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इलाहाबाद हाईकोर्ट की 5 बड़ी खबरें:बीएसए को टीचर का वेतन रोकने का अधिकार नहीं, बीएलओ ड्यूटी न करने वाले सहायक अध्यापक को वेतन सहित सेवा में बहाल करने का आदेश

प्रयागराजएक महीने पहले
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि सहायक अध्यापक का वेतन रोकने का बेसिक शिक्षा अधिकारी को अधिकार नहीं है। कोर्ट ने बीएलओ ड्यूटी न करने वाले सहायक अध्यापक का वेतन रोकने का बीएसए फिरोजाबाद का आदेश रद्द कर उसे वेतन सहित सेवा में बहाल करने का आदेश दिया है। सहायक अध्यापक कैलाश बाबू की याचिका पर यह आदेश न्यायमूर्ति पंकज भाटिया ने दिया।

बीएसए फिरोजाबाद ने सहायक अध्यापक का वेतन रोकने का दिया था आदेश

याची के अधिवक्ता का कहना था कि बीएसए ने याची की बूथ लेवल ऑफिसर के कार्य हेतु ड्यूटी लगाई थी। ड्यूटी न करने पर 7 अगस्त 2021 को बीएसए फिरोजाबाद ने उसका वेतन रोकने का आदेश जारी कर दिया। अधिवक्ता की दलील थी कि बेसिक शिक्षा अधिकारी को सहायक अध्यापक का वेतन रोकने का अधिकार नहीं है। जहां तक बीएलओ ड्यूटी का प्रश्न है, तो इलाहाबाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने सुनीता शर्मा व अन्य के केस में स्पष्ट किया है कि शिक्षकों से शिक्षणेत्तर कार्य नहीं लिए जा सकते हैं। कोर्ट ने उपरोक्त दलील के परिपेक्ष में बेसिक शिक्षा अधिकारी का 7 अगस्त 21 का आदेश रद्द कर दिया है और उसको वेतन सहित बहाल करने का निर्देश दिया।

पति-पत्नी का एक ही जिले में तबादला करने पर हो विचार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि पति व पत्नी को एक ही जिले में नियुक्ति देने के मामले में अंतर्जनपदीय स्थानांतरण के परिपेक्ष में बेसिक शिक्षा परिषद विचार करे। कोर्ट ने सहायक अध्यापक राधाकांत त्रिपाठी की याचिका उक्त निर्देश के साथ निस्तारित कर दी है। याचिका पर न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव ने सुनवाई की।

याची के अधिवक्ता का कहना था कि याची की नियुक्ति सीतापुर जिले में है, जबकि उसकी पत्नी प्रयागराज में सहायक अध्यापिका है। याची ने अंतर्जनपदीय तबादले के लिए आवेदन किया था। मगर उसका आवेदन मात्र इस आधार पर निरस्त कर दिया गया कि उसने सहायक अध्यापक के रूप में 5 वर्ष की अनिवार्य सेवा पूरी नहीं की है।

अधिवक्ता का कहना था कि 2008 की नियमावली के नियम 8(2)( डी) के अनुसार अंतर्जनपदीय स्थानांतरण के लिए 1 जिले में 5 वर्ष की सेवा अनिवार्य है। मगर इस नियम में कुछ अपवाद भी हैं। पति व पत्नी को एक ही जिले में नियुक्ति देना इसी अपवाद के तहत आता है। कोर्ट ने प्रकरण को विचारणीय मानते हुए बेसिक शिक्षा परिषद को निर्देश दिया है कि वह इस संबंध में हाईकोर्ट द्वारा पारित आदेश व नियमों के तहत याची के अंतर्जनपदीय स्थानांतरण पर विचार करें।

एफआईआर रद्द कराने पूर्व राज्यपाल अजीज कुरैशी पहुंचे हाईकोर्ट

उत्तर प्रदेश के पूर्व राज्यपाल अजीज कुरैशी अपने विरुद्ध दर्ज एफआईआर को रद्द कराने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। उनके खिलाफ जिला रामपुर में सीएम योगी आदित्यनाथ और भाजपा सरकार के खिलाफ अभद्र टिप्पणी करने को लेकर राजद्रोह के साथ अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया गया है।

योगी आदित्यनाथ को लेकर की थी टिप्पणी

पूर्व राज्यपाल अजीज कुरैशी ने हुए कहा था कि योगी सरकार और आजम खान का प्रकरण जालिम और इंसाफ की लड़ाई है। इसके खिलाफ रामपुर की जनता को सड़कों पर आ जाना चाहिए। कुछ दिन पहले ही वह सांसद आजम खान की पत्नी विधायक डॉ. तजीन फातिमा से मिलने उनके आवास पहुंचे थे। वहीं उन्होंने मीडिया में योगी आदित्यनाथ को लेकर टिप्पणी की थी। भाजपा नेता आकाश सक्सेना ने अजीज कुरैशी के विरुद्ध रामपुर के थाना सिविल लाइंस में मुकदमा दर्ज कराया है।

एसडीएम शाहगंज के खिलाफ विभागीय जांच का डीएम को निर्देश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जिलाधिकारी जौनपुर को एसडीएम शाहगंज के खिलाफ जांच कर विभागीय कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने एसडीएम के एकपक्षीय आदेश 13 व 14 जून 2021 को मनमाना व अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति अजय भनोट ने नर्गिस बानो व अन्य की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है।

याची का कहना था कि उसने नक्शा पास कराकर भवन निर्माण शुरू किया। रंजिश वश कमलेश कुमार ने शिकायत की, जबकि विवादित जमीन से उनका कोई सरोकार नहीं है। एसडीएम ने याची को नोटिस जारी कर हाजिर होने का निर्देश दिया, लेकिन वह हाजिर नहीं हो सकी। इसके बावजूद एसडीएम ने यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया। आदेश में ओवर राइटिंग है और विरोधाभास भी है। एसडीएम ने लिखा कि याची कमलेश कुमार व अन्य बनाम मोहम्मद अमीन व अन्य केस के लंबित होने के तथ्य बताने में विफल रही। तथ्य छिपाकर नक्शा पास करा लिया। जबकि याची हाजिर ही नहीं हो सकी। कोर्ट ने कहा कि एसडीएम का आदेश नैसर्गिक न्याय के विपरीत है।

डीएम प्रयागराज को तालाब से अवैध कब्जा हटाने का निर्देश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जिलाधिकारी प्रयागराज को आदेश के पालन का एक और मौका देते हुए चार हफ्ते में सोरांव के नगदिलपुर गांव के तालाब से अतिक्रमण हटाने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि प्रथमदृष्टया जिलाधिकारी संजय कुमार खत्री के खिलाफ अवमानना का केस बनता है। यह आदेश न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया ने ग्राम प्रधान अखिलेश कुमार की अवमानना याचिका को निस्तारित करते हुए दिया है।

याची का कहना था कि हाईकोर्ट ने प्लाट संख्या 287 तालाब से जांच कर अवैध कब्जा हटाने का निर्देश दिया है। जिसकी सूचना जिलाधिकारी को दी गई है। फिर भी आदेश की अवहेलना की जा रही है। याचिका में जिलाधिकारी को अवमानना में दंडित करने की मांग की गई थी।

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