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इलाहाबाद हाईकोर्ट की बड़ी खबरें:50 फीसदी स्टाफ से काम लेने का निर्देश; परिसर में पान, तंबाकू, गुटखा, शराब पर भी प्रतिबंध

प्रयागराज4 महीने पहले
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इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल ने बढ़ते कोविड-19 संक्रमण को देखते हुए निर्देश दिया कि हाईकोर्ट में 50 फीसदी कर्मचारियों से ही काम लिया जाए। इस बारे में सभी अनुभाग अधिकारियों/सुपरवाइजिंग अधिकारियों को निर्देश दिया गया है। इस व्यवस्था में एक दिन के गैप पर 50 फीसदी स्टाफ से इस तरह कार्य लें कि किसी सीट का काम न रुकने पाए।

निबंधक न्यायिक द्वारा जारी अधिसूचना में कहा गया है कि जिस किसी अधिकारी को बुखार हो तुरंत कोविड जांच कराए। हाईकोर्ट इलाहाबाद और लखनऊ पीठ परिसर में पान, गुटखा, तंबाकू आदि खाकर आने को प्रतिबंधित कर दिया गया है। साथ ही गंभीर बीमारी से पीड़ित अधिकारियों को इसकी सूचना न्यायालय प्रशासन को देने को कहा गया है। ताकि ऐसे लोगों को ड्यूटी पर तैनाती से छूट दी जा सके। कहा गया है कि यह सूचना लखनऊ पीठ के सीनियर रजिस्ट्रार और इलाहाबाद के रजिस्ट्रार न्यायिक को दी जाए।

जारी निर्देश में कहा गया है कि 50 फीसदी अधिकारियों और स्टाफ से काम लेने में सोशल डिस्टेंसिंग कायम रखी जाए। अनुभाग अधिकारी को यह छूट दी गई है कि बहुत जरूरी होने पर घर पर बैठे स्टाफ को काम के लिए बुला सकते हैं। कहा गया है कि सभी स्टाफ टेलीफोन या इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के जरिए अपने अनुभाग से संपर्क बनाए रखें। इन निर्देशों का कड़ाई से पालन करने का निर्देश दिया गया है।

मुख्य न्यायाधीश ने यह आदेश प्रदेश के मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्र के 10 जनवरी, 2022 के अनुरोध पत्र पर दिया है। इसमें कोरोना संक्रमण की चेन ब्रेक करने के लिए 50 फीसदी स्टाफ से काम लेने का अनुरोध किया गया है।

# अधीनस्थ अदालतों की 17 जनवरी से नई गाइडलाइंस जारी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश में बढ़ते कोविड-19 संक्रमण को देखते हुए अधीनस्थ अदालतों और अधिकरणों की कार्यवाही की नई गाइडलाइंस जारी की है। महानिबंधक आशीष गर्ग द्वारा सभी जिला जजों, पीठासीन अधिकारियों को जारी आदेश में एक समय में 50 फीसदी न्यायिक अधिकारियों से कार्य लेने का निर्देश दिया है। यह रोटेशन में जारी रहेगा। कहा है कि गर्भवती न्यायिक अधिकारियों, स्टाफ को इससे छूट रहेगी। बहुत जरूरी हो तो उन्हें घर से कार्य करने की अनुमति दी जाए।

यह भी कहा गया है कि वादकारियों या प्रतिनिधियों का न्यायालय परिसर में प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा। अति आवश्यक मामलों में जिला जज की पूर्व अनुमति से उन्हें परिसर में प्रवेश की अनुमति दी जा सकती है।यह गाइडलाइंस 17 जनवरी से प्रभावी होगी। इस गाइडलाइंस का कड़ाई से पालन करने तथा अपने स्तर पर सभी न्यायिक अधिकारियों को इसकी जानकारी देने की निर्देश दिया गया है।

# जस्टिस वाईके श्रीवास्तव को पितृ शोक

इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश डॉ. वाईके श्रीवास्तव के पिता राजेंद्र कुमार श्रीवास्तव का रविवार को आकस्मिक निधन हो गया। वह इलाहाबाद हाईकोर्ट के सीनियर एडवोकेट थे।

वकालत के अलावा वह शहर के विभिन्न सामाजिक संगठनों से जुड़े थे। वह ईश्वर शरण डिग्री कॉलेज, इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से संबद्ध कॉलेज के अध्यक्ष भी थे। रूल ऑफ ला सोसायटी इलाहाबाद इकाई के संस्थापक और अध्यक्ष भी रहे।

हाईकोर्ट जज के पिता के निधन की खबर मिलने पर उनके आवास पर यूपी सरकार में कैबिनेट मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह, जस्टिस एसपी केसरवानी, जस्टिस वीसी दीक्षित, जस्टिस दीपक वर्मा, जस्टिस कृष्ण पहल, जस्टिस विक्रम डी चौहान अंतिम दर्शनों के लिए पहुंचे। इनके अलावा हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राधाकान्त ओझा, बार के सचिव, एसडी सिंह जादौन, मुख्य स्थाई अधिवक्ता जे एन मौर्य, अपर मुख्य स्थाई अधिवक्ता रामानन्द पाण्डेय, सीनियर एडवोकेट विजय गौतम, आलोक यादव, पंकज सक्सेना, समेत इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कई शिक्षक और बड़ी संख्या में कर्मचारी अंतिम दर्शनों के लिए शामिल हुए। जस्टिस वाईके श्रीवास्तव ने अपने पिता को रसूलाबाद घाट पर मुखाग्नि दी।

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