पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Market Watch
  • SENSEX59981.34-0.2 %
  • NIFTY17902.6-0.2 %
  • GOLD(MCX 10 GM)480700.26 %
  • SILVER(MCX 1 KG)633193.1 %

सिद्धार्थनगर में निकाली गई अमरगढ़ शहीद सम्मान यात्रा:यहां अंग्रेजी ब्रिगेडियर ने 1000 क्रांतिकारियों पर चलवाई थी गोलियां, 15 अगस्त पर फहराया गया था 101 फीट लंबा तिरंगा

सिद्धार्थनगर2 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
सिद्धार्थनगर में बच्चों ने निकाली अमरगढ़ शहीद सम्मान यात्रा। - Money Bhaskar
सिद्धार्थनगर में बच्चों ने निकाली अमरगढ़ शहीद सम्मान यात्रा।

सिद्धार्थनगर में स्कूली बच्चों, कारोबारियों व अन्य लोगों ने डुमरियागंज विधायक की पहल पर अमरगढ़ शहीद सम्मान यात्रा निकाली। यहां अंग्रेजी सेना के ब्रिगेडियर ने 1000 क्रांतिकारियों पर गोलियां चलवाई थी। जिसमें 80 लोगों की मौत हुई थी। 15 अगस्त को भी यहां 101 फीट लंबा तिरंगा फहराया गया था। 26 नवंबर को यहां अमरगढ़ महोत्सव भी लगने वाला है।

26 नवंबर से शुरू होगा अमरगढ़ महोत्सव
जिले के डुमरियागंज विधायक राघवेंद्र प्रताप सिंह की पहल पर आयोजित होने वाले अमरगढ़ महोत्सव की सफलता के लिए बुधवार को भव्य अमरगढ़ शहीद सम्मान यात्रा निकाली गई। यात्रा डुमरियागंज लोनिवि निरीक्षण भवन से निकलकर रोडवेज तिराहा होते हुए माली मैनहा रोड स्थित अमरगढ़ शहीद स्थल पर पहुंची। सुबह 11 बजे शुरू हुई इस यात्रा में पूमावि गौहनिया राज स्कूल के बच्चे, कस्बे के व्यापारी, प्रशासनिक अधिकारी और अन्य लोग शामिल हुए। अमरगढ़ के 80 बलिदनियों की याद में बजरंग चौक बेवां चौराहा पर 15 अगस्त के दिन 101 फीट ऊंचा तिरंगा फहराया गया था। अब तीन दिनों तक चलने वाला अमरगढ़ महोत्सव 26 नवंबर से प्रारंभ हो रहा है।

राप्ती नदी में कूद गए थे कई क्रांतिकारी
विधायक डुमरियागंज और तत्कालीन एसडीएम त्रिभुवन ने प्रयास किया तो यहां देश की आजादी के लिए सबसे पहले दी गई शहादत के सबूत मिले। द क्रूज आफ पर्ल राउंड द वल्र्ड के 11 वे अध्याय में इस स्थल पर शहीद होने वालों का जिक्र है। बताया जाता है कि एफ रोक्राफ्ट कमांडिंग ब्रिगेडियर को सूचना मिली कि डुमरियागंज से एक मील दक्षिण आम के बाग में 1000 क्रांतिकारी मौजूद हैं। 26 नवंबर 1858 को अंग्रेजों ने उन्हें घेर लिया। तथा गोलियां बरसाई। इसमें 80 क्रांतिकारी शहीद हो गए। साथ ही तमाम राप्ती नदी में डूब गए। इस लड़ाई में कैप्टन गिफर्ड को क्रांतिकारियों ने मौत के घाट उतार दिया। जिसकी कब्र आज भी वहां मौजूद है। इस क्रांतिकारी घटना के मुख्य प्रेरणा स्रोत नाना साहब पेशवा के भाई बालाराव व मो नवाज थे।