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वाराणसी...3 साल बाद मरीज को आया होश:70 साल की महिला थीं कोमा में, घर वालों ने छोड़ दी थी उम्मीद

वाराणसी7 महीने पहले
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70 साल की महिला और उनका इलाज करने वाले प्रो. ओमशंकर। - Money Bhaskar
70 साल की महिला और उनका इलाज करने वाले प्रो. ओमशंकर।

वह 3 साल से कोमा में थीं। इस बीच 2 बार तो बिल्कुल मरने की कगार पर पहुंच गई थीं। घर वालों ने भी उम्मीद छोड़ दी थी। लेकिन बुधवार को चमत्कार हो गया। उन्हें न सिर्फ होश आया, बल्कि लोगों से बातचीत भी की। यह देखकर डॉक्टरों और परिजनों की खुशी का ठिकाना नहीं है।

मामला वाराणसी के सर सुंदरलाल अस्पताल का है। यहां देवरिया की करीब 70 साल की एक महिला 2018 से भर्ती हैं। BHU में ह्रदय रोग विभाग के अध्यक्ष प्रो. ओमशंकर ने बताया कि 3 साल पहले OPD में ये माताजी मुझे दिखाने आई थीं। तब उनके हाथ-पैर में सूजन थी। वह न तो सांस ले पा रही थीं और न ही लेट पा रही थीं। हमने उनको तुरंत भर्ती करवाया। 2-3 दिन में उनकी तबीयत कुछ ठीक हो गई। इसके बाद वह जबरन छुट्टी कराकर घर चली गईं।

घर जाने के 1 सप्ताह बाद आया फालिज का अटैक
प्रो. ओमशंकर ने बताया कि घर जाने के 1 सप्ताह बाद ही उनकी तबीयत फिर से खराब हो गई। उनको फालिज (लकवा) का अटैक आ गया। इसके बाद उन्हें देवरिया के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया। लेकिन सुधार होने की जगह हालत और बिगड़ गई। इसके बाद मरणासन्न और बेहोशी की हालत में उन्हें फिर मेरे पास लाया गया। अब तक उनकी दोनों किडनियां भी खराब हो चुकी थीं। साथ ही उनकी पीठ पर एक बड़ा घाव भी हो गया था। उनको कोई डॉक्टर अस्पताल में भर्ती करने को तैयार नहीं था।

बार-बार करना पड़ा डायलिसिस
उन्होंने बताया कि हमने उनको भर्ती कराया। उन्हें एक हफ्ते से ज्यादा समय से यूरिन नहीं हो रहा था। जिसकी वजह से कई बार डायलिसिस कराना पड़ा। इसके अलावा घाव की वजह से उनको तेज बुखार हो गया था। हालात इतनी गंभीर थी कि रिश्तेदारों को यकीन हो गया था कि अब वह नहीं बचेंगी। लेकिन डॉक्टरों की उम्मीद अभी भी जिंदा थी।

उन्हें 15 दिनों तक अलग-अलग विभागों के डॉक्टरों से संपर्क कर ट्रीटमेंट दिया गया। इसके बाद तबीयत में धीरे-धीरे सुधार होना शुरू हुआ। किडनियां काम करने लगीं।

डॉक्टर बोले- यह अच्छा एक्सपीरियंस है डॉक्टर ने बताया कि मरीज अब काफी ठीक महसूस कर रहा है। उन्हें पूरी तरह होश आ गया है। अब बुखार भी नहीं है। बातचीत और हंसी-मजाक भी कर रही हैं। उन्होंने कहा कि बुधवार को 3 साल बाद उनको OPD में बात करते देखा। साथ ही बिना किसी परेशानी के वह खाना भी खा रही थीं। यह पल काफी भावुक करने वाला था। एक डॉक्टर के तौर पर ऐसे लोगों की जान बचाने में जिस खुशी का अहसास होता है, वह अनमोल है। यही पूरे जीवन की कमाई है।

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