पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Market Watch
  • SENSEX57260.580.27 %
  • NIFTY17053.950.16 %
  • GOLD(MCX 10 GM)47950-0.42 %
  • SILVER(MCX 1 KG)62854-0.82 %

हरिद्वार से बंद हुई गंगनहर...ग्राउंड रिपोर्ट:3 दिन तक जल स्तर पर नहीं पड़ेगा असर, गंगनहर नहीं रजवाहों की होनी है सफाई

मेरठएक महीने पहले
  • कॉपी लिंक
शनिवार सुबह मेरठ की सीमा में गंगनहर में तेजी से बहता पानी और धुंध छाई हुई। - Money Bhaskar
शनिवार सुबह मेरठ की सीमा में गंगनहर में तेजी से बहता पानी और धुंध छाई हुई।
  • 20 दिन तक हरिद्वार से नहीं छोड़ा जाएगा पानी, NTPC के लिए रोका जाता है

हरिद्वार से निकलने वाली वेस्ट यूपी की सबसे बड़ी नहरों में शामिल गंगनहर 15 अक्टूबर की रात बंद कर दी गई। अगले 20 दिन तक हरिद्वार से इस गंगनहर में पानी नहीं छोड़ा जाएगा। सिंचाई विभाग के अफसरों का कहना है कि हर साल दशहरे से लेकर दिवाली तक हरिद्वार में रेग्युलेटर, फाटक पर सफाई की जाती है। वहीं, इस गंगनहर से निकलने वाले रजवाहे (बंबे) की सफाई की जाती है।

हरिद्वार से निकलर फिरोजाबाद तक जाती है गंगनहर
सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता पंकज जैन के अनुसार, गंगा पर जहां-जहां बैराज हैं, वहां से नहर निकाली गई हैं। नहरों में पानी सप्लाई के लिए ही बैराज पर गंगा में पानी को ऊपर उठाया जाता है। जिसके बाद गंगा का पानी नहर में जा सके। गंगनहर अपर गंगा गंगनहर है, जो पूरे साल चलती है।हरिद्वार से निकलकर यह गंगनहर रुड़की, यूपी के मुजफ्फरनगर, मेरठ, गाजियाबाद की सीमा में मुरादनगर से होकर मसूरी से निकलती है। इसके बाद कुछ सीमा हापुड़ जिले से लगती है। बाद में यही गंगनहर सनौता से होते हुए बुलंदशहर जिला मुख्यालय से 5 किमी दूर होते हुए खुर्जा व अलीगढ़ से होकर फिरोजाबाद तक जाती है।

3 दिन तक पानी पर नहीं पड़ता ज्यादा असर
सिंचाई विभाग के अधिकारियों का कहना है कि गंगनहर में हरिद्वार से पानी रोके जाने के बाद गंगनहर में पानी पर ज्यादा असर नहीं पड़ता। रुड़की, मुजफ्फरनगर, मेरठ व गाजियाबाद तक इस नहर में पानी का बहाव बहुत तेज रहता है। कई स्थानों पर 12 से 15 फीट तक भी पानी चलता है। 15 अक्टूबर की रात को हरिद्वार से पानी रोका गया। अधिकारियों का कहना है की तीन दिन तक पानी के जल स्तर पर ज्यादा असर नहीं पड़ता। 3 दिन बाद बहाव कम होगा व जल स्तर में कमी नहीं आएगी।

में निकलने वाले रजवाहे के पास किसान
में निकलने वाले रजवाहे के पास किसान

गंगनहर के किनारे निर्माण कार्य, मशीन से मिट्टी नहर में डाली जा रही
शनिवार सुबह 8 बजकर 30 मिनट पर मेरठ के सरधना की सीमा में गंगनहर में जल स्तर वही बना हुआ है। पानी का बहाव व जल स्तर देखकर नहीं लगा की हरिद्वार से नहर बंद हुई है। सुबह के समय गंगनहर और आसपास के इलाके में धुंध छाई हुई नजर आई। सरधना के पास के किसान फूल सिंह ने बताया कि सुबह के समय यहां बहुत धंधु रहती है, सर्दियों में दूर तक नहीं दिखाई देता। जब कोहरा पड़ता है सुबह के समय दस या 15 कदम पर नहीं दिखाई देता। नहर बंद होने के कई दिन बाद पानी घटने लगता है।

गंगनहर की नहीं की जाती सफाई
सिंचाई विभाग के अधिकारियों का कहना है कि गंगनहर में सिल्ट नहीं जमती है। पानी का बहाव तेज होने के कारण सिल्ट बह जाती है। यह सिल्ट नहर से निकलने वाले रजवाहों में जमा हो जाती है।

गंगनहर के किनारे निर्माण कार्य, मशीन से मिटटी नहर में डाली जा रही
गंगनहर के किनारे निर्माण कार्य, मशीन से मिटटी नहर में डाली जा रही

सुबह के समय पटरी पर खड़े लोग
हरिद्वार में रेग्युलेटर व फाटक के पास सफाई की जाती है। अंदर से पटरी चेक की जाती हैं। साथ ही रजवाहों के फाटक जांचने के बाद रजवाहों की सफाई की जाती है। गंगनहर से सिंचाई भी नहीं की जाती, सिर्फ रजवाहों व अन्य नहरों की सफाई की जाती है।

पूरी तरह से नहीं सूखता पानी
गंग नहर में पानी रोके जाने के बाद पूरी तरह से पानी नहीं सूखता। अधिकारियों का कहना है कि हरिद्वार में जहां से गंगा से नहर निकली है। वहां नहर की जमीनी सतह गंगा के जल स्तर से नीची है। पूरा पानी रोके जाने के बाद जमीन से पानी नहर में आना शुरू हो जाता है, सामान्य भाषा में इस पानी को चोया कहा जाता है। इसलिए ही तली में पानी चलता रहता है।

सुबह के समय पटरी पर खड़े लोग
सुबह के समय पटरी पर खड़े लोग

NTPC के लिए रोका जाता है पानी
गाजियाबाद के सिंचाई विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मेरठ, गाजियाबाद, नोएडा, दिल्ली में गंग नहर का पानी लोगों को पीने के काम भी आता है। जल निगम पानी अलग अलग क्षेत्रों में पाइप लाइन से सप्लाई पहुंचाता है। मेरठ, गाजियाबाद, नोएडा व दिल्ली में 25 से 30 लाख लोगों तक यह पानी पहुंचता है। एक अधिकारी ने बताया की NTPC में पानी सप्लाई बहुत महत्वपूर्ण है। इसलिए गंग नहर में पानी को रोक लिया जाता है। जरूरत के आधार पर पानी को आगे सप्लाई किया जाता है।

फसलें होंगी प्रभावित
वेस्ट यूपी में फसलों की सिंचाई नहरों पर आश्रित हैं। इस मौसम में गन्ने की फसल को सबसे ज्यादा पानी की जरूरत है। अगर उस समय पर पानी नहीं मिला तो गन्ना सूखने लगेगा।

गन्ने की खड़ी हुई फसल
गन्ने की खड़ी हुई फसल

गन्ने की खड़ी हुई फसल
सब्जियों और फूल की खेती को सप्ताह में एक बार सिंचाई की जरूरत पड़ेगी। 15 अक्टूबर के बाद से आलू की बुवाई शुरू हो जाएगी। खेत की पलेवा करने के लिए भी पानी की जरूरत पड़ेगी। धान की कटाई शुरू हो गई है। खाली खेत की पलेवा न होने पर सरसों व आलू की बुवाई थोड़ा लेट हो जाएगी।

खबरें और भी हैं...