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दक्षिण भारत के ललिता सहस्रनामम् का हिंदी में अनुवाद:वाराणसी के दुर्गा भक्त इस शारदीय नवरात्रि पर शक्ति के 1 हजार नामों का करेंगे पाठ; बांटी जाएंगी हजारों पुस्तकें

वाराणसी3 महीने पहले
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काशी अन्नपूर्णा मंदिर प्रांगण से "ललिता सहस्रनामम् - सरल अनुवाद एवं भावार्थ" पुस्तक का विमोचन किया गया। - Money Bhaskar
काशी अन्नपूर्णा मंदिर प्रांगण से "ललिता सहस्रनामम् - सरल अनुवाद एवं भावार्थ" पुस्तक का विमोचन किया गया।
  • 7 अक्टूबर से नवरात्रि पर काशी में दिखेगा दक्षिण व उत्तर का संगम
  • अभी तक उत्तर भारत में दुर्गाशप्त सती का ही होता था पाठ

काशी हमेशा से उत्तर और दक्षिण की संस्कृति का मेल कराने वाली रही है। 7 अक्टूबर से शुरू हो रहे इस शारदीय नवरात्रि पर वाराणसी के दुर्गा भक्त दक्षिण भारत के ललिता सहस्रनामम् का भी पाठ करेंगे। उत्तर भारत में अभी तक दुर्गासप्त शती और दक्षिण भारत में ललिता सहस्त्रनामम् को ही पूजा-पाठ का आधार बनाया गया था। इस बार वाराणसी के सभी पंडालों में ललिता सहस्त्रानामम् (संस्कृत) की हिंदी में पहली बार अनुवादित पुस्तक वितरित की जाएगी।

काशी अन्नपूर्णा मंदिर परिसर में पुस्तक का विमोचन

वहीं, काशी अन्नपूर्णा मंदिर परिसर से इस "ललिता सहस्रनामम् - सरल अनुवाद एवं भावार्थ" नामक पुस्तक का विमोचन भी महंत शंकर पुरी द्वारा किया जा चुका है। इस धर्म ग्रंथ का पहली बार हिंदी के सरल शब्दों में अनुवाद किया गया है।

तमिलनाडु से वर्ष 1989 में काशी आए लेखक पी एस वेंकटरमणन ने ललिता सहस्त्रानमम्र का भावार्थ तैयार किया है। इससे पहले उन्हाेंने इसका अंग्रेजी में भी अनुवाद किया है। पुस्तक में सहस्रनामम् की उत्पत्ति, दूसरे भाग में मां दुर्गा के 1000 नाम और तीसरे में सहस्रनाम पठन के लाभ बताए गए हैं।

संस्कृत से हिंदी में अनुवाद हुई ललिता सहस्रनामम् पुस्तक की प्रति।
संस्कृत से हिंदी में अनुवाद हुई ललिता सहस्रनामम् पुस्तक की प्रति।

विष्णु ने अगस्त्य ऋषि को दिया था ललिता सहस्रनामम् का उपदेश

वेंकटरमणन ने बताया कि विष्णु भगवान ने हयग्रीव के रूप में अगस्त्य ऋषि को ललिता सहस्रनामम् का उपदेश दिया था। इसका पारायण दक्षिण भारत और कई अन्य राज्यों में नियमित रूप से घरों में किया जाता है। इस ग्रंथ का पहला श्लोक श्रीमाता श्री महाराज्ञी श्रीमत-सिंहासनेश्वरी में मां दुर्गा को दिव्य माता कहा गया है। तो कि सभी जीवों की मां हैं। माता संपूर्ण ब्रह्मांड की महारानी हैं और सिंह के ऊपर विराजमान हैं। देव लोगों के सेवा के लिए मां पवित्र ज्ञान और चेतना की अग्नि से उत्पन्न हुई हैं।

पीएम मोदी को भेंट की गई थी पुस्तक की प्रति

उन्होंने कहा कि इस पुस्तक के प्रकाशक धीरज शर्मा ने शारदीय नवरात्रि में काशी के अलावा विंध्यवासिनी देवी और हिमाचल प्रदेश की शक्ति पीठ, ज्वाला मुखी देवी, वज्रेश्वरी देवी, कोल्हापुर के महालक्ष्मी देवी मंदिरों में भी रखवाया जाएगा। वेंकटरमणन की पत्नि वी. ललिथा द्वारा लिखित 'शिवलिंग्स ऑफ काशी' की डेढ़ लाख प्रति दुनिया भर में बंटवाई गई थी, जिसकी एक प्रति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी भेंट की गई थी।

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