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बेरोजगारी से जूझ खुद को बनाया काबिल:एमएसएमई से प्रशिक्षण लेकर शुरू किया स्टार्टअप, आधी आबादी को दिया रोजगार

ऊँचाहारएक महीने पहले
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रायबरेली के ऊंचाहार में बेरोजगारी का दंश झेल रहे एक युवक ने कानपुर की एक संस्था से प्रशिक्षण लेकर खुद का कारोबार शुरू किया। अब इसी काम से क्षेत्र की आधी आबादी को प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाने में लगे हुए हैं। हर तरफ उनके इस काम की प्रशंसा हो रही है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार पूरे चूर का पुरवा मजरे कंदरावा गांव निवासी श्री राम रोजगार की तलाश में करीब पांच वर्ष पूर्व सूरत शहर गए हुए थे। जहां पर मजदूरी करने के बाद भी परिवार को चलाना दूभर हो रहा था। परिस्थितियों को देखते हुए वे वापस घर लौट आए। जिसके बाद कानपुर की एमएसएमई मंत्रालय द्वारा संचालित प्रशिक्षण शिविर में जाकर छह माह तक वाशिंग पाउडर, साबुन, अगरबत्ती बनाने का प्रशिक्षण लिया। जिसके बाद अपने प्रिय जनों व रिश्तेदारों से कुछ पैसे इकट्ठा करके वाशिंग पाउडर व साबुन बनाने का कार्य घर पर ही शुरू कर दिया। धीरे धीरे व्यवसाय में प्रगति होती चली गई।

अगरबत्ती बनाती महिलाएं
अगरबत्ती बनाती महिलाएं

राष्ट्रीय आजीविका मिशन समूह बनाकर महिलाओं को जोड़ा

जिसके बाद गांव में महिलाओं की राष्ट्रीय आजीविका मिशन के नाम से एक समूह बनाया। शुरु में समूह में करीब एक दर्जन से अधिक महिलाओं को वाशिंग पाउडर व साबुन, अगरबत्ती बनाने का प्रशिक्षण देना शुरू किया। एक माह के प्रशिक्षण के बाद ही समूह की महिलाओं द्वारा वाशिंग पाउडर व साबुन बनाने का कार्य शुरू कर दिया गया। जिसके बाद खुद के बनाए हुए वाशिंग पाउडर व साबुन को बेचने के लिए आधी आबादी ने जिम्मेदारी संभाली और स्वनिर्मित वाशिंग पाउडर, साबुन, अगरबत्ती लेकर क्षेत्र के गांवों में बेचती हैं। साबुन व वासिंग पाउडर की अच्छी गुणवत्ता होने के चलते क्षेत्र में काफी मांग है।

वाशिंग पाउडर बनाती महिलाएं
वाशिंग पाउडर बनाती महिलाएं

महिलाओं समेत आधी आबादी हुई आत्मनिर्भर

इससे होने वाली आमदनी से महिलाएं स्वयं आत्मनिर्भर बन रही है। बचे हुए वाशिंग पाउडर को श्रीराम आसपास के बाजारों समेत लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज महानगरों में भेज देते हैं। आज श्रीराम का परिवार खुशहाली के साथ समाज में सम्मान की जिंदगी जी रहे हैं। अब वे जगतपुर, गदागंज, डलमऊ, लालगंज, समेत सैकड़ों समूहों की महिलाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का कार्य कर रहे हैं। इनसे मिले प्रशिक्षण की बदौलत हजारों महिलाएं आत्मनिर्भर बन खुशहाली की ओर कदम बढ़ा रही है।

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