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मुजफ्फरनगर..जाट कॉलेज की करोड़ों की भूमि पर हाईकोर्ट का स्टे:राजस्व विभाग ने शत्रु संपत्ति बता 2 महीने पहले 820 वर्ग मीटर जमीन पर कर लिया था कब्जा

मुजफ्फरनगर2 महीने पहले
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जाट कॉलेज पशुशाला के गेट का फाइल फोटो। - Money Bhaskar
जाट कॉलेज पशुशाला के गेट का फाइल फोटो।

मुजफ्फरनगर के चौ. छोटूराम स्नातकोत्तर महाविद्यालय (जाट कॉलेज) की पशुशाला का एक हिस्सा बनी 820 वर्ग मीटर जमीन पर हाईकोर्ट ने स्टे ओदश दिया है। इसकी कीमत करोड़ों में है। इसको राजस्व विभाग ने शत्रु संपत्ति बताकर 2 महीने पहले कब्जे में ले लिया था। जिस पर कॉलेज प्रबंधन ने जिला प्रशासन के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

करीब 2 महीने पहले एसडीएम सदर दीपक कुमार के साथ राजस्व और नगर पालिका अधिकारियों की टीम सरकुलर रोड पर जाट कॉलेज द्वारा संचालित पशुशाला पर पहुंची थी। यहां की 820 वर्ग मीटर के एक हिस्से को शत्रु संपत्ति बताते हुए एसडीएम सदर खाली कराने के निर्देश पहले ही दे चुके थे। जिसके बाद सितंबर में राजस्व विभाग ने रिकार्ड में भूमि अपने कब्जे में ली थी।

एसडीएम सदर ने लगाया था यह आरोप

एसडीएम सदर ने बताया था कि छोटूराम डिग्री कॉलेज प्रबंधन द्वारा उक्त शत्रु संपत्ति में दर्ज भूमि पर कब्जा करते हुए पशुशाला को आगे बढ़ा लिया गया था। तभी से उक्त भूमि कॉलेज के कब्जे में ही चली आ रही थी। उसका मालिकाना हक कॉलेज के पास या उसकी संस्था के पास नहीं था। जिसके बाद प्रशासन ने उक्त भूमि पर कब्जा ले लिया था।

1959 में हुआ था जाट कालेज डेयरी का शिलान्यास

चौ. छोटूराम स्नातकोत्तर महाविद्यालय द्वारा पशुशाला को अपना बताया जा रहा है। इसकी डेयरी का शिलान्यास 15 दिसंबर, 1959 में आगरा यूनिवर्सिटी के तत्कालीन वाइस चांसलर कर्नल केपी भटनागर ने किया था। शिलान्यास शत्रु संपत्ति से अलग भूमि पर है। हांलाकि यह भूमि राजस्व रिकार्ड में कॉलेज की ही है। केवल आगे की 820 वर्ग मीटर भूमि शत्रु संपत्ति बताई गई है। जिस 820 गज भूमि को कथित तौर से शत्रु संपत्ति बताया गया है। उस पर 22 दुकानों का लोकार्पण 1998 को तत्कालीन संसदीय कार्यमंत्री हुकुम सिंह ने किया था।

कस्टोडियन को पुन: स्वामित्व तय करने का आदेश

जाट कॉलेज के वरिष्ठ अधिवक्ता बिहारी लाल गुप्ता व अमित गुप्ता ने बताया कि 2 मार्च 2010 के कस्टोडियन आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट इलाहाबाद में याचिका दायर की गई थी। जिस पर सुनवाई करते हुए जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा डिवीजन बेंच ने कॉलेज अधिवक्ता अमित गुप्ता के तर्कों को सुना। जिसके बाद स्वामित्व तय करने के लिए मामले को कस्टोडियन को भेजा तथा दोनों पक्षों को मौके पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया।

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