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मेरठ पहुंचे मौलाना काजी अनिसुर रहमान कासमी:बोले-वक्फ की जमीन खाली होंगी, तो पब्लिक को फायदा होगा

मेरठ2 महीने पहले
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बिहार सरकार की हज कमेटी के पूर्व चेयरमैन मौलाना काजी अनिसुर रहमान कासमी सोमवार को मदरसों की शिक्षा का स्तर जानने मेरठ पहुंचे। उन्होंने मेरठ में सदर बाजार स्थित मदरसा इमदादुल इस्लाम में पत्रकारों से भी बातचीत की। मदरसों के सर्वे पर बोलते हुए उन्होंने कहा, "सर्वे होना चाहिए, हम समर्थन करते हैं। बिहार में हम 10 साल से मांग उठा रहे हैं कि मदरसों का सर्वे हो। मदरसों में ऐसी तालीम दी जानी चाहिए, जहां से पढ़कर छात्र इंजीनियर, डॉक्टर और अफसर भी बन सकें।

युवा सड़कों पर हुड़दंग न करें
अनिसुर रहमान ने कहा, "मदरसे में अलग-अलग विषय पर रिसर्च की सुविधा होनी चाहिए। रिसर्च होगी, तो देश आगे बढ़ेगा। जितना सर्वे होगा, उतना मदरसे को फायदा होगा। कुछ युवा रात 9 बजे के बाद सड़कों पर घूमते हैं, खाना खाने होटल जाते हैं। युवाओं को अपनी शिक्षा के लिए ध्यान देना होगा। युवा सड़क पर हुड़दंग से बचें।"

"नाजायज कब्जा किए, तो जमीन खाली कराया जाएगा"
मौलाना अनिसुर रहमान कासमी ने कहा, "वक्फ की जमीन खाली होंगी, तो फायदा मिलेगा। सर्वे के साथ चाहते हैं कि किसी भी जमीन, सरकारी जमीन को खाली करने का जो कानून हो, वही कानून वक्फ की जमीन को भी खाली कराने का भी इस्तेमाल में आना चाहिए। वक्फ की जमीन खाली होंगी, तो पब्लिक को भी फायदा होगा। कोई एक शख्स वक्फ की जमीन पर नाजायज कब्जा किए हुए हो, तो ऐसे ही जमीन को खाली कराया जाना चाहिए। जैसे सरकारी जमीन को खाली कराया जाता है।"

मौलाना संस्कृत में बोलने लगे
मदरसे में संस्कृत सुनने में थोड़ा अलग लगता है लेकिन मेरठ के मदरसे में मौलाना संस्कृत के श्लोक सुनाते नजर आए। जहां वह अंग्रेजी भी बोलते हैं। यही नहीं मौलाना अपने नाम के आगे चतुर्वेदी भी लगाते हैं। मेरठ के मौलाना मदरसों में रिसर्च वर्क की भी वकालत करते हैं। मौलाना मशहूद उर रहमान शाहीन जमाली चतुर्वेदी का कहना है कि मेरे पिता भी अपने नाम के आगे चतुर्वेदी लगाते थे और वो भी क्योंकि उन्हें वेदों से मोहब्बत है। यह मदरसा 135 साल पुराना है और मदरसा इमदादुल इस्लाम में बच्चों को संस्कृत के साथ हिंदी, अंग्रेजी, गणित और विज्ञान भी पढ़ाया जाता है।