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धर्मगुरुओं का भारत को एकजुट करने का संकल्प:जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने नई दिल्ली सहित देश के विभिन्न हिस्सों में किया कार्यक्रम

सहारनपुर2 महीने पहले
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नई दिल्ली में आयोजित सद्भावना संसद में शामिल सभी धर्में के धर्म गुरु। - Money Bhaskar
नई दिल्ली में आयोजित सद्भावना संसद में शामिल सभी धर्में के धर्म गुरु।

नई दिल्ली में आयोजित सद्भावना संसद में एकता और आपसी भाईचारे का मनमोहक दृष्य देखने में आया। जाने-माने हिंदू धर्मगुरु बाबा सिद्धजी महाराज, सर्व संचालक गौशाला नोएडा ने कहा कि भारत का समाज हिंदू और मुसलमान, दोनों की व्यवस्थाओं के मेलजोल से बना है, जो व्यक्ति चाहे वह किसी मंदिर का पुजारी हो या किसी मस्जिद का इमाम, अगर वह समाज को तोड़ने की शिक्षा देता है, तो वह असामाजिक तत्व है। ऐसे लोगों का हुक्का-पानी बंद कर देना चाहिए। उन्होंने संदेश दिया कि सभी भारतीयों के पूर्वज एक थे और सभी का संबंध इसी देश की मिट्टी से है। इसलिए एक दूसरे को अपनी ताकत मानें और अपने पूर्वजों की आत्माओं को खुश करने के लिए एकता और सद्भाव स्थापित करें।

हर वर्ग के धर्म गुरुओं ने किया प्रतिभाग

धर्म गुरुओं को सुनने पहुंचे लोग
धर्म गुरुओं को सुनने पहुंचे लोग

धार्मिक घृणा और इस्लामोफोबिया को भारत की धरती से समाप्त करने और भारतीयता एवं मानवता की वास्तविक भावना को उजागर करने के लिए जमीयत उलेमा-ए-हिंद के तत्वाधान में उसके दिल्ली स्थित मुख्यालय के मदनी हॉल में 'सद्भावना संसद' का आयोजन किया गया।

यह संसद जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद असद मदनी के संरक्षण में देशभर में आयोजित होने वाली एक हजार सद्भावना संसदों की एक कड़ी है। इसके अलावा बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, पश्चिम बंगाल और तेलंगाना के विभिन्न स्थानों पर भी सद्भावना संसदों का आयोजन किया गया। जिसमें सभी धर्मों ने गुरुओं ने भाग लिया और संयुक्त रूप से राष्ट्रीय एकता और शांति का संदेश दिया।

धर्म के आधार पर नहीं किया भेदभाव
जमीयत उलेमा-ए-हिंद के महासचिव मौलाना हकीमुद्दीन कासमी ने सद्भावना संसद में कहा,' जमीयत उलेमा-ए-हिंद को यह गौरव प्राप्त है कि उसने राष्ट्रीय एवं समाजी आंदोलन में हमेशा सहयोग और एकजुटता के साथ काम किया है और इस उद्देश्य के लिए धर्म के आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया है। भारत एक बहुत ही खूबसूरत देश है।
इसकी प्रतिष्ठा और महानता इस तथ्य में निहित है कि यहां सभी धर्मों के लोग सदियों से एक साथ रह रहे हैं। उनके घर और आंगन एक-दूसरे से मिले-जुले हैं। इसलिए इस देश में नफरत फैलाने वाले कभी कामियाब नहीं होंगे। जमीयत उलेमा-ए-हिंद की एक ऐतिहासिक घटना का भी उल्लेख किया कि किस तरह एक गैर-मुस्लिम नवीन चंद बल्लभ भाई भाटिया ने गुजरात के कच्छ क्षेत्र में जमीयत के कल्याणकारी कार्यों के लिए अपनी जमीन दान कर दी थी।'

मुझे गर्व है भारत मेरी मातृभूमि
मौलाना आजाद यूनिवर्सिटी जोधपुर के अध्यक्ष पद्मश्री प्रोफेसर अख्तरुल वासे ने कहा, 'मुझे एक भारतीय मुसलमान होने के नाते यह कहना है कि मुझे किसी से सर्टिफिकेट की कोई जरूरत नहीं है। मुझे गर्व है कि भारत मेरी मातृभूमि है और पैतृक भूमि भी, क्योंकि अबुल-बशर (प्रथम मानव) आदम के माध्यम से सत्य का संदेश सबसे पहले इसी भूमि पर आया था। उन्होंने इस अफवाह का जवाब दिया कि मुसलमान इस देश में एक हजार साल से होते हुए भी अल्पसंख्यक हैं, फिर वह आने वाले वर्षों में बहुसंख्यक कैसे हो सकते हैं। जो भ्रम फैलाना चाहते हैं, वह वास्तव में इस देश से प्यार नहीं करते हैं। उन्होंने जमीयत उलेमा-ए-हिंद की प्रशंसा की कि उसने आज के अंधकार भरे दौर में प्यार का दीप प्रज्वलित किया है।'

सच्चे धार्मिक झूठे धार्मिक लोगों को करें बेनकाब
जमीयत उलेमा-ए-हिंद के सचिव मौलाना नियाज अहमद फारूकी ने कहा,'जहां यह सच्चाई है कि धर्म लोगों को जोड़ने और एकजुट करने की शिक्षा देता है, वहीं यह भी कटु सत्य है। आज धर्म को ही आधार बनाकर कुछ लोग नफरत और सांप्रदायिकता पैदा कर रहे हैं। इसलिए यह समय की मांग है कि सच्चे धार्मिक लोग इन तथाकथित झूठे धार्मिक लोगों को बेनकाब करें और अपना कर्तव्य समझ कर उनके खिलाफ संयुक्त आवाज उठाएं। उन्होंने कहा कि जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अमन-शांति और प्रेम के संदेश का ही परिणाम है कि आज मोहन भागवत जी भी मैदान में आए हैं। इसलिए जरूरत है कि स्थानीय स्तर पर धार्मिक लोगों का एक समूह गठित हो जो आपकी समस्याओं का समाधान करें। इसी उद्देश्य के लिए जमीयत सद्भावना मंच का गठन भी किया गया है।

सद्भावना संसद का 10 सूत्रीय संकल्प

  • देश और समाज की सेवा, सुरक्षा एवं विकास कार्यों के लिए सदैव हम सब तत्पर रहेंगे।
  • राजनीति और धर्म के मामले में टकराव की स्थिति से बचेंगे।
  • चाहे हम किसी भी धर्म के अनुयायी या राजनीतिक दल के मतदाता हों लेकिन देश में सद्भावना को मजबूत करने में एकजुट रहेंगे।
  • किसी धर्म एवं धर्मगुरुओं पर किसी भी तरह की अपमानजनक टिप्पणी, गलत बात या ओछे शब्दों का प्रयोग नहीं करेंगे।
  • अगर कहीं पर भी साम्प्रदायिक वातावरण खराब होता है तो फौरन हम सब विशेष रूप से क्षेत्र की साझा कमेटी आपस में मिल-बैठ कर मामले का समाधान कराने की कोशिश करेंगे।
  • धर्म एवं समुदाय के भेदभाव के बिना गरीब और परेशान लोगों की मदद खुले दिल से करेंगे।
  • अपने-अपने क्षेत्रों में सद्भावना के कार्यक्रम आयोजित करेंगे।
  • जिला और शहरों के चौराहों पर सद्भावना कैंप लगाएंगे।
  • जगह-जगह सद्भावना यात्रा निकालेंगे।
  • मानवता का संदेश देंगे और उसकी भावना लोगों में मजबूत करेंगें।
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