शुरू कराने का श्रेय इन्हीं को जाता है।

हृदय नाथ कुंजरू ने भारत रत्न लेने से मना कर दिया था।
हृदय नाथ कुंजरू ने भारत रत्न लेने से मना कर दिया था।

जेबी कृपलानी - काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में प्रोफेसर रहे। संविधान में पंथ निरपेक्षता, न्याय और बंधुता का श्रेय जेबी कृपलानी को ही जाता है। संविधान सभा में झंडा समिति के सदस्य, प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी और राजनीतिज्ञ थे। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के महामंत्री और साल 1946 की मेरठ कांग्रेस के अध्यक्ष भी रहे थे। उनकी पत्नी सुचेता कृपलानी भी उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री थीं।

जेबी कृपलानी साल 1946 की मेरठ कांग्रेस के अध्यक्ष रहे थे।
जेबी कृपलानी साल 1946 की मेरठ कांग्रेस के अध्यक्ष रहे थे।

जॉन मथाई - भारत का पहला बजट प्रस्तुत करने वाले अर्थशास्त्री जॉन मथाई मद्रास प्रेसीडेंसी में जन्मे थे, लेकिन संविधान सभा में UP का प्रतिनिधित्व किया। यूपी से ही चुनाव लड़ते रहे। संविधान लागू होने के बाद योजना आयोग और पीसी महालनोबिस की बढ़ती शक्ति के विरोध में 1950 के बजट के बाद वित्तमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया।

जॉन मथाई ने संविधान सभा में यूपी का प्रतिनिधित्व किया था।
जॉन मथाई ने संविधान सभा में यूपी का प्रतिनिधित्व किया था।
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