पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Market Watch
  • SENSEX59037.18-0.72 %
  • NIFTY17617.15-0.79 %
  • GOLD(MCX 10 GM)48458-0.16 %
  • SILVER(MCX 1 KG)646560.47 %
  • Business News
  • Local
  • Uttar pradesh
  • Prayagraj
  • Mother's Right Hand Finger Had Become Invisible As Soon As She Fell, There Is No Idol Of Mother In The Temple, Worship Is Considered To Be The Mother Form Of The Cradle

प्रयागराज की अलोप शंकरी मां:यहां मां के दाहिने हाथ की उंगली गिरते ही हो गई थी अदृश्य, मंदिर में नहीं कोई मूर्ति; पालने की होती है पूजा-अर्चना

प्रयागराज3 महीने पहले
  • कॉपी लिंक

नवरात्रि के हर दिन दैनिक भास्कर आपको शक्तिपीठ और उत्तर प्रदेश के बड़े माता मंदिरों के दर्शन करा रहा है। इसी कड़ी में आज हम आपको प्रयागराज की अदृश्य रूपी माता अलोप शंकरी के दर्शन करा रहे हैं। यहां माता के दर्शन के लिए वैसे तो हर दिन सैकड़ों भक्त आशीर्वाद लेने आते हैं, पर नवरात्रि के दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या हजारों में पहुंच जाती है। श्रद्धालु मंदिर से कुछ दूर संगम में स्नान करने के बाद माता का दर्शन करना नहीं भूलते हैं। ऐसी मान्यता है कि माता सती के दाहिने हाथ की एक उंगली यहां गिरी और अदृश्य यानी अलोप हो गई।

स्कंद पुराण के अनुसार, भगवान ने जब सुदर्शन चक्र से सती के शरीर के टुकड़े किए थे तो दाहिने हाथ की उंगली यहां स्थित एक कुंड में गिरकर अदृश्य हो गई थी। इसी वजह से इस शक्ति पीठ का नाम अलोप शंकरी पड़ा। इस शक्ति पीठ में देवी मां की कोई मूर्ति नहीं है और श्रद्धालु एक पालने की पूजा-अर्चना करते हैं। यहां कुंभ एवं माघ मेले के दौरान भक्तों का तांता लगा रहता है। देश के कोने-कोने से लोग इस अदृश्य रूपी माता के पालने का दर्शन करने आते हैं और मां से मुराद मांगते हैं।

मंदिर की कुछ इस तरह से सजावट की गई है, जो कि भव्य रूप लिए हुए है। यह 51 शक्तिपीठों में से एक है।
मंदिर की कुछ इस तरह से सजावट की गई है, जो कि भव्य रूप लिए हुए है। यह 51 शक्तिपीठों में से एक है।
माता रानी का पालना बड़ा ही निराला है। एक बार दर्शन करने के बाद मन को अपार शांति मिलती है।
माता रानी का पालना बड़ा ही निराला है। एक बार दर्शन करने के बाद मन को अपार शांति मिलती है।

यहां से एक किमी से भी कम है संगम की दूरी
भक्तगण प्रयागराज आते हैं तो माता के दर्शन के पहले गंगा यमुना एवं अदृश्य सरस्वती के संगम पर स्नान करने के बाद माता अलोप शंकरी का दर्शन-पूजन कर आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं। माता के दर्शन करने से पहले यहां से एक किमी से भी कम दूरी पर गंगा नदी अपने वेग के साथ प्रवाहित होती है। श्रद्धालु यहां संगम स्नान के साथ मां अलोप शंकरी के भी दर्शन कर सकते हैं।

पालने के पास आकर अदृश्य मां के दर्शन करने के बाद भक्तों की मुरादें पूरी हो जाती हैं। दूर-दूर से भक्त अपनी मन्नतें लेकर आते हैं।
पालने के पास आकर अदृश्य मां के दर्शन करने के बाद भक्तों की मुरादें पूरी हो जाती हैं। दूर-दूर से भक्त अपनी मन्नतें लेकर आते हैं।

अलोप शंकरी मंदिर की महत्ता

  • मंदिर प्रांगण से लेकर बाहर तक प्रसाद, फूल-माला, शृंगार आदि की दर्जनों दुकानें हैं।
  • इस मंदिर में मुंडन का विशेष महत्व है, यहां बच्चों का मुंडन कराने के बाद भक्तगण मां का दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
  • इस मंदिर प्रांगण में शादी-विवाह भी मां को साक्षी मानकर किए जाते हैं।
  • श्री पंचायती निर्वाणी अखाड़ा के शिवानंदपुरी जी वर्तमान समय में मुख्य पुजारी हैं। यहां की व्यवस्था अखाड़ा की देखरेख में होती है।
  • कोई भक्त प्रयागराज से बाहर का है तो वह अलोप शंकरी मंदिर आने के लिए ट्रेन, बस या हवाई जहाज से आ सकता है।
  • मंदिर से करीब पांच सौ मीटर की दूरी पर प्रयागराज संगम स्टेशन है। लखनऊ या यूपी पश्चिम से आने वाला श्रद्धालु इस स्टेशन पर पहुंचकर कुछ मिनट में यहां पहुंच सकता है।
  • यहां से रोडवेज बस अड्‌डा करीब सात किमी व एयरपोर्ट की दूरी करीब 16 किमी होगी। यहां तक पहुंचने के लिए सिटी बस, टैक्सी आदि आसानी से उपलब्ध होती है।
बारी-बारी से भक्त दर्शन करते हैं और माता से आशीर्वाद लेते हैं। अपनी श्रद्धा के अनुसार चढ़ावा भी चढ़ाते हैं।
बारी-बारी से भक्त दर्शन करते हैं और माता से आशीर्वाद लेते हैं। अपनी श्रद्धा के अनुसार चढ़ावा भी चढ़ाते हैं।
अलोप शंकरी मंदिर में पालने के चारों ओर भक्त लाइन लगाकर दर्शन के लिए खड़े रहते हैं। यह सिलसिला दिनभर चलता रहता है।
अलोप शंकरी मंदिर में पालने के चारों ओर भक्त लाइन लगाकर दर्शन के लिए खड़े रहते हैं। यह सिलसिला दिनभर चलता रहता है।

अलोप शंकरी मंदिर के नाम से बस गया अलोपीबाग

अलोपीबाग वार्ड के 25 साल से लगातार सभासद कमलेश सिंह ने बताया कि प्राचीन काल में इस मंदिर स्थल पर एक कुंड और घना जंगल हुआ करता था। धीरे-धीरे माता की कृपा हुई और लोगों की मन्नतें पूरी होती गईं। सैकड़ों साल पहले लोग यहां आकर बसने लगे अब माता के मंदिर के नाम पर एक पूरी बस्ती बस गई जिसका नाम अलोपीबाग पड़ गया। इस बस्ती में 22 हजार से अधिक लोग रहते हैं।

खबरें और भी हैं...