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संतकबीरनगर में घरों में पकड़े जा रहे मच्छर:टीम टॉर्च की रोशनी पर ढूंढती है, सांस से खींच कर पकड़ती है, भेज रहे लैब

संतकबीर नगर2 महीने पहले
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संतकबीर नगर में मच्‍छर जनित रोगों पर रोकने को लेकर अभियान चलाया जा रहा है। ऐसे में जिन गांवों में मरीज अधिक पाए गए हैं वहां एंटोमोलॉजिकल सर्वे कराया जा रहा है। इन गांवों में टीम जाकर विशेष समयावधि में मच्‍छरों पकड़ रही है। पकड़े गए मच्‍छरों को प्रयोगशाला में अध्‍ययन के लिए भेजा जा रहा है। इस दौरान मच्‍छरों के प्रकृति, प्रकार तथा नर व मादा का औसत निकाला जाएगा। इसके बाद मच्‍छरजनित रोगों से बचने की रणनीति बनाई जाएगी।

अध्‍ययन के लिए एंटोमोलॉजिकल लैब में भेजा जा रहा

अपर मुख्‍य चिकित्‍सा अधिकारी वेक्‍टर बार्न डिजीज कंट्रोल प्रोग्राम डॉ वी.पी पांडेय ने बताया कि जिले के सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केंद्र, खलीलाबाद क्षेत्र के गिरधरपुर गांव तथा प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केंद्र, बधौली के नौवाडाड़ गांव में एंटोमोलॉजिकल सर्वे शुरू किया गया है। कीट संग्रहकर्ता की टीम के साथ मलेरिया निरीक्षक इन दोनों गांवों में जाकर मच्‍छरों को पकड़ रहे हैं। उन्‍हें अध्‍ययन के लिए एंटोमोलॉजिकल लैब में भेजा जा रहा है।

मच्‍छरों की जांच की जा रही है

अभी प्रथम चरण में इन्‍हीं दो गांवों में सर्विलांस की कार्रवाई चल रही है। इन दोनों गांवों का सर्वे पूरा हो जाने के बाद अन्‍य गांवों में सर्वे होगा। इनमें मलेरिया, फाइलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया, जेई, एईएस आदि फैलाने वाले मच्‍छरों की जांच की जा रही है। इस अभियान से मच्छरों की रोकथाम और उनसे होने वाली बीमारियों के बारे में अहम निष्कर्ष निकाले जा सकेंगे ।

मलेरिया इंस्‍पेक्‍टर प्रेम प्रकाश ने कहा कि यह एक नया अनुभव था। बस्‍ती से आए कीट संग्रहकर्ता ने मच्‍छरों को संग्रह करने, उनकी क्षेत्र विशेष में उपलब्‍धता से सम्‍बन्धित विभिन्‍न जानकारियां प्रदान की। अभी टीम ने दो दिन ही सर्वे किया है। वहीं मलेरिया इंस्‍पेक्‍टर सीमा सिंह, अतिन श्रीवास्‍तव, दीपक तथा अन्‍य लोगों ने इस सर्वे में सहभागिता की।

यन्‍त्र की सहायता से मच्‍छरों को सांस के जरिए यंत्र में खींच लेते हैं

मच्‍छरों को पकड़ने के लिए कीट संग्रहकर्ता संबंधित व्‍यक्ति के घर में जाते हैं। उसकी आलमारी के पीछे, कपड़े रखने के स्‍थानों, अंधेरे स्‍थानों व बोरे व अनाज रखने वाले स्‍थानों में जाते हैं। वहां पर टार्च जलाकर मच्‍छरों को देखते हैं। उनकी गिनती करते हैं तथा एक विशेष प्रकार के यन्‍त्र की सहायता से मच्‍छरों को मुंह की सांस के जरिए अपने यंत्र में खींच लेते हैं। इसके बाद उस मच्‍छर को परखनली में बन्‍द करके ऊपर से रुई लगा दी जाती है।

हर शुक्रवार को पांच घरों में मच्‍छरों का संग्रह करती है

इसके बाद उस पर साइट का लेबल लगाकर सम्‍बन्धित प्रयो‍गशाला को भेज दिया जाता है। जिले में दो सेंटीनल साइट पर अभी यह कार्य किया जा रहा है। इसमें खलीलाबाद ब्‍लाक क्षेत्र का गिरधरपुर गांव तथा बघौली ब्‍लाक क्षेत्र का नाऊडॉड़ गांव शामिल है। इन दोनों गांवों में बस्‍ती से आने वाले कीट संग्रहकर्ता प्रदीप श्रीवास्‍तव के साथ जिले के मलेरिया इंस्‍पेक्‍टर की टीम जाती है। हर शुक्रवार को पांच घरों में मच्‍छरों का संग्रह करती है।

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