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'सांझी प्रतियोगिता' में भाग लेकर बने संस्कृति प्रहरी:आस्था के साथ लोक कला जीवंत रखने का रास्ता, किए जांएगे सम्मानित

सहारनपुर2 महीने पहले
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नवरात्र में बनाएं जानी वाली सांझी का प्रतिकात्मक फोटो

'विरासत' यूनिवर्सिटी हेरीटेज रिसर्च सेंटर, शोभित विश्वविद्यालय गंगोह 'सांझी' प्रतियोगिता करा रहा है। 'सांझी' पश्चिमी यूपी की लोककला है। लोक परंपरा के अनुसार तालाब से मिट्टी लाकर अपने हाथों से 'सांझी' को बनाकर गोबर से दीवार पर चिपकाते हैं। हमारा प्रयास इसी लोक परंपरा को प्रोत्साहित करना है। 'सांझी' प्रतियोगिता में शामिल होकर लोक कला को बचाने में सहभागिता निभाएं। यह कहना है इतिहासकार राजीव उपाध्याय का।

अच्छा 'सांझी' बनाने वाले होंगे सम्मानित

'सांझी' को बनाने के बाद गोबर से दीवार में चिपका दिया।
'सांझी' को बनाने के बाद गोबर से दीवार में चिपका दिया।

संयोजक समन्वयक, विरासत यूनिवर्सिटी हेरीटेज रिसर्च सेंटर, शोभित विश्वविद्यालय, गंगोह, राजीव उपाध्याय 'यायावर' के बताया कि उत्कृष्ट सांझी बनाने वाले प्रतिभागियों को एक प्रथम, दो द्वितीय, दो तृतीय और पांच सांत्वना पुरस्कार दिए जाएंगे।

यह है प्रतियोगिता में शामिल होने के नियम

  • प्रतियोगिता में किसी भी आयु का प्रतिभागी शामिल हो सकता है।
  • 'सांझी' प्रतियोगिता के अंतर्गत प्रतिभागी को 'सांझी' अपने ही घर पर बनाकर सजानी होगी। 'सांझी' मिट्टी से बनानी होगी।
  • 'सांझी' के साथ चांद, सूरज, टिकड़ी, तोते बनाने अनिवार्य हैं। अन्य कुछ भी बनाकर 'सांझी' को सजाया जा सकता है।
  • पुराने और परम्परागत ढंग से बनाई 'सांझी' को महत्व दिया जाएगा। ऐसी 'सांझी' बनाने के लिए बुजुर्ग महिलाओं से सलाह और सहयोग लें।
  • सांझी स्थापना के बाद प्रथम, द्वितीय नवरात्र में सांझी के चित्र खींचकर वॉट्सऐप करने होंगे। वॉट्सऐप नम्बर 9358445959 है।
  • सांझी को देखने के लिए 'विरासत' से जुड़े कलाकार आपके घर पहुंच सकते हैं।
  • सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र दिए जाएंगे।
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