पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

परिवार नियोजन में महिलाएं ज्यादा जागरूक:सहारनपुर में 22 से 28 नवंबर तक चलेगा नसबंदी पखवाड़ा, पुरुषों की नसबंदी पर जोर

सहारनपुर6 महीने पहले
  • कॉपी लिंक

सहारनपुर में परिवार नियोजन के प्रति लोगों में जागरुकता तो बढ़ी है, लेकिन पुरुषों में इसकी भागीदारी कम ही है। इस कारण जनसंख्या में वृद्धि का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है। यदि परिवार नियोजन की बात करें तो 2020-21 में 1763 महिलाओं और 26 पुरुषों ने नसबंदी कराई है। जो गत वर्षों से काफी कम है। प्रजनन स्वास्थ्य में सुधार के लिए स्वास्थ्य विभाग पुरुष नसबंदी पखवाड़ा 22 नवंबर से 4 दिसबंर तक चलाएगा। आंकड़ों पर नजर डालें तो परिवार नियोजन के प्रति महिलाओं में जागरूकता अधिक है।

सीएमओ डॉ. संजीव मांगलिक ने चिकित्सा अधिकारियों काे जारी किया निर्देश।
सीएमओ डॉ. संजीव मांगलिक ने चिकित्सा अधिकारियों काे जारी किया निर्देश।

नसबंदी कराने के मिलेंगे 3 हजार
CMO डॉ.संजीव मांगलिक ने परिवार नियोजन पखवाड़ा के तहत जिले के समस्त PHC, CHC के चिकित्सा प्रभारियों को निर्देश दिए है। सीएमओ ने कहा कि वह अपने स्तर से पुरुषों को नसबंदी के लिए प्रेरित कराएं। पखवाडा में पहले 22 से 28 नवंबर तक दंपति संपर्क सप्ताह और द्वितीय सप्ताह में 29 नवंबर से 04 दिसंबर तक सेवा प्रदायगी सप्ताह का आयोजन किया जाएगा। पुरुष नसबंदी के लाभार्थी को 3000 और महिला नसबंदी की लाभार्थी को 2000 रुपए की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। जबकि पुरुषों को नसबंदी के लिए प्रेरित करने वाली आशा, ANM और अन्य विभाग द्वारा 400 रुपए की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।

कम हुआ पुरुष नसबंदी का आंकड़ा
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, 2016-17 में 2899 महिलाओं ने नसबंदी कराई, जबकि मात्र 40 पुरुषों ने ही नसबंदी कराई। इसी प्रकार 2017-18 में 2659 महिलाओं और 40 पुरुषों ने नसबंदी कराई। 2019-20 में 2397 महिलाओं और 84 पुरुषों ने नसबंदी कराई। वहीं 2020-21 में 1763 महिलाओं जबकि मात्र 26 पुरुषों ने ही नसबंदी कराई।

नसबंदी से नहीं आती कमजोरी
CMO का कहना है कि नसबंदी को लेकर समाज में अलग-अलग भ्रांतियां है। जिसमें नसबंदी कराने के बाद कमजोरी आने की बात सामने आती है। लेकिन, नसबंदी कराने से किसी प्रकार की कमजोरी नहीं आती है। हालांकि, समाज में इन भ्रांतियों को मिटाने का प्रयास किया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में समय-समय पर जागरूकता अभियान चलाया जाता है। CMO का कहना है कि अधिकांश ऐसे परिवार हैं, जो मेहनत-मजदूरी करते हैं। इन परिवारों के मुखिया मेहनत करने के बहाने नसबंदी कराने से बचते हैं।

खबरें और भी हैं...