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माता विंध्यवासिनी के दरबार में गूंज रहा जयकारा VIDEO:दूरदराज से आने वाले भक्त माता को नमन कर मांग रहें वरदान

मिर्जापुर2 महीने पहले
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विंध्यवासिनी दरबार में माता के दर्शन को उमड़ी भीड़, दर्शन कर भक्त निहाल

नवरात्रि के पांचवे दिन आदिशक्ति माता विंध्यवासिनी के दरबार में भोर से ही भक्तों की कतार लगी है । भक्त माता रानी के पांचवें स्वरूप स्कंदमाता का दर्शन कर विभोर हैं । निरंतर घंटा की ध्वनि और भक्तों का जयकारा विंध्य धाम में गूंज रहा है । माता के दरबार में हाजिरी लगाकर भक्त कृपा दृष्टि बनाएं रखने की कामना कर रहे हैं। भक्तों की बस एक ही पुकार है कि नमस्ते अस्तु भगवती मातर स्मान पाहि सर्वतः।

धाम से भक्त, व्यवस्था में जुटी पुलिस
धाम से भक्त, व्यवस्था में जुटी पुलिस

सुख, शान्ति की है दाता, स्कंदमाता

नवरात्र की पंचमी तिथि को स्कंदमाता की पूजा की जाती है। इनकी चार भुजाएं हैं, दाहिनी तरफ की ऊपर वाली भुजा में भगवान स्कंद गोद में हैं। दाहिने तरफ की नीची वाली भुजा में कमलपुष्प है। बाएं तरफ की ऊपर वाली भुजा वरमुद्रा तथा नीचे वाली भुजा में भी कमलपुष्प है। स्कंदमाता भक्तों को सुख- शांति प्रदान वाली है। देवासुर संग्राम के सेनापति भगवान स्कंद की माता होने के कारण मां दुर्गा के पांचवे स्वरूप को स्कंदमाता के नाम से जानते हैं। यह शक्ति परम शांति व सुख का अनुभव कराती है।

विंध्याचल मेला क्षेत्र में व्यवस्था का निरीक्षण करती डीएम दिव्या मित्तल, एडीएम शिव प्रताप शुक्ल
विंध्याचल मेला क्षेत्र में व्यवस्था का निरीक्षण करती डीएम दिव्या मित्तल, एडीएम शिव प्रताप शुक्ल

मां की कृपा से मिलती है शान्ति

मां स्कंदमाता की उपासना से मन की सारी कुण्ठा जीवन-कलह और द्वेष भाव समाप्त हो जाता है. मृत्यु लोक में ही स्वर्ग की भांति परम शांति एवं सुख का अनुभव प्राप्त होता है. साधना के पूर्ण होने पर मोक्ष का मार्ग स्वत: ही खुल जाता है।

मेला क्षेत्र में भ्रमण करते पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार मिश्र और अन्य अधिकारी
मेला क्षेत्र में भ्रमण करते पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार मिश्र और अन्य अधिकारी

शक्ति की अधिष्ठात्री देवी हैं स्कन्दमाता

आचार्य रवीश कुमार त्रिपाठी ने बताया कि विन्ध्याचल में विन्ध्य पर्वत व पतित पावनी माँ भागीरथी के संगम तट पर श्रीयंत्र पर विराजमान माँ विंध्यवासिनी का पांचवे दिन "स्कंदमाता" के रूप में पूजन व अर्चन किया जाता है । भगवान स्कन्द की माता होने के कारण पांचवें स्वरूप को स्कंदमाता के नाम से जाना जाता है। कमल के आसन पर विराजमान देवी को पद्मासन देवी भी कहा जाता है। इनका वाहन भी सिंह है। इन्हें कल्याणकारी शक्ति की अधिष्ठात्री कहा जाता है। यह दोनों हाथों में कमलदल लिए हुए और एक हाथ से अपनी गोद में ब्रह्मस्वरूप सनतकुमार को थामे हुए हैं। स्कंद माता की गोद में उन्हीं का सूक्ष्म रूप छह सिर वाली देवी का है। नवरात्र की पंचमी तिथि को साधक का मन विशुद्ध चक्र में होता है जो माँ की कृपा से जागृत होता है ।

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