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सिद्धार्थनगर में शहीद-ए- मिल्लत कॉन्फ्रेंस में जुटे उलेमा:500 साल पुरानी है बुजुर्गों को याद करने की परंपरा, कहा- मुस्लमान शिक्षा के मामले में बहुत पीछे

सिद्धार्थनगरएक महीने पहले
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सिद्धार्थनगर जिले में आस्ताने-शहीद-ए-मिल्लत में रविवार की रात शहीद-ए-मिलकत कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। ये आयोजन अपने बुज़ुर्ग को याद करने लिए होता है। करीब 500 साल पहले से इसका आयोजन होता आ रहा है। आयोजन में नामचीन उलेमाओं वक्ताओं ने भाग लिया। स्थानीय शहीद-ए-मिल्लत के उर्स में अकीदतमनदों ने चादर चढ़ाई और दुआएं भी मांगी।

'मोहब्बत व भाईचारे का पैगाम देता है इस्लाम'

डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के ग्राम बसडिलिया में शहीद-ए-आजम कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। मुरादाबाद से आए मुख्य वक्ता सैय्यद शबाहत हुसैन ने कहा कि इस्लाम मोहब्बत व भाईचारे का पैगाम देता है। इस पैगाम को हमें आम लोगों तक पहुंचाना होगा। आज शिक्षा के मामले में मुसलमान काफी पीछे हैं। उन्हें दीनी और दुनियावी दोनों शिक्षा पर जोर देना होगा। तभी एक सफल जीवन में कामयाबी मिल सकती है।

उन्होंने यह भी कहा कि वक्त का सही इस्तेमाल करने वाला एक कामयाब इंसान होता है। वक्त को पहचानों और उसे बर्बाद मत करो। नौजवान को मार्गदर्शन आवश्यकता है। सबसे पहली सीढ़ी मां-बाप होते हैं। अगर बचपन में मां बाप का प्यार मिला तो वह बच्चे गलत कामों की तरफ नहीं जा पाते हैं। जब मां-बाप नेक होंगे तो बच्चे भी नेक होंगे। मां बाप की कदर और उनकी इज्जत करना सभी का दायित्व बनता है।

'मुस्लिम शिक्षा के मामले में बहुत पीछे'

इस मौके पर कान्फ्रेंस को खिताब करते हुए जाकिर इस्माइली बहराइच ने कहा कि शहीदे आजम कॉन्फ्रेंस में जुटने का उद्देश्य यह है कि सभी लोग दीन की तरफ बढ़े और दुनिया को भी सुरक्षित रखें। हर कामयाब इंसान के पीछे मां-बाप की दुआएं होती हैं। इस मौके पर हाफिज अरबाब फारुकी व मोइनुद्दीन फारूकी ने कहा कि आज नौजवान दीन से भटक रहा है। इसी वजह से वह परेशान भी है।

उन्होंने कहा कि मस्जिदों को आबाद करें और नेकी के रास्ते पर चलें। उन्होंने यह भी कहा कि ईमान वाला ही जन्नत का हकदार है। जबकि इससे पूर्व तिलावते कलाम पाक से कान्फ्रेंस की शुरुआत की गई। इसके बाद मुंबई से आए जुबेर फैजी ने अपना कलाम पेश करते हुए कहा कि 'अजमेर चल कर देखो रुतबा अली का'।

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