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आज नवरात्रि का आठवां दिन:आदिशक्ति माता विंध्यवासिनी के दरबार में भक्तों की लगी कतार, मां महागौरी की साधना से मिलता है सुख समृद्धि और सुहाग

मिर्जापुर2 महीने पहले
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आदिशक्ति मां दुर्गा का आठवां स्वरूप महागौरी की पूजा नवरात्र के अष्टमी तिथि को किया जाता है। पौराणिक कथानुसार मां महागौरी ने अपने पूर्व जन्म में भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। जिसके कारण इनके शरीर का रंग एकदम काला पड़ गया था।

तब मां की भक्ति से प्रसन्न होकर स्वयं शिवजी ने इनके शरीर को गंगाजी के पवित्र जल से धोया, जिससे इनका वर्ण विद्युत-प्रभा की तरह कान्तिमान और गौर वर्ण का हो गया। उसी कारण वश माता का नाम महागौरी पड़ा। नवरात्र की अष्टमी तिथि को मां महागौरी की पूजा का महात्म्य है।

भक्त के घर में सुख-शांति बनी रहती है
मान्यता है कि भक्ति और श्रद्धा पूर्वक माता की पूजा करने से भक्त के घर में सुख-शांति बनी रहती है। इस दिन माता की पूजा में कन्या पूजन और उनके सम्मान का विधान है। नवरात्र शक्ति आराधना तथा आदिशक्ति मां जगतम्बा की परम कृपा प्राप्त करने का विशिष्ट काल है। अष्टमी को महागौरी की पूजा अर्चना की जाती है निशाकाल में पूजन अर्चन करने से भक्तो को अभीष्ट फल की प्राप्ति होती है।

कष्टों से मुक्ति प्रदान कर सुख-शांति
प्रतिपदा से नवमी तक नौ तिथियों में मां की नौ शक्तियों का वास होता है। पूर्ण श्रद्धा के साथ संयम व नियम पूर्वक ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए पूजन आराधना करने से जगतजननी की नौ शक्तियां जाग्रत होकर नवग्रहों को नियंत्रित कर साधक को कष्टों से मुक्ति प्रदान कर सुख-शांति, ऐश्वर्य आदि की प्राप्ति कराती हैं।

नवरात्रि के आठवें दिन होती है साधना
कंतित निवासी आचार्य पं. रिंकू पाण्डेय ने बताया कि मां दुर्गा की आठवीं शक्ति का नाम महागौरी है। नवरात्र के आठवें दिन महागौरी की पूजा-अर्चना सुख-शांति के लिए की जाती है। सांसारिक ताप का हरण करने वाली मां अपने भक्तों के लिए अन्नपूर्णा स्वरूप हैं। पुरुष मां के महागौरी रूप की पूजा करते हैं, उनका जीवन सुखमय हो जाता है। आठवें दिन माँ विंध्यवासिनी महागौरी के रूप में दर्शन देकर भक्तों के सभी कष्टों का हरण करती हैं।

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