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'संकट' से पहले डॉक्टर दीजिए सरकार:सहारनपुर सेहत विभाग में बाल रोग विशेषज्ञों की कमी, कैसे होगा बच्चों का इलाज

सहारनपुर7 महीने पहले
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प्रतीकात्मक फोटो - Money Bhaskar
प्रतीकात्मक फोटो

कोरोना की तीसरी लहर के साथ यूपी सरकार और स्वास्थ्य महकमा एक्टिव मोड़ पर है। रोजाना संक्रमितों का आंकड़ा बढ़ रहा है। बड़ों के साथ बच्चे भी संक्रमित हो रहे हैं। बच्चों की सेहत का ध्यान रखते हुए पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (पीकू) और नियोनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट (नीकू) वार्ड के साथ पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (पीआईसीयू) भी तैयार हो चुकी है। लेकिन बाल रोग विशेषज्ञों की कमी कहीं ना कहीं स्वास्थ्य विभाग को खल रही है।

चिकित्सकों के बिना कोरोना से जंग

प्रतीकात्मक फोटो।
प्रतीकात्मक फोटो।

सहारनपुर में तीसरी लहर की शुरुआत हो चुकी है। डेढ़ माह में करीब 234 कोरोना संक्रमित मरीज मिल चुके हैं। गनीमत है कि अभी किसी की तबीयत ज्यादा नहीं बिगड़ी है। सभी संक्रमित मरीज को होम आइसोलेट किया हुआ है। यदि स्थिति भयावह हुई, खासकर बच्चों के लिए तो स्थिति बिगड़ सकती है। क्योंकि स्वास्थ्य विभाग के पास बाल रोग विशेषज्ञ के डॉक्टर 4 ही है। यहीं नहीं स्टाफ की भी कमी हैं।

मेडिकल कॉलेज में रही मरीजों की कतार
कोरोना की पहली और दूसरी लहर में कोरोना संक्रमित मरीजों की कतार राजकीय मेडिकल कॉलेज में लगी थी। सबसे ज्यादा मरीज भर्ती यहीं किए गए और यहीं पर सबसे ज्यादा मौत भी हुई थी। दूसरी लहर में ऑक्सीजन की कमी से सहारनपुर ही नहीं पूरे देश में किल्लत रही है। हालांकि सेहत विभाग के अनुसार ऑक्सीजन की किल्लत को दूर कर लिया गया है। लेकिन चिकित्सकों की कमी यहां भी कम नहीं हुई है।

दूसरी लहर में स्वास्थ्य विभाग ने प्रोफेसर रेंक के कुछ वरिष्ठ चिकित्सकों को मेडिकल कॉलेज भेजा था। लेकिन दूसरी लहर खत्म होने के साथ फिर से स्थानांतरित कर दिया गया था। जुलाई माह में 10 प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर स्थानांतरित किए गए। MBBS के छात्रों को पढ़ाने के लिए पर्याप्त आचार्य और न ही सहायक अध्यापक।

61 के सापेक्ष 29 कार्यरत
SBD अस्पताल में 61 पद स्वीकृत है, लेकिन कई सालों से 29 चिकित्सक ही कार्यरत है। वहीं बाल रोग विशेषज्ञ की बात करें तो 3 एसबीडी अस्पताल, एक महिला अस्पताल पर तैनात है। इसी प्रकार 114 अन्य स्वास्थ्य कर्मी तैनात है। जिसमें 65 वार्ड ब्वाय, 10 फार्मासिस्ट है। वहीं करीब 78 आउट सोर्सिंग कर्मचारी है।
वहीं महिला अस्पताल में भी 34 के सापेक्ष 14 चिकित्सक ही कार्यरत है। इनमें 3 महिला सर्जन (DGO) हैं। वहीं 61 नर्स के सापेक्ष 28 ही कार्यरत है। वहीं देहात क्षेत्र की सीएचसी व पीएचसी पर 70 चिकित्सक तैना है। जबकि 150 पद खाली है। हैरानी की बात यह है कि किसी भी सीएचसी व पीएचसी पर बाल रोग विशेषज्ञ तैनात नहीं है।

सीएमओ डा.संजीव मांगलिक का कहना है कि तीसरी लहर से निपटने के लिए सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त है। चिकित्सकों की कमी सहारनपुर ही नहीं पूरे प्रदेश में है। जिसके लिए शासन को कई बार लिखकर दिया हुआ है। बच्चों के संक्रमित होने की आशंका के साथ ही अन्य चिकित्सकों और स्टाफ को ट्रेनिंग दी गई है। आपातकाल स्थिति में यहीं कार्य करेंगे।

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