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मुजफ्फरनगर..कहीं बसपा न खोल दे ‘गठबंधन’ की गांठ:सपा-रालोद से जिले में एक भी मुस्लिम को टिकट नहीं, बसपा के चार मुस्लिम बटोर सकते हैं सहानुभूति

मुजफ्फरनगर4 महीने पहले
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सपा-रालोद गठबंधन ने जिले की पांच सीटों (छह में से सपा-रालोद के अभी तक घोषित) में से एक पर भी मुस्लिम को टिकट नहीं दिया है। जबकि बसपा ने चार विधानसभा सीटों पर मुस्लिम प्रत्याशी लड़ाने का एलान कर दिया है। ऐसे में सियासी हलको में इस दुस्संभावना से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि बसपा के ये चारों प्रत्याशी ही कहीं मुस्लिमों की सहानुभूति न बटोर ले जाएं।

जिले में सपा-रालोद गठबंधन कर चुनाव में उतर रहे हैं। सपा ने साईकिल के सिंबल पर अभी तक केवल चरथावल सीट पर पंकज मलिक को प्रत्याशी बनाने की घोषणा की है। हांलाकि बाकी चार सीटों पर घोषित प्रत्याशी ‘नल’ के सिंबल पर चुनाव लड़ेंगे। लेकिन इन प्रत्याशियों में तीन सपा नेता हैं।

इस तरह मीरापुर, पुरकाजी तथा खतौली सीट पर सपा नेता व बुढाना में रालोद नेता नल के निशान पर चुनाव लड़ेंगे। यह सब कवायद वोट सहेजने और किसी भी सूरत में प्रत्याशियों को जिताने के लिए की जा रही है। लेकिन इस सियासी कसरत के बीच सपा-रालोद ने जिले के एक भी रसूखदार मुस्लिम घराने को टिकट के काबिल नहीं समझा। जाहिर है जिले में एक तिहाई से अधिक मत रखने वाले मुस्लिमों के सामने यह सवाल जरूर खड़ा होगा।

रसूखदार आलम, राना परिवार जिले में रह गए मायूस

जिले की मुस्लिम राजनीति में आलम तथा राना परिवार का गहराई से दखल रहा है। परिवार के मुखिया अमीर आलम कई बार के विधायक, मंत्री तथा लोकसभा व राज्यसभा के सदस्य रहे। उनके बेटे नवाजिश आलम 2012 में विधायक बने। गत विधानसभा चुनाव के बाद उन्होंने बेटे तथा पूर्व विधायक नवाजिश आलम के साथ बसपा छोड़ रालोद ज्वाइन कर ली थी। लेकिन पांच साल सक्रिय रहने के बावजूद रालोद ने नवाजिश को जिले की किसी भी सीट पर टिकट देना गवारा नहीं किया।

वहीं बसपा छोड़कर सपा में आए पूर्व सांसद कादिर राणा, उनके छोटे भाई पूर्व विधायक नूरसलीम राना या भतीजे एवं पूर्व विधायक शाहनवाज राणा को ही गठबंधन के दलों ने टिकट के काबिल नहीं समझा। हांलाकि सपा-रालोद में उनकी टिकट की दावेदारी मजबूत रही।

मुस्लिम मतो पर मजबूत दावेदारी करेंगे बसपा प्रत्याशी

बसपा ने जिले की छह में से चार पर मुस्लिम प्रत्याशियों को चुनाव लड़ाने का फैसला किया है। चरथावल विधानसभा सीट से कांग्रेस छोड़कर आए पूर्व सांसद सईदुज्जमां के पुत्र सलमान सईद को उम्मीदवार बनाया गया है। मीरापुर से मौलाना सालिम तो खतौली से माजिद सिद्दीकी को टिकट दिया है।

जबकि बुढाना से बागपत निवासी हाजी मो. अनीस को प्रत्याशी बनाया गया है। यह सभी क्षेत्र के मुस्लिम मतों पर मजबूत दावेदारी कर रहे हैं। इन हालात में बसपा गठबंधन दलों का मुस्लिम प्रत्याशियों को नजर अंदाज करने का पूरा लाभ लेने की कोशिश करेगी। ऐसे में यदि मुस्लिमों की सहानुभूति बसपा की ओर चली गई तो इन दलों के लिए मुश्किल हो जाएगी।

2017 में नकार दिये गए थे जिले के बड़े मुस्लिम घराने

2017 विधानसभा चुनाव में जिले के दो बड़े मुस्लिम घरानों के चार सदस्यों ने गैर सपाई दलों से चुनाव लड़ा था। लेकिन चारों को जिले के मतदाताओं ने नकार दिया था। आलम परिवार के सदस्य नवाजिश आलम ने मीरापुर से बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ा, लेकिन उनसे अधिक मत सपा के लियाकत अली को मिले।

जबकि बसपा से तत्कालीन विधायक नूरसलीम राना ने चरथावल, पूर्व सांसद कादिर राना की पत्नी सईदा बेगम ने बुढाना तथा पूर्व विधायक शाहनवाज राना ने खतौली सीट पर रालोद के टिकट पर चुनाव लड़ा था। लेकिन सभी सीटों पर सपा प्रत्याशियों को अधिक मत मिले।

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