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मिर्जापुर में जनसुनवाई पोर्टल में मनमर्जी रिपोर्ट लगा रहे जिम्मेदार:गलत आख्या लगाकर भ्रमित कर रहे पटवारी-कानूनगो, तहसीलदार बोले- जांच कराकर कार्रवाई की संस्तुति करेंगे

लालगंज (मिर्जापुर)2 महीने पहले
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मिर्जापुर जिले में लालगंज तहसील क्षेत्र में जनुसनवाई पोर्टल में मनमर्जी रिपोर्ट लगाकर आख्या प्रस्तुत करने का मामला सामने आया है। शिकायतकर्ता की जानकारी के बिना ही जांच अधिकारी ने सेटलमेंट कर दिया। पहले पटवारी-कानूनगो ने शिकायतकर्ता पर सादे पेपर में हस्ताक्षर करने का दबाव बनाया। जब शिकायतकर्ता मे ऐसा करने से मना किया तो सेटलमेंट की रिपोर्ट लगा दी। चकरोड-नाली जोतकर कब्जा करने के मामले में मौके पर निर्माण कार्य नहीं होने की दलील देकर खानापूर्ति कर ली गई।

सरकार जनसुनवाई पोर्टल पर लोगों की शिकायतों का निपटारा कराने को लेकर जोर दे रही है लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। अधिकारियों द्वारा मनमर्जी रिपोर्ट लगाकर आख्या प्रस्तुत कर दी जा रही है। और इसकी सुनवाई करने वाला कोई नहीं है। पोर्टल में खराब फीडबैक देने को बाद भी जांच अफसरों शिकायत कर्ता से बातचीत करना जरूरी नहीं समझा।

पटवारी-कानूनगो ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया

मामला मिर्जापुर जिले के लालगंज तहसील क्षेत्र ड्रमंडगंज थाने के नदौली गांव का है। गांव निवासी चंद्रभूषण शुक्ला ने 16 जुलाई 2022 को समाधान दिवस पर शिकायत दर्ज कराई थी कि गांव नदौली में चक नंबर 818, 819 से सटा हुआ चकरोड है। उसका नंबर 814 और चक नाली का नंबर 813 है। उसे तहसील लालगंज में एडवोकेट केदारनाथ शुक्ला ने जोतकर कब्जा किया है।

कब्जा की शिकायत पर पटवारी-कानूनगो ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया। इस दौरान जांच अधिकारियों ने फर्जी रिपोर्ट लगाकर पल्ला झाड़ लिया। रिपोर्ट लगा दी कि नाली-चकरोड जोता नहीं गया है। इसके बाद शिकायतकर्ता ने मामले की शिकायत 25 अगस्त को जनसुनवाई पोर्टल पर दर्ज कराई। इसका संदर्भ संख्या 40019922020193 है। इसमें नाली-चकरोड जोतने का फोटो साक्ष्य के तौर पर अटैच किया गया।

फर्जी रिपोर्ट तैयार कर जमा कर दिया

साथ ही शिकायतकर्ता ने शिकायत में यह भी अवगत कराया कि मौके का वीडियो भी उसके पास साक्ष्य के तौर पर मौजूद है। शिकायत दर्ज कराई गई थी कि फसल लगाकर चकरोड-नाली कब्जा किया गया है। इसका निपटारा इस तरह कराया गया कि मौके पर कोई निर्माण कार्य नहीं किया गया है। फसल लगी होने के कारण पैमाइश नहीं किया जा सकता। यानि कि शिकायत कब्जे को लेकर की गई और निपटारा निर्माण न होने का किया गया। पटवारी-कानूनगो ने शिकायतकर्ता चंद्रभूषण शुक्ला से सादे पेपर पर हस्ताक्षर करने का दबाव बनाया, लेकिन उन्होंने मना किया तो फर्जी रिपोर्ट तैयार कर जमा कर दिया।

तहसीलदार ने शिकायतकर्ता भी बिना दोनों पक्षों की बात जानें निस्तारण करके आख्या प्रस्तुत कर दी। हैरानी तो यह है कि 2 बार फीडबैक में भी पूरे प्रकरण को अवगत कराया गया जो कि एडीएम राजस्व व जिलाधिकारी को पोर्टल पर मार्क हुआ। इसके बाद भी वही रिपोर्ट सबमिट कर दी गई। अब पोर्टल पर दिखाया जा रहा कि जांच अफसर ने सेटलमेंट करा दिया है। फीडबैक सबमिट नहीं किया जा सकता है।

दो अलग-आलग रिपोर्ट लगाई

तहसील में जनसुनवाई में शिकायत देने पर रिपोर्ट लगाई गई कि चकरोड व नाली खाली है। सीएम पोर्टल पर शिकायत देने के बाद रिपोर्ट लगाई गई कि मौके पर कोई निर्माण व कब्जा नहीं है। जबकि शिकायत चकरोड-नाली जोतने और फसल लगाकर कब्जा करने के संबंध में की गई थी।

इन बिंदुओं पर नहीं की गई जांच

  • चकरोड नाली जोता गया है या नहीं।
  • चकरोड व नाली का कितना हिस्सा जोता गया है।
  • कितने सालों से जोता जा रहा है।

लेखपाल-कानूनगो ने रिपोर्ट में किया गुमराह

शिकायत चकरोड-नाली जोतने की थी, लेकिन संबंधित जगह पर निर्माण कार्य नहीं होने की रिपोर्ट तैयार कर कब्जा नहीं होना दिखा दिया गया। जांच अफसर ने निस्तारण रिपोर्ट लगाने से पहले शिकायतकर्ता से उसका पक्ष जानने की भी कोशिश नहीं की।

रिपोर्ट पर लिखा गया कि शिकायतकर्ता चंद्रभूषण शुक्ला ने हस्ताक्षर नहीं किया। जबकि लेखपाल व कानूनगो द्वारा सादे पेपर पर दस्तखत कराया जा रहा था इसलिए नहीं किया गया। यह जानकारी भी रिपोर्ट में गलत डाली गई है। जांच अधिकारी ने हस्ताक्षर नहीं करने का कारण जानना भी जरूरी नहीं समझा। बिना शिकायत कर्ता के जांच से संतुष्टि हुए रिपोर्ट लगा दी गई कि हस्ताक्षर से इनकार किया है।

तहसीलदार ने कहा- मामले की जांच कराएंगे

मामले में तहसीलदार शशांक शेखर राय बताया कि नदौली ग्राम पंचायत का यह ऑनलाईन जनसुनवाई पोर्टल का मामला हमारे संज्ञान में अभी आया है। मामले की जांच-पड़ताल करके दोषी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए संस्तुति की जाएगी।

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