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मुजफ्फरनगर..कानूनी कमान का सियासी तीर है नाहिद की गिरफ्तारी:कैराना विधायक की गिरफ्तारी भुनाना चाहेगी भाजपा, सहानुभूति लेने का प्रयास करेगी सपा

मुजफ्फरनगर6 महीने पहले
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नाहिद हसन। - Money Bhaskar
नाहिद हसन।

2021 में दर्ज गैंगस्टर के मुकदमे में नाहिद की अचानक गिरफ्तारी के सियासी हलको में कई मायने निकाले जा रहे हैं। कैराना के मुख्य सियासी ध्रुव व हसन परिवार के वारिस नाहिद हसन को चुनाव के एन वक्त गिरफ्तार किया गया। नाहिद की गिरफ्तारी को भाजपा अपने पक्ष में भुनाने का प्रयास करे तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। जबकि सपाई भी गिरफ्तारी को मुद्दा बनाकर नाहिद को उसका चुनावी लाभ दिलाने का प्रयास करेंगे।

दो सियासी परिवारों के इर्दगिर्द घूमती है कैराना की राजनीति

कैराना की सियासत दो परिवारों के इद-गिर्द घूमती रही है। क्षेत्र में गुर्जर राजनीति के दो ध्रुव समझे जाने वाले बाबू हुकुम सिंह और चौ. मुनव्वर हसन की सियासी अदावत के किस्से आज भी लोगों की जुबान पर हैं। मुनव्वर हसन के नाम छोटी सी उम्र में देश के चारों सदनों का सदस्य बन जाना रिकार्ड में दर्ज हुआ था। हुकुम सिंह भी क्षेत्र के धुरंदर नेताओं में शुमार होते थे। कई बार दोनों ने एक-दूसरे को सियासी पटखनी दी। लेकिन दोनों की जिंदगी ने वफा नहीं की। मुनव्वर हसन करीब 13 वर्ष पूर्व एक कार एक्सीडेंट में दुनिया से चले गए, जबकि बाबू हुकुम सिंह का देहांत तीन वर्ष पूर्व बीमारी के चलते हुआ। भाजपा ने मौजूदा विधानसभा चुनाव में हुकुम सिंह की सियासी वारिस व उनकी पुत्री मृगांका सिंह तथा सपा ने चौ. मुनव्वर हसन के पुत्र चौ. नाहिद हसन को कैराना से अपना-अपना उम्मीदवार घोषित किया है। इस चुनाव से पहले 2017 में भी दोनों आमने-सामने आ चुके हैं। जिसमें नाहिद हसन ने मृगांका को हराकर कैराना की विधायकी पर कब्जा जमाया था।

भाजपा पश्चिम में कैराना पलायान के मुद्दे को देती रही गर्माहट

पश्चिमी यूपी की सियासत में कैराना अहम मुकाम रखता है। पूर्व सांसद व भाजपा नेता स्व. बाबू हुकुम सिंह ने कई वर्ष पूर्व कैराना में पलायन का मुद्दा उठाकर क्षेत्र की सियासत को गर्मा दिया था। सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी हाल मे किये गए पश्चिमी यूपी के चुनावी दौराे में कैराना पलायन का मुद्दा उछाल सियासत को गर्माने का प्रयास किया। कैराना की सियासत में सपा विधायक नाहिद हसन तथा उनकी माता पूर्व सांसद तबस्सुम बैगम की काफी गहरी पैठ है। नाहिद हसन को 2020 में एक मुकदमे के सिलसिले में एक माह से अधिक जेल में बिताने पड़े थे। फरवरी 2021 में नाहिद हसन तथा उनकी माता तबस्सुम बेगम सहित पुलिस ने 38 अन्य पर गैगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की थी। नाहिद हसन ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन उन्हें जमानत नहीं मिल पाई थी। जिसके बाद गिरफ्तारी न होने पर पुलिस ने नाहिद हसन को भगोड़ा घोषित किया था। कोर्ट से भी उनके गैर जमानती वारंट जारी किये गए थे। अब से पूर्व पुलिस ने नाहिद की गिरफ्तारी के कोई प्रयास नहीं किये थे। जबकि नाहिद हसन के कोर्ट से भी गैर जमानती वारंट जारी हुए थे। नाहिद कई बार सपा के कार्यक्रमों में भी देखे गए। लेकिन उन्हें पुलिस ने छुआ तक नहीं। इसलिए चुनावी बिगुल बजते ही सपा विधायक की गिरफ्तारी कई अनसुलझे सियासी सवाल छोड़ गई।

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