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शामली में आंख के डॉक्टर ने की लाखों की ठगी:रसीदों की चेकिंग में हुआ खुलासा तो लौटाए सिर्फ चार लाख रुपये, संस्था को भारी धांधली की आशंका

शामली2 महीने पहले
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संस्था के सचिव ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। - Money Bhaskar
संस्था के सचिव ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।

शामली जिले के सिटी शहर की एक सामाजिक संस्था में आंखों के ऑपरेशन के नाम पर चिकित्सक द्वारा मरीज से पैसे ऐंठने का मामला सामने आया है। मामला जब संस्था के पदाधिकारियों के पकड़ में आया तो आरोपी चिकित्सक ने करीब पांच लाख रुपये लौटा दिए। जबकि मामला काफी बड़ी रकम से जुड़ा माना जा रहा है। अब संस्था के सचिव ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है, जिससे संस्था में हलचल का माहौल है।

सदर कोतवाली क्षेत्र के करनाल रोड पर भोलेश्वरनाथ महादेव योग साघना समिति द्वारा मंदिर परिसर में ही शाकुंभरी नेत्र चिकित्सालय का संचालन किया जाता है। एक चिकित्सक को आंखों की जांच के लिए तैनात किया गया है। करीब 11 साल पहले अस्पताल में 22 लाख रुपये की लागत से एक फीफो मशीन जांच के लिए लगाई गई है।

रसीदों की जांच में धांधली आई सामने
जहां प्रत्येक शनिवार को मेरठ से डॉ. प्रियांक गर्ग आकर 5-6 मरीजों की आंखों का ऑपरेशन करते हैं। इसके एवज में संस्था की ओर से एक निश्चित फीस ली जाती है। बताया जा रहा है कि पिछले दिनों संस्था के सचिव नरेन्द्र मित्तल ने अस्पताल की रसीदों की जांच की तो उसमें बड़ी धांधली सामने आई।

मीमो बुक व रसीद में मिला अंतर
अस्पताल संचालक द्वारा मरीजों को दी जाने वाली रसीद और मीमो बुक में दर्ज राशि में भारी अंतर मिला। इसकी शिकायत संस्था के अध्यक्ष अरविन्द संगल, कोषाध्यक्ष कमल गर्ग और अन्य पदाधिकारियों से की गई। आरोप है कि चिकित्सक ने सैकड़ों से भी ज्यादा मरीजों से 20-22 हजार रुपये वसूले, जबकि रसीद काफी कम रुपये की दी। अपने आप को फंसता देख चिकित्सक ने अगले ही दिन संस्था को पांच लाख रुपये लौटा दिए।

बड़ी धांधली होने की जताई संभावना
अस्पताल में प्रतिवर्ष करीब डेढ़ सौ से दो सौ मरीजों के ऑपरेशन किए जाते हैं। ऐसे में रुपयों की धांधली काफी बड़ी हो सकती है। उधर, सचिव नरेन्द्र मित्तल ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस्तीफे पर आगामी 26 जून को संस्था की वार्षिक आम बैठक में होने की जानकारी मिल रही है।

साक्ष्यों को एकत्रित कर रहा संस्था
कोषाध्यक्ष कमल गर्ग का कहना है कि उन्होंने कभी अस्पताल की रसीदें चेक नहीं की थी। उन्हें केयर टेकर चिकित्सक कच्ची पर्ची देकर जाता था। उसमें जो रकम दर्ज होती थी, वह बैंक में जमा होती थी। संस्था के अध्यक्ष अरविन्द संगल का कहना है कि सारा काम संरक्षक देखते हैं। फिलहाल इसकी बड़े स्तर पर जांच की जा रही है। साक्ष्यों को इकट्ठा किया जा रहा है। इसके बाद पुलिस से कार्रवाई की मांग की जाएगी।

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