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राज्य महिला आयोग उपाध्यक्ष का विवादित बयान:बोलीं- ज्ञानवापी में जो मिला उसे शिवलिंग न मानने वाले लोग देश छोड़ दें; हर मस्जिद मंदिर तोड़कर बनी

मेरठ4 महीने पहले
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यूपी राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष सुषमा सिंह ने ज्ञानवापी मसले पर विवादित बयान दिया है। उन्होंने कहा, शिवलिंग को झूठ का फव्वारा वही लोग बोल रहे हैं, जिन्हें आस्था में भरोसा नहीं है। ये वही लोग हैं जो खुद को भारतीय नहीं मानते हैं। उन्हें भारत में रहने का अधिकार नहीं है। इन लोगों में शिव के प्रति आस्था नहीं है। ये वो लोग हैं, जो भारत माता की जय नहीं बोलते, वो शिवलिंग को कैसे मानेंगे?

सुषमा सिंह बुधवार को मेरठ सर्किट हाउस में जनसुनवाई के लिए पहुंची थीं। उन्होंने कहा कि भारत में जहां भी मस्जिदें हैं, वहां जब भी खुदाई कराई गई है तो हर जगह शिवलिंग और सांप ही निकले हैं। हर मस्जिद का निर्माण ही मंदिरों को तोड़कर हुआ है। इसका प्रमाण तो इतिहास ने भी दिया है।

सुषमा सिंह ने आगे और क्या-क्या कहा, यह पढ़ने से पहले भास्कर पोल का हिस्सा बन सकते हैं...

आयोग सदस्य ने कहा- उन्हें तो भारत माता जय बोलने में भी समस्या

यह फोटो मेरठ सर्किट हाउस का है। जनसुनवाई करतीं राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष सुषमा सिंह।
यह फोटो मेरठ सर्किट हाउस का है। जनसुनवाई करतीं राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष सुषमा सिंह।

शिवलिंग को न मानने वालों पर आयोग उपाध्यक्ष ने कहा, 'हिंदू धर्म को जो मानता है, जो भारतीय है उसके लिए शिव ही सत्य है। शिव ही व्यापक हैं और शिव से हमारी सृष्टि चलती है। आस्था में जिसका विश्वास है वो इस घटना को और मजबूती से लेते हैं। जिन्हें आस्था में भरोसा नहीं है वो इसे नहीं मानते।

आस्था में विश्वास न करने वाले किसी अन्य जाति के ही हैं, क्योंकि उन्हें तो भारत माता की जय बोलने में भी समस्या है। ऐसे लोग भारत के नागरिक होकर भी भारत माता की जय नहीं बोल रहे। उनको शिवलिंग में आस्था कैसे हो सकती है?

शिवलिंग या फव्वारा- हिंदू और मुस्लिम पक्ष के बीच बहस जारी
वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद में कोर्ट के आदेश पर कोर्ट कमिश्नर ने सर्वे किया था। याचिकाकर्ता रेखा सहित 5 महिलाओं के वकील विष्णु जैन ने वजूखाने में शिवलिंग मिलने का दावा किया। इसके बाद उस जगह को सील कर दिया गया। अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी ने हिंदू पक्ष के दावे का खंडन करते हुए उसे फव्वारा बताया है। मुस्लिम पक्ष ने यह भी कहा है कि वह जिला अदालत के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करेंगे। पूरी खबर क्लिक कर पढ़ें

यह तस्वीर ज्ञानवापी मस्जिद के भीतर बने वजू-खाने की है। हिंदू पक्ष का कहना है कि यह शिवलिंग है। वहीं, मस्जिद पक्ष के लोगों का कहना है कि यह फव्वारा है।
यह तस्वीर ज्ञानवापी मस्जिद के भीतर बने वजू-खाने की है। हिंदू पक्ष का कहना है कि यह शिवलिंग है। वहीं, मस्जिद पक्ष के लोगों का कहना है कि यह फव्वारा है।

आइए अब जानते हैं कि महिला आयोग क्या है और इसमें कितने सदस्य होते हैं..

सुषमा सिंह (बाएं) महिला आयोग की उपाध्यक्ष हैं।
सुषमा सिंह (बाएं) महिला आयोग की उपाध्यक्ष हैं।

राज्य महिला आयोग एक स्वायत्त संस्था है। महिलाओं के उत्पीड़न संबंधी शिकायतों के निस्तारण के लिए इसका गठन 2002 में हुआ था। 2004 में कानूनी अधिकार मिला और राज्य महिला आयोग अधिनियम अस्तित्व में आया। 2007 फिर 2013 में दो बार संशोधन हुए और आयोग का पुनर्गठन किया गया।

राज्य महिला आयोग में एक अध्यक्ष तो दो उपाध्यक्ष होते हैं। इसके अलावा 25 सदस्य होते हैं। हर एक सदस्य को जिले बांटे जाते हैं, जहां वे जाकर सुनवाई करती हैं। वर्तमान में विमला बाथम आयोग की अध्यक्ष हैं। इसका हेड ऑफिस लखनऊ के गोमती नगर के विभूतिखंड में है। मदद की जरूरत होने पर हेल्पलाइन नंबर 112 पर शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। थाने से भी संपर्क किया जा सकता है।

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