पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Market Watch
  • SENSEX61757.520.74 %
  • NIFTY18474.550.74 %
  • GOLD(MCX 10 GM)47189-1.48 %
  • SILVER(MCX 1 KG)631020.23 %

महंत की मौत में 7 किरदारों का कनेक्शन:सपा के पूर्व मंत्री इंदु और IPS ओपी पांडेय ने कराई थी नरेंद्र गिरि और आनंद के बीच सुलह, पूर्व गनर अजय सिंह भी शक के घेरे में

प्रयागराजएक महीने पहलेलेखक: भोलानाथ शर्मा
  • कॉपी लिंक

प्रयागराज में अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की रहस्यमय मौत के मामले में शक की सुई 7 अहम किरदारों के बीच घूम रही है। उनमें लेटे हनुमान मंदिर के मुख्य पुजारी आद्या तिवारी, उनके बेटे संदीप तिवारी, पूर्व गनर अजय सिंह और आनंद गिरि हैं। इन सभी से पूछताछ जारी है। इसके अलावा तीन ऐसे किरदार हैं, जिन्होंने महंत नरेंद्र गिरि और उनके शिष्य आनंद गिरि के बीच समझौता कराया था।

आनंद और महंत नरेद्र गिरि के बीच समझौता सपा के पूर्व मंत्री इंदु प्रकाश मिश्रा, भाजपा नेता और एडवोकेट सुशील मिश्रा और आईपीएस अफसर ओम प्रकाश पांडेय ने कराया था। कहा जा रहा है कि ये लोग महंत नरेंद्र गिरि के राजदार हैं, जो उनकी हर बात की जानकारी रखते थे। पुलिस अब इनसे भी पूछताछ करने की प्लानिंग कर रही है।

आइए पहले जानते हैं उन 7किरदारों की कहानी-

आनंद गिरि: पेट्रोल पंप नहीं बना तो बढ़ा विवाद

आनंद गिरि को पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है। महंत नरेंद्र गिरि के सुसाइड नोट में उनका जिक्र था। उन पर FIR भी दर्ज है।
आनंद गिरि को पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है। महंत नरेंद्र गिरि के सुसाइड नोट में उनका जिक्र था। उन पर FIR भी दर्ज है।
  • आनंद गिरि महंत नरेंद्र गिरि का शिष्य और सबसे करीबी था। मई माह के मध्य में महंत नरेंद्र गिरि और आनंद के बीच संपत्ति को लेकर टकराव शुरू हुआ, जो समझौते के बाद समाप्त हुआ। महंत नरेंद्र गिरि और उनके शिष्य आनंद गिरि के बीच पिछले दिनों एक पेट्रोल पंप को लेकर विवाद समाने आया। तब उन्होंने पेट्रोल पंप की जमीन की लीज निरस्त करा दी। इसके बाद आनंद गिरि ने इसके पीछे मठ की जमीन भू-माफियों के माध्यम से बेचने का आरोप लगाया था।
  • इसके बाद आनंद ने मठ से जुड़े कई मामलों के साथ उनकी निजी जिंदगी से जुड़े मामलों को सोशल मीडिया पर वायरल करना शुरू कर दिया। साथ ही मठ की प्रॉपर्टी और महंत की भूमिका की जांच के लिए अधिकारियों को पत्र तक लिखना शुरू कर दिए। महंत की मौत हुई तो आनंद देहरादून में थे। सूत्रों का कहना है आनंद गिरि की मठ में मौजूद 6 नंबरों पर लगातार बात होती रहती थी।
  • आनंद गिरि का भी दावा है कि मठ की जमीन हड़पने और वर्चस्व को लेकर हत्या की गई। उन्होंने कहा, 'वह (महंत नरेंद्र गिरि) आत्महत्या नहीं कर सकते उनकी हत्या की गई है। मठ की संपत्ति को बेचकर लोगों ने बड़ी-बड़ी हवेलियां बनाई हैं। डॉक्टर समेत कई उद्योगपतियों से महंत नरेंद्र गिरि ने कर्ज ले रखा था। मई के बाद मेरी गुरुजी की मुलाकात नहीं हुई। आखिरी वक्त लखनऊ में मिले थे गुरुजी'।

आद्या तिवारी और उसका बेटा संदीप: इनका लेटे हनुमान मंदिर में चढ़ावे को लेकर था विवाद

लेटे हनुमान मंदिर के मुख्य पुजारी आद्या तिवारी- (बाएं से पहले)
लेटे हनुमान मंदिर के मुख्य पुजारी आद्या तिवारी- (बाएं से पहले)
  • लेटे हनुमान मंदिर के मुख्य पुजारी आद्या तिवारी और उसके बेटे संदीप का भी महंत नरेंद्र गिरि के सुसाइड नोट में जिक्र है। इनके बीच हमेशा वर्चस्व को लेकर विवाद रहता था।
  • सेवादार बबलू का कहना है कि पिछले दिनों चढ़ावे के पैसे में घालमेल को लेकर भी दोनों में विवाद हुआ था, जिसके बाद मंदिर में तनाव बढ़ गया था। वहीं, संदीप मुख्य आरोपी आनंद गिरि का करीबी और राजदार था।
लेटे हनुमान मंदिर के पुजारी आद्या तिवारी के बेटे संदीप तिवारी।
लेटे हनुमान मंदिर के पुजारी आद्या तिवारी के बेटे संदीप तिवारी।

गनर अजय सिंह: नूतन ठाकुर की चिट्‌ठी से उछला था नाम

गनर अजय सिंह काफी रसूखदार माना जाता है।
गनर अजय सिंह काफी रसूखदार माना जाता है।
  • महंत स्वामी नरेंद्र गिरि के गनर रहे सिपाही अजय सिंह का नाम दो माह पहले जुलाई में एक्टिविस्ट डॉ. नूतन ठाकुर की एक चिट्‌ठी से सामने आया था। ये चिट्‌ठी डीजीपी के नाम थी। नूतन ठाकुर की चिट्‌ठी के अनुसार, मूलतः बलिया निवासी अजय कुमार सिंह ने पत्नी के नाम प्रयागराज में 5 अक्टूबर 2019 को 39 लाख 22 हजार और 10 अप्रैल 2014 को रुपए 22 लाख रुपए मूल्य के दो फ्लैट खरीदे। इसके अलावा इनके पास गांव में आलीशान मकान है।
  • अजय सिंह प्रयागराज में तैनात है। उसके पास करोडों की संपत्ति है। उसके पास फार्च्यूनर कार 4.2 (वाहन संख्या UP70 CE 3440), आल्टो कार और एक नई बुलेट मोटरसाइकिल है। प्रयागराज के नारीबारी में करोड़ों की जमीन तथा फ्लैट में 25 लाख रुपए का काम करवाने के आरोप हैं। आरोप है कि यह संपत्ति उसने महंत नरेंद्र गिरि के साथ रहते हुए बनाई थी।

ये तीन किरदार भी बड़े अहम हैं

इंदु प्रकाश मिश्रा: सपा सरकार ने इंदु प्रकाश मिश्र को राज्यमंत्री का दर्जा दिया था। इनकी गिनती रसूखदार नेताओं में होती है। सुशील मिश्रा पहले बसपा में थे। बाद में सपा ने उन्हें राज्यमंत्री का दर्जा दिया था, लेकिन 2016 में वे भाजपा में शामिल हो गए थे।
सुशील मिश्र: स्थानीय भाजपा नेता होने के साथ ही सुशील वकील हैं। साथ ही महंत नरेंद्र गिरि से भी गहरा रिश्ता था। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सुशील का कहना है कि नरेंद्र गिरि के कहने पर ही उन्होंने 26 मई को लखनऊ में आनंद गिरि के साथ समझौता कराया था। आनंद और नरेंद्र गिरि ने बंद कमरे में बात की थी। अंदर क्या हुआ उन्हें नहीं मालूम है।

ओपी पांडेय: ये 2012 के पीपीएस अफसर हैं। वर्तमान में मुरादाबाद 23 बटालियन पीएसी के डिप्टी कमांडेंट के पद पर तैनाती है। हालांकि, इन दिनों ये लखनऊ मुख्यालय से अटैच हैं। आईजी पीएसी अमित चंद्रा का कहना है कि ओपी पांडेय की 16 अगस्त को लखनऊ में हाउस गार्ड ड्यूटी लगाई गई थी। यह ड्यूटी एक माह के लिए होती है। लेकिन उनके अनुरोध पर एक महीने के लिए उनकी ड्यूटी बढ़ा दी गई थी।

समझौते में इन तीनों की भूमिका क्या थी?

  • तीनों ने मिलकर आनंद गिरि व महंत नरेंद्र गिरि के बीच समझौता कराया था। समझौते के तहत जो मसौदा तय हुआ था उसमें यह था कि महंत नरेंद्र गिरि से आनंद गिरि माफी मांगेंगे और माफी मांगने के बाद उनकी मठ बाघंबरी गद्दी और अखाड़ा परिषद में वापसी हो जाएगी। हालांकि, मसौदे के तहत जो बिंदु तय थे उन पर बाद में महंत नरेंद्र गिरि कायम नहीं रहे और आनंद गिरि की अखाड़े में वापसी नहीं हो पाई।
  • माना जा रहा है कि आनंद गिरि अखाड़े में वापसी ना होने के कारण नाराज चल रहे थे और इसको लेकर मीडिया व सोशल प्लेटफॉर्म पर उन्होंने कई बार अपनी बात भी रखी थी। अखाड़ा परिषद अध्यक्ष नरेंद्र गिरि के ऊपर कई सवाल भी खड़े किए थे। नरेंद्र गिरि के ऊपर जो उन्होंने आरोप लगाया था उसमें प्रमुख आरोप थे- महंगे शौक रखना व चारित्रिक दोष का होना। पुलिस इन तीनों लोगों से पूछताछ करेगी।
खबरें और भी हैं...