पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

पौष पूर्णिमा आज शाम 5:18 मिनट तक:वाराणसी में कड़ाके की ठंड के बीच लोगों ने लगाई डूबकी; कर्ज से मुक्ति देगा आज का स्नान

वाराणसी4 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
वाराणसी के घाट पर श्रद्धालुओं की संख्या हर साल के मुकाबले इस बार काफी कम रही। - Money Bhaskar
वाराणसी के घाट पर श्रद्धालुओं की संख्या हर साल के मुकाबले इस बार काफी कम रही।

कंपकपाती सर्दी और कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच आज वाराणसी में पौष पूर्णिमा का स्नान थोड़ा फीका पड़ गया है। सुबह काफी कम संख्या में श्रद्धालु गंगा घाट पर स्नान के लिए पहुंचे। हालांकि दोपहर के बाद धर्मस्थलों और घाटों पर लोगों की चहल-पहल बढ़ने लगी। दोपहर तक दशाश्वमेध, अस्सी और तुलसी घाट पर लोगों की अच्छी-खासी भीड़ देखने को मिली। वहीं भीषण ठंड के मारे लोग पानी में ज्यादा देर खड़े नहीं रह सके। किसी ने डुबकी पूरी, तो किसी ने आधी ही लगाई। पूर्णिमा की तिथि आज आधी रात 3 बजकर 19 मिनट पर लगी जो कि शाम 5 बजकर 18 मिनट तक चलेगी।

विष्णु को चढ़ाया ऋतुफल
स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने पूजा अर्चना कर व्रत का संकल्प उठाया। लोगाें ने भिक्षुकों को दान और गाय को भोजन कराया। उपवास रखने वालों ने श्रद्धा, भक्तिभाव और आस्था के साथ हरि विष्णु को ऋतु फल, नेवैद्य और मिठाईयां अर्पित करके धूप-दीप के साथ पूजा-अर्चना की। पाप मिटाने के लिए लोगों ने 7-7 ब्राह्मणों को चीनी और तिल का दान किया। वहीं भगवान विष्णु के विग्रह पर तिल और तेल का दीपक भी जलाया गया। इसके साथ ही चावल, घी, खिचड़ी, तिल की मिठाई, गुड़, कंबल, वस्त्रदान दान किया गया।

आज से शुरू हुआ 1 महीने का कल्पवास
पौष पूर्णिमा शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को इस स्नान का विधान है। आज इसी के साथ 1 महीने का कल्पवास भी शुरू हो गया। धर्मशास्त्रों में बताया गया है कि पौष पूर्णिमा पर स्नान, व्रत और दान से मोक्ष की प्राप्ति होती है। आज के दिन भगवान सत्य नारायण का कथा करने से हजारों साल तक किए गए यज्ञ के बराबर फल मिलता है। वहीं जीवन में आए दुख और संकट कट जाते हैं। वाराणसी के ज्योतिर्विद विमल जैन के अनुसार, आज के दिन श्रीमद्भगवत गीता, विष्णु सहस्त्रनाम और ॐ नमो भगवते वासुदेवाय का जप करने के व्यक्ति कर्ज और पाप दोनों से मुक्त हो जाता है। आज व्रत रखकर चंद्रमा की पूजा करनी चाहिए।

खबरें और भी हैं...