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MP को रणजी ट्रॉफी दिलाने में कार्तिकेय का अहम रोल:सुल्तानपुर के कुआसी गांव में जश्न, बेटे को इंडियन टीम की जर्सी में देखना चाहता है पिता

सुल्तानपुर3 महीने पहले
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रणजी ट्रॉफी 2022 के फाइनल में मुंबई को छह विकेट से हराकर मध्यप्रदेश की टीम पहली बार रणजी चैंपियन बनी है। मध्यप्रदेश की इस जीत में सुल्तानपुर के बल्दीराय ब्लॉक क्षेत्र के कुआसी गांव निवासी कुमार कार्तिकेय सिंह का बड़ा योगदान रहा है। कार्तिकेय ने रणजी ट्रॉफी के पूरे सीजन में 11 पारियों में 32 विकेट लिए हैं।

बल्दीराय के कुआसी गांव का है कार्तिकेय

मध्यप्रदेश की इस टीम में कोई भी बड़ा खिलाड़ी नहीं था। लेकिन मुंबई और बंगाल जैसी मजबूत टीमों को मात देकर मध्य प्रदेश ने पहली बार रणजी ट्रॉफी अपने नाम की है। इससे पहले 1999 में टीम फाइनल में पहुंची थी, लेकिन कर्नाटक ने खिताबी मैच में उसे मात दी थी। इस बार मध्य प्रदेश के रणजी इतिहास की सबसे सफल टीम मुंबई को हराकर खिताब जीता है। मध्यप्रदेश की टीम से खेल रहे जिले के बल्दीराय विकास क्षेत्र के कुंवासी गांव निवासी कुमार कार्तिकेय ने इस सीजन में सबसे ज्यादा विकेट लेने के मामले में दूसरे नंबर पर रहे। उन्होंने छह मैचों की 11 पारियों में 32 विकेट अपने नाम किए। इस दौरान एक पारी में उन्होंने 50 रन देकर छह विकेट लेने का कारनामा भी किया। वहीं, मैच में उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 128 रन देकर आठ विकेट रहा।

आईपीएल में भी मचाई थी धूम।
आईपीएल में भी मचाई थी धूम।

मिठाई बांटकर मना जश्न

उन्होंने 21 के औसत और 2.27 के इकोनॉमी रेट से गेंदबाजी की। ट्राफी के फाइनल मैच में मुंबई के पांच अहम विकेट कार्तिकेय ने लिए। कुमार कार्तिकेय के शानदार प्रदर्शन पर उनके गांव में जश्न का माहौल रहा लोगों ने एक दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशियां बांटी। एमपी के रणजी ट्रॉफी पहली बार जीतने एवं इसमें गांव के कुमार कार्तिकेय के अहम योगदान पर पटाखे भी फोड़े गए। इस मौके पर जयेंद्र सिंह, रामचंद्र सिंह, रंजीत सिंह, अमरेश सिंह, श्यामधर सिंह, रघुनाथ सिंह, शोभनाथ सिंह, धर्मेश सिंह, रूपेश सिंह, शुभम सिंह, शिवम सिंह, भास्कर सिंह, शिव शंकर यादव, तेज भान कनौजिया, सौरभ सिंह,धर्मेंद्र सिंह,राज बहादुर शर्मा समेत ग्रामवासी मौजूद रहे।

खिलाड़ी के पिता।
खिलाड़ी के पिता।

पिता झांसी में हैं सिपाही

कुमार कार्तिकेय के पिता श्याम नाथ सिंह पीएसी में तैनात हैं। झांसी में तैनात श्याम नाथ सिंह ने फोन पर बात करते हुए बताया कि कार्तिकेय में क्रिकेट के प्रति इतना जुनून था कि वह खाना पीना खाना भी भूल जाता था। कानपुर में तैनाती के दौरान क्रिकेट ग्राउंड पर कभी कभी मुझे खुद या कार्तिकेय की मम्मी को खाना लेकर जाना पड़ता था। एक स्टंप लगाकर लगातार गेंदबाजी की प्रैक्टिस करना उसकी नियमित दिनचर्या थी। अब सपना है कि कार्तिकेय टीम इंडिया की जर्सी में देश का नेतृत्व करें हमारे क्षेत्र और जिले का नाम रौशन करे।

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