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बंगलुरु बनेगा यूपी के बास्केटबॉल का हब:पूर्व कैप्टन काशी की आकांक्षा ने कनाडा से मंगाया 70 लाख का फ्लोर; टैलेंटेड बच्चों को फ्री में वर्ल्ड क्लास सुविधा

वाराणसी5 महीने पहले
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वाराणसी की इंटरनेशनल बास्केटबॉल प्लेयर अकांक्षा सिंह।

काशी समेत पूरे यूपी के टैलेंटेड बास्केटबॉल प्लेयर्स के लिए बंगलुरु एक हब बनेगा। जो बच्चे वाराणसी और यूपी में बेहतर परफाॅर्म कर रहे हैं, उन्हें बंगलुरु में अपनी खेल निखारने का मौका बिल्कुल फ्री ऑफ कॉस्ट मिलने वाला है। सिंह सिस्टर्स के नाम से फेमस इंटरनेशनल बास्केटबॉल प्लेयर और इंडियन टीम की पूर्व कैप्टन वाराणसी की आकांक्षा सिंह ने सेंटर फॉर स्पोर्ट्स एक्सीलेंस कैंपस में इंडोर बास्केटबॉल सेंटर शुरू किया है। यहां पर खिलाड़ियों को वर्ल्ड क्लास सुविधा दी जा रही है।

सबसे खास है यहां पर लगा बास्केटबॉल का फ्लोर। इसे आकांक्षा सिंह ने कनाडा से 70 लाख रुपए खर्च कर मंगवाया है। यह आम फ्लोर की तरह से हार्ड न होकर सॉफ्ट रहता है। इसमें आधा फीट मोटाई का लेयर होता है। बच्चे इस फ्लोर पर लंबे समय तक प्रैक्टिस कर सकते हैं। उनके टखनों और पैर में किसी तरह का कोई दर्द नहीं उठेगा। इंटरनेशनल गेम्स भी इसी तरह के फ्लोर पर होते हैं। इसके साथ ही ऑटोमैटिक बाल शूटिंग और रिकवरी मशीन भी लगाई गई है।

बंगलुरु में बना सेंटर फॉर स्पोर्ट्स एक्सीलेंस।
बंगलुरु में बना सेंटर फॉर स्पोर्ट्स एक्सीलेंस।

आकांक्षा सिंह ने दैनिक भास्कर से बातचीत में बताया कि बास्केटबॉल प्लेयर को फ्लाेर सबसे ज्यादा अट्रैक्ट करता है। इसे बास्केटबॉल की गवर्निंग बॉडी FIBA से मंगवाया गया है। इसका नाम एक्शन फ्लोरिंग मैपल है।

जल्द ही वाराणसी को मिलेगा इंटरनेशनल प्लेयर
आकांक्षा सिंह ने बताया कि काशी से आई एक बच्ची अब नेशनल खेल रही है। वहीं, डेढ़ महीने पहले वाराणसी के एक प्लेयर पलक बंगलुरु आई है। वाराणसी के सिगरा स्टेडियम में प्रैक्टिस करती थी, मगर उसका टैलेंट देखकर उसे यहां लाया गया। अब वह रोजाना 8-10 घंटे प्रैक्टिस करती है। जल्द ही 5-10 बच्चे वाराणसी से बंगलुरु पहुंचेंगे।

सिंह सिस्टर्स के नाम से फेमस बास्केटबॉल की वाराणसी की इंटरनेशनल प्लेयर्स। प्रशांति सिंह, आकांक्षा सिंह, प्रतिमा सिंह और दिव्या सिंह (बाएं से दाएं)। इन्होंने गर्मी की छुट्टियों में वाराणसी में बास्केटबॉल फॉर एवरीवन नाम से एक एक्सीलेंस कैंप लगाया था।
सिंह सिस्टर्स के नाम से फेमस बास्केटबॉल की वाराणसी की इंटरनेशनल प्लेयर्स। प्रशांति सिंह, आकांक्षा सिंह, प्रतिमा सिंह और दिव्या सिंह (बाएं से दाएं)। इन्होंने गर्मी की छुट्टियों में वाराणसी में बास्केटबॉल फॉर एवरीवन नाम से एक एक्सीलेंस कैंप लगाया था।

टैलेंट हो तो रहना-खाना सब कुछ फ्री
आकांक्षा सिंह ने कहा कि बंगलुरु आने-जाने और रहने-खाने के खर्च का टेंशन छोड़ दें। आपके गार्जियंस पर कोई फाइनेंसियल बोझ नहीं पड़ेगा। यदि किसी प्लेयर ने नेशनल, स्टेट और डिस्ट्रिक्ट भी नहीं खेला है और उसमें टैलेंट दिख रहा है तो उसे हम सिखाने को तैयार करेंगे। एकेडमी में कुल पांच विश्वस्तरीय ट्रेनर द्वारा बच्चों को 5-6 घंटे की ट्रेनिंग दी जा रही है।

सिंगापुर और ओमान से भी आ रहे बच्चे
आकांक्षा सिंह ने कहा कि हैं। भारत के साथ ही सिंगापुर और ओमान से भी बच्चे आ रहे हैं। इनमें बनारस के बच्चे काफी टैलेंटेड हैं। यूपी के अलग-अलग जगहाें पर कैंप लगाकर ऐसे टैलेंटेड बच्चों को खोजा भी जा रहा है। वाराणसी में हाल ही में गर्मी की छुट्टियों में सिंह सिस्टर्स ने बास्केटबॉल फॉर एवरीवन नाम से एक एक्सीलेंस कैंप लगाया था। काशी और पूर्वांचल समेत आसपास के बच्चे इतने संस्कारी होते हैं इसलिए वे बहुत जल्द ही चीजों को सीख लेते हैं।

लगाई गई है बाल ऑटोमैटिक थ्रो करने और रिकवरी मशीन

आकांक्षा सिंह ने कहा कि बॉल थ्रो करने की मशीन भी मंगाई है। इसमें बच्चों को यह सुविधा होगी कि उन्हें बिना वजह किसी के पास या थ्रो का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। वहीं बिना वजह दौड़ कर अपनी एनर्जी वेस्ट करने का कोई फायदा भी नहीं होता। रनिंग के लिए तो अलग से सेशन होता ही है। जब तक आप कोर्ट पर हैं तब तक आपको अपने बॉल पर फोकस बढ़ाना होगा। इसलिए यह मशीन क्रम से 25-50 बार बॉल थ्रो करेगी आप खड़े रहे और प्रैक्टिस करते रहें। इसके साथ ही गेम रेडी आइस कंप्रेशन रिकवरी मशीन भी रखा गया है। इससे गेम के बाद थकान रिकवरी में यूज किया जाता है।

इस तरह का है CSE सेंटर और उसकी सुविधाएं
बंगलुरु में 5 एकड़ में इस सेंटर को तैयार कराया गया है।
स्टडी एरिया, लांज, जिम
कोच ऑफिस और रेस्ट एरिया
यहां पर स्पोर्ट्स साइंस, फिजियोथेरेपी और रिकवरी सेंटर बनाए गए हैं।
साथ में ओलिपिंक स्विमिंग पुल, फुटबाॅल फील्ड, बैडमिंटन, क्रिकेट्र शूटिंग, टेनिस और स्क्वैश गेम्स की भी सुविधा है।

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