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सहारनपुर...भाजपा के गढ़ में गोल दागने की कोशिश:जयंत बोले;आगामी चुनाव में सपा से गठबंधन करने पर बात चल रही है, जल्द ही शुभ संकेत मिलेंगे

सहारनपुरएक महीने पहले
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मंच से बोलते रालोद के राष्ट्री - Money Bhaskar
मंच से बोलते रालोद के राष्ट्री

सहारनपुर के गंगोह में पहुंच रालोद के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी ने CM योगी आदित्यनाथ व भाजपा पर जमकर कटाक्ष किया। उन्होंने जन आशीर्वाद यात्रा के बहाने भाजपा के गढ़ में गोल दागने की कोशिश की। रैली में लोगों की भीड़ देखकर वह गदगद हो गए। अपने भाषणों में जनता से सीधा संवाद कर अपनी ओर आकृषित किया। मुजफ्फरनगर दंगे में जाट और मुस्लिम के बीच की खाई को पाटने का काम किया। उन्होंने अपने भाषणों में साफ कर दिया कि यूपी से भाजपा को हटाने के लिए सपा से गठबंधन करेंगे।

गंगोह में भाजपा के MP और MLA
गंगोह विधासभा सीट में कुल 3,77,650 मतदाता है। कुल मतदाताओं में पुरुषों की संख्या 2,01,096 और महिलाओं की संख्या 1,76,537 है, जबकि अन्य मतदाता कुल 17 है। गंगोह विधानसभा सीट को पहले नकुड़ विस सीट कहा जाता था। 2009 में परिसीमन के बाद गंगोह विस सीट अस्तित्व में आई थी और इसे कैराना लोकसभा में जोड़ दिया गया था। गंगोह को कभी सहारनपुर की सियासत की राजधानी कहा जाता था। 2007 के चुनाव में बसपा के महीपाल माजरा यहां से चुनाव जीते थे। 2012 में कांग्रेस के प्रदीप चौधरी ने जीत हासिल की थी। 2017 विधानसभा चुनाव से पूर्व प्रदीप चौधरी भाजपा में शामिल हुए और एक बार फिर जीत का परचम लहराया था। 2019 में लोकसभा चुनाव जीतकर प्रदीप चौधरी ने विधानसभा सीट से इस्तीफा दे दिया था। उपचुनाव में भाजपा के कीरत सिंह ने कांग्रेस के नोमान मसूद को हराकर इस सीट पर पार्टी का कब्जा बरकरार रखा था।

काजी रशीद और चौ.यशपाल की विरासत को बढ़ाने की कवायद
उत्तर प्रदेश में गंगोह विधानसभा 07 नंबर सीट पर आती है। गंगोह पूर्व मंत्री और दिग्गज नेता चौ.यशपाल सिंह तथा पूर्व केंद्रीय मंत्री और उप राष्ट्रपति का चुनाव लड़े मरहूम काजी रशीद मसूद ने अपने सियासी सफर की शुरुआत गंगोह से ही की थी। यहां से निकलने वाली राजनीतिक बयार पश्चिमी उत्तर प्रदेश हलचल पैदा करती थी। यहीं कारण है कि दोनों ने हमेशा आमने सामने रहे। ये अलग बात है कि अपने अंतिम समय में एक ही पार्टी में दिखाई दिए, हालांकि मरते दम तक कभी एक मंच साझा नहीं किया। चौ.यशपाल सिंह की विरासत को आगे बढ़ाने के लिए उनके बेटे चौ.रुद्रसैन और चौ.इंद्रसेन पूरा जोर लगा रहे हैं। वहीं काजी रशीद मसूद की विरासत को आगे बढ़ाने के लिए उनके दोनों भतीजे काजी इमरान मसूद और काजी नोमान मसूद कमान संभाले हुए है। हालांकि यह दोनों भाई अपनी आपसी मनमुटाव के कारण इमरान कांग्रेस और नोमान रालोद में शामिल है। गंगोह सीट से नोमान अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं।

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