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संतकबीर नगर में करमैनी-बेलौली बांध बनाने में जुटा विभाग:बांध के किनारे बसे लोगों को सता रहा बाढ़ का डर, काम पूरा करने के लिए मई तक का था समय

संतकबीर नगर2 महीने पहले
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संतकबीरनगर में अगर अचानक मेघ बरसे तो जिम्मेदारों की पोल खुल सकती है, मानसून सिर पर हैं। तैयारियां अभी भी पूरी नही हो पाई है। आपको बता दें कि संतकबीरनगर जिले उत्तरी छोर के मेंहदावल क्षेत्र में राप्ती नदी के उफान की आहट अभी से लोगों को सताने लगी है। यहां पर करमैनी-बेलौली बांध की मरम्मत के लिए शासन से 25 करोड़ रुपए अवमुक्त हो गया था, जिसको पूरा करने के लिए मई माह तक का समय दिया गया गया था।

इस कार्य में कार्यदायी संस्था द्वारा लापरवाही बरती गई है, जिसके कारण काम में देरी हुई और मानसून ने भी दस्तक देना शुरू कर दी है। मानसून के दस्तक देने से लोगों को गर्मी से निजात जरूर मिली है, लेकिन मेंहदावल तहसील क्षेत्र के करीब एक दर्जन से अधिक गांवों के ग्रामीणों के माथे पर चिंता की लकीरें दिखाई देने लगी हैं। उन्हें बाढ़ से होने वाले नुकसान की चिंता अब सताने लगी है। बाढ़ खंड और प्रशासन भले ही बाढ़ से बचाव के दावे कर रहा हो। लेकिन ग्रामीण आशंकित है।

बाढ़ से निपटने के लिए प्रशासन के पास कोई तैयारी नहीं

ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ से निपटने के लिए कोई अतिरिक्त तैयारी नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ खंड और प्रशासन ने कटान रोकने के लिए इस बार भी कोई अतिरिक्त तैयारी नहीं की है। ग्रामीण इंद्रजीत ने बताया कि कुछ जगह पर बालू भरे कट्टे लगवाए हैं। पिछले साल बारिश और बाढ़ से क्षतिग्रस्त बांध और संपर्क मार्गों की मरम्मत के नाम पर औपचारिकता निभाई गई है। उन्हें आशंका है कि राप्ती नदी ने अगर अपना ने विकराल रूप दिखाया तो उनकी खरीफ की मक्का, तिल, बाजरा, धान, ईख आदि फसलों के बर्बाद होने के साथ ही जमीनें कटने का भी खतरा है।

बंधे पर मिट्‌टी डालते मजदूर।
बंधे पर मिट्‌टी डालते मजदूर।

सांसद प्रवीण और डीएम ने किया निरीक्षण

गांव में पानी भरने से गत वर्षो की तरह उन्हें इस बार भी सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ेगा। इसके पहले डीएम दिव्या मित्तल और सांसद प्रवीण निषाद ने अलग-अलग बाढ़ क्षेत्र का निरीक्षण कर तैयारियों का जायजा लिया था। बाढ़ खंड व तहसील प्रशासन को आवश्यक दिशा निर्देश दिए थे। मानसून दस्तक देने को हैं, लेकिन यहां आधी-अधूरी तैयारी के साथ संभावित आपदा से निपटने के लिए कमर कस चुका है। इतना ही नहीं जल संसाधन विभाग के पास न तो नाव है और न ही नाविक।

प्रशासन बाढ़ से निपटने की कर रहा पूरी तैयारी

जिले में पिछले वर्षों में आई बाढ़ व अतिवृष्टि के मद्देनजर जिला आपदा प्राधिकरण की ओर से इस बार संभावित बाढ़-अतिवृष्टि से निपटने की तैयारी की जा चुकी है, लेकिन बाढ़ के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला जल संसाधन विभाग अब भी कोई खास तैयारी नहीं कर पाया है। ऐसे में आपदा के दौरान प्रशासन के पंगू होने की आशंका बनी हुई है।

क्या बोले अवर अभियंता

अवर अभियंता वीरेंद्र यादव ने कहा की आधा से ज्यादा काम लगभग अस्सी परसेंट काम हो चुका है। बाकी बचे काम जल्द कर किए जाएंगे। विभाग पूर्ण रूप से बाढ़ से निपटने के लिए तैयार है।

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