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शिरडी की तरह ट्रॉली में बंटेगा मां दुर्गा का प्रसाद:मेरठ के सदर दुर्गाबाड़ी में पहली बार बदलेगी प्रसाद वितरण व्यवस्था, 1807 से सज रहे दुर्गापंडाल की कहानी

मेरठ4 महीने पहलेलेखक: शालू अग्रवाल
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26 सितंबर से शारदीय नवरात्रि प्रारंभ हो रहे हैं। मेरठ के सबसे प्राचीन दुर्गा पंडाल में इस साल शिरडी साईंधाम की तरह प्रसाद वितरण किया जाएगा। 215 सालों में पहली बार मेरठ के सदर दुर्गाबाड़ी में सजने वाले दुर्गापंडाल में भक्तों को ट्रॉली से प्रसाद बांटा जाएगा। बंगाली समाज द्वारा 1807 में स्थापित यह दुर्गा पंडाल शहर का सबसे प्राचीन दुर्गा पूजन स्थल है।

आइए दैनिक भास्कर में पढ़िए सदर दुर्गाबाड़ी में इस बार कैसा होगा नवरात्र उत्सव...

1807 में स्थापित हुआ था दुर्गा पंडाल

मेरठ के सदर दुर्गाबाड़ी में 215 सालों से दुर्गा पूजन की परंपरा चली आ रही है।
मेरठ के सदर दुर्गाबाड़ी में 215 सालों से दुर्गा पूजन की परंपरा चली आ रही है।

दुर्गा पूजो समिति के कार्यकारिणी सदस्य अजय मुखर्जी ने बताया कि यहां 26 सितंबर को घट स्थापना होगी। कहते हैं 1807 में इस पंडाल में दुर्गापूजन प्रारंभ हुआ था। दुर्गाबाड़ी का देवी पूजन सबसे पुराना है। यहां पर देवी की मूर्ति लगभग तैयार है। 26 सितंबर को घट स्थापना होगी। यहां पर आयोजन कमेटी का विधिवत गठन 96 वर्ष पहले हो गया था। इस बार अध्यक्ष महिला पापिया सान्याल पर आयोजन की जिम्मेदारी है। पंचमी को प्राण प्रतिष्ठा से विधिवत पूजन आरंभ होगा। यहां पर देवी के श्रृंगार और पूजन की सामग्री भी कोलकाता से मंगाई जाती है। पुरोहित भी पश्चिम बंगाल से आते हैं। प्रधान सचिव अभय मुखर्जी और पूजा सचिव सत्यजीत मुखर्जी हैं।

इस बार मां का गज पर आगमन, नौका पर प्रस्थान

सदर दुर्गाबाड़ी में माता की मूर्ति को मिट्‌टी से आकार दिया जा रहा है। मूर्ति में मां दुर्गा, सरस्वती, लक्ष्मी, भगवान गणेश, कार्तिकेय अपने वाहन के साथ हैं। साथ ही मां महिषासुर का वध कर रही हैं।
सदर दुर्गाबाड़ी में माता की मूर्ति को मिट्‌टी से आकार दिया जा रहा है। मूर्ति में मां दुर्गा, सरस्वती, लक्ष्मी, भगवान गणेश, कार्तिकेय अपने वाहन के साथ हैं। साथ ही मां महिषासुर का वध कर रही हैं।

योग के अनुसार इस बार नवरात्रि में माता का आगमन गज पर होगा, प्रस्थान नौका पर है। कोरोना के बाद लगभग 2 सालों बाद बड़े स्तर पर दोबारा दुर्गा उत्सव समारोह मनाया जा रहा है। उत्सव के दौरान सांस्कृतिक आयोजन, मां की झांकी सज्जा, नृत्य, गायन, वादन, नाटक मंचन होगा। साथ ही महिलाओं, बच्चों की लिए खेल और प्रतियोगिताएं होती हैं।
पहले जानें कैसे बनती है मां की विशेष मूर्ति

दुर्गाबाड़ी प्रांगण में बंगाली समाज द्वारा हर वर्ष नवरात्र पूजन किया जाता है, साथ ही प्रांगण में बंगाली लोग अपनों की याद में पत्थर भी लगवाते हैं
दुर्गाबाड़ी प्रांगण में बंगाली समाज द्वारा हर वर्ष नवरात्र पूजन किया जाता है, साथ ही प्रांगण में बंगाली लोग अपनों की याद में पत्थर भी लगवाते हैं

बंगाली दुर्गाबाड़ी में मां की मूर्ति निर्माण जन्माष्टमी से प्रारंभ हो जाता है। हर साल कोलकाता से विशेष रूप से मूर्तिकार, पेंटर बुलाकर दुर्गा मूर्ति तैयार कराई जाती है। मूर्ति को मिट्‌टी, रेत, फूस, कागज से मिलाकर बनाया जाता है। बाद में इस मूर्ति को रंगों से सजाते हैं। अंत में वस्त्राभूषण, केश, नयन सज्जा की जाती है। उत्सव के दौरान भक्त जो सामग्री, श्रृंगार मां को अर्पण करते हैं उसे भक्तों में वितरित कर दिया जाता है। बंगाली बाड़ी में मां की जो मूर्ति स्थापित होती है उसमें मां दुर्गा का पूरा परिवार साथ होता है।

मां मायके आई हैं... स्वागत में करते धुनूची नृत्य

दुर्गाबाड़ी प्रांगण में लगा एक पत्थर
दुर्गाबाड़ी प्रांगण में लगा एक पत्थर

षष्ठी पर मुख्यत: हम मां का पूजन प्रारंभ करते हैं। दशहरे तक विधिवत पूजन, प्रसाद वितरण होता है। कहते हैं नवरात्र में मां मायके आती हैं और दशहरे पर ससुराल लौटती हैं। दशहरे पर भव्य विसर्जन समारोह करते हैं। इसमें बैंड-बाजों, नाच-गाने के साथ मूर्ति को नानू की नहर में अर्पण करते हैं। मां को बुलाते हैं कि अगले साल जल्दी मायके आएं। इस दौरान बंगाली महिलाएं सिंदूरखेला और सिंदूरदान करती हैं। हमारे बंगाली में मानते हैं कि सिंदूरदान से पति की उम्र बढ़ती है। इसलिए ये रस्म निभाते हैं। इस पूरे आयोजन में धुनूची डांस भी होता है। इसमें धुनों पर एक प्रकार की सुगंध डालकर मां की पूजा होती है। मां के आगमन में वातावरण को शुद्ध करके महकाने का रिवाज यह धुनूची नृत्य है। महिलाएं, पुरुष, युवा सब इसे करते हैं।
निर्जल व्रत रखकर बनाते हैं प्रसाद

बंगाली दुर्गाबाड़ी समिति के कार्यकारी सदस्य अजय मुखर्जी।
बंगाली दुर्गाबाड़ी समिति के कार्यकारी सदस्य अजय मुखर्जी।

पूजो समिति के सदस्यों के अनुसार इस साल शिरडी साईधाम में ट्राली से प्रसाद बंटता है उसी तरह हम यहां प्रसाद वितरण व्यवस्था रखेंगे। ताकि हर भक्त को मां का आशीर्वाद मिले। जो प्रसाद-भंडारा बनता है उसे हमारी समिति के सदस्य देसी घी में तैयार करते हैं। प्रसाद की विशेषता है कि जो लोग प्रसाद बनाते हैं वो दिनभर निर्जल व्रत रखते हैं। पानी पीने वाला व्यक्ति प्रसाद निर्माण नहीं कर सकता। प्रसाद में खिचड़ी, पंचभाजा, सब्जी, खीर बनाकर वितरित होता है।

बंगाली दुर्गाबाड़ी में स्थापित होने वाली दुर्गा मूर्ति की बेदी में बड़ी शक्ति है। जो व्यक्ति इस बेदी पर आकर प्रणाम करता है उसकी मनोकामना मां दुर्गा अवश्य पूरा करती है। (फाइल फोटो)
बंगाली दुर्गाबाड़ी में स्थापित होने वाली दुर्गा मूर्ति की बेदी में बड़ी शक्ति है। जो व्यक्ति इस बेदी पर आकर प्रणाम करता है उसकी मनोकामना मां दुर्गा अवश्य पूरा करती है। (फाइल फोटो)

जानिए मेरठ में कहां-कहां सजेंगे दुर्गा पंडाल

  • सदर दुर्गाबाड़ी मंदिर में इस बार 216 वां दुर्गा पूजन महोत्सव होगा। बंगाली समाज द्वारा इस मंदिर में पूजन अर्चन होता है।
  • भाटवाड़ा में 101 वां दुर्गा पूजा महोत्सव होगा। मंदिर परिसर में 9 दिन देवी के अलग अलग स्वरूपों का पूजन होता है। देवी की 9 मूर्तियां बनाई जाती है। 26 सितंबर से चार अक्टूबर तक पूजन होगा। छह अक्टूबर को विशाल शोभायात्रा निकलेगी।
  • मेरठ सर्बोजनीन दुर्गा पूजा सोसायटी द्वारा 44 वां पूजा महोत्सव मनाया जाएगा। प्रतिदिन दोपहर में महिलाओं के आयोजन और रात 9 बजे के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। 1-5 अक्तूबर तक पूजन होगा।
  • नील गली स्थित मैढ़ राजपूत धर्मशाला में बंगाली स्वर्णाभूषण कारीगरों द्वारा दुर्गापूजन होगा। यहां 4 अक्तूबर को नवमी पूजा होगी। इस दिन रक्तदान शिविर लगेगा। 6 अक्तूबर को शोभायात्रा के साथ देवी विसर्जन होगा।
  • मुकुंदी देवी धर्मशाला में मेरठ के आभूषण कारीगरों द्वारा 27 वें पूजा महोत्सव का आयोजन होगा। ईश्वर पुरी में शिल्पकार मूर्ति को अंतिम रूप देने में जुटे है। 30 सितंबर से पांच अक्टूबर तक पूजन होगा। तीन अक्टूबर को भजन संध्या का आयोजन होगा। चार और पांच अक्टूबर को बंगाली राक स्टार देबोनीष प्रस्तुति देंगे।
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