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सिद्धार्थनगर में अमरगढ़ महोत्सव का हुआ शुभारंभ:गायत्री परिवार के लोगों ने किया हवन, बौद्ध भिक्षुओं ने लिया हिस्सा

सिद्धार्थनगर2 महीने पहले
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सिद्धार्थनगर में अमरगढ़ महोत्सव का हुआ शुभारंभ। - Money Bhaskar
सिद्धार्थनगर में अमरगढ़ महोत्सव का हुआ शुभारंभ।

सिद्धार्थनगर में नगर पंचायत डुमरियागंज स्थित अमरगढ़ शहीद स्थल पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के याद में तीन दिवसीय अमरगढ़ महोत्सव का शुभारंभ शुक्रवार से तमाम कार्यक्रमों के बीच किया गया। डुमरियागंज विधायक राघवेंद्र प्रताप सिंह व मुख्य विकास अधिकारी सिद्धार्थ नगर पुलकित गर्ग ने दीप प्रज्वलित व झंडारोहण करके शुभारंभ किया।

स्कूली बच्चों ने प्रस्तुत किए कार्यक्रम

कार्यक्रम के शुरुआत में विभिन्न धर्मों के धर्मगुरुओं ने अपने-अपने अंदाज में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को नमन करते हुए प्रार्थना की। गायत्री परिवार के लोगों द्वारा हवन करते हुए मंत्र उच्चारण किया गया। इसके बाद मौलाना शारिब, मौलाना हुज्जत महफूज, रज्जब अली ने शहीदों की याद में दुआएं की। वहीं सिख धर्म गुरुओं की तरफ से ज्ञानी प्रदीप सिंह बस्ती, विश्व पाल सिंह, हरजीत सिंह, परमजीत भाटिया आदि ने प्रार्थना की। इसके बाद बौद्ध भिक्षु आनंद सागर श्रावस्ती ,अभयानंद, प्रयाग रतन, शीला नंद आदि ने भी प्रार्थना सभा में हिस्सा लिया। तत्पश्चात पूर्व माध्यमिक विद्यालय डुमरियागंज की बालिकाओं ने स्वागत गीत व अन्य कार्यक्रम प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में प्राथमिक विद्यालय मंगराव के बच्चों द्वारा भी इस मौके देशभक्ति गीत प्रस्तुत किया गया।

यहां की लड़ाई में छूटे थे अंग्रेजों के पसीने

इस के बाद स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के परिवार वालों को शॉल, प्रशस्ति पत्र व शील्ड देकर सम्मानित किया गया। सम्मान समारोह में विभिन्न धर्मों के धर्मगुरुओं को भी मुख्य अतिथि द्वारा सम्मानित किया गया। अपने मुख्य अतिथि संबोधन में डुमरियागंज विधायक राघवेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि अमरगढ़ शहीदों का योगदान कभी भुलाया नहीं जा सकता है। इस शहीद स्थल का इतिहास काफी पुराना है। जिसे समझने व पढ़ने की आवश्यकता है। डुमरियागंज मुख्यालय से 1 किलोमीटर दूर अमरगढ़ स्थल पर अंग्रेजों के विरुद्ध ऐसी लड़ाई लड़ी गई थी। जिससे अंग्रेजों के पसीने छूट गए थे। इस जंग में 80 भारतीयों को अंग्रेजों द्वारा क्रूरता के साथ शहीद कर दिया गया था और न जाने कितने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी नदी में डूब कर वीरगति को प्राप्त हो गए थे। इस लड़ाई को याद करते हुए आज यहां पर अमरगढ़ महोत्सव का आयोजन किया गया है।