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मेरठ की हस्तिनापुर सीट का है अनोखा इतिहास:ये विधानसभा हर बार बदल देती है अपना विधायक, जीतने वाले की बनती है सरकार

मेरठ7 महीने पहले
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हस्तिनापुर सीट का यूपी विधानसभा कनेक्शन।

यूपी विधानसभा के लिए चुनावी महासंग्राम का शंखनाद हो गया है। 10 फरवरी को मेरठ में पहले चरण का मतदान होगा। ऐसे में हर विधानसभा सीट पर चुनावी लड़ाई का दिलचस्प दौर भी शुरू हो गया है। कुरुवंश की राजधानी और महाभारत काल का हस्तिनापुर आज भी द्रौपदी के शाप से मुक्त नहीं हो सका है। हस्तिनापुर विधानसभा किसी की नहीं हुई। हर बार इस विधानसभा ने अपना विधायक बदल दिया। कभी पार्टी बदली तो विधायक भी बदल गया।

हस्तिनापुर को लेकर सियासी हलचल तेज
सपा सरकार में मंत्री रहे प्रभू दयाल वाल्मीकि को भी यहां मंत्री रहते हुए हार का सामना करना पड़ा। अब विधानसभा चुनाव में भाजपा के राज्यमंत्री दिनेश खटीक मैदान में हैं। ऐसे में हस्तिनापुर को लेकर सियासी हलचल लखनऊ व दिल्ली तक भी तेज हो गईं है।

हर बार विधायक बदला
हस्तिनापुर विधानसभा से कोई भी विधायक अपनी विधायकी बचाने में कामयाब नहीं हो सका। हर बार यहां की जनता अपना विधायक बदल देती है। इस विधानसभा पर यह यह भी एक संयोग रहा है की जिस भी पार्टी का विधायक बनता है, प्रदेश में सरकार उसी की बनती है। 1974 में इस सीट पर रेवती शरण मौर्य विधायक रहे। 3 साल बाद हुए चुनाव में रेवती शरण मौर्य ने पार्टी बदल दी और जनता पार्टी से दूसरी बार विधायक बने। दोनों बार प्रदेश में उनकी पार्टी की सरकार बनी।

द्रौपदी ने दिया था श्राप
मान्यता है करीब 5 हजार साल पहले कौरव और पांडवों के बीच द्यूत का खेल खेला गया। धर्मराज युधिष्ठर इस खेल में द्रौपदी को ही हार गए और कौरवों ने द्रौपदी को जीत लिया। इसके बाद भरी राजसभा में द्रौपदी को घसीटकर लाया गया और बाल खींचे गए। द्रौपदी ने श्राप दिया कि हस्तिनापुर कभी भी आबाद नहीं होगा। इस हस्तिनापुर में नारी का इस तरह से अपमान किया गया है, यह हस्तिनापुर हमेशा बदहाली झेलेगा। यही कारण बताया जाता है कि द्रौपदी के श्राप से हस्तिनापुर कभी मुक्त नहीं हुआ।

हस्तिनापुर में मुस्लिम वोटर प्रभावी
हस्तिनापुर विधानसभा में 3 लाख 50 हजार वोटर हैं। 2017 के विधानसभा चुनाव में 3 लाख 36 हजार वोटर थे। इस सीट पर मुस्लिमों की संख्या सबसे ज्यादा है। एक लाख मुस्लिम वोटर हैं। दूसरे नंबर पर दलित (जाटव) हैं, जिनकी संख्या 63 हजार है। गुर्जर वोटर की संख्या 56 हजार है। जाट 26 हजार, सिख 13 हजार, यादव 10 हजार, वाल्मीकि 8 हजार वोटर हैं। ब्राह्मण 7 हजार हैं। अन्य वोटों में सैनी, कश्यप, धीमर, खटीक, प्रजापति, गिरी हैं। यह सीट भले ही एससी कोटे की हो, लेकिन यहां मुस्लिम वोटों की संख्या सबसे अधिक है।

टिकट काटने पर सत्ता भी गंवाई
2012 में बसपा से योगेश शर्मा विधायक थे और सरकार भी बसपा की ही थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने योगेश वर्मा का टिकट काटा तो योगेश पीस पार्टी से चुनाव लड़े और बसपा इस चुनाव में सत्ता गंवा बैठी। 1977 के चुनाव में यहां कांग्रेस के साथ भी यही हुआ। मौजूद विधायक रेवती शरण मौर्य सत्ता को छोड़कर दूसरी पार्टी से चुनाव लड़े और जीतकर दूसरी सरकार में शामिल रहे।

हस्तिनापुर में जो जीता उसकी बनी सरकार

  • 2017 - भाजपा से दिनेश खटीक ने दर्ज की जीत, योगी आदित्यनाथ बने सीएम
  • 2012- सपा से प्रभुदयाल वाल्मिकी विधायक बने, अखिलेश यादव सीएम बने
  • 2007- बसपा से योगेश वर्मा ने जीत दर्ज की और मायावती बनीं सीएम
  • 2002- सपा से प्रभुदयाल वाल्मीकि बने विधायक, मुलयाम सिंह यादव की बनी सरकार
  • 1996- अतुल कुमार- निर्दलीय
  • 1994- गोपाल काली- भाजपा
  • 1989- जनता दल से झग्गर सिंह चुने गए विधायक, सरकार बनी मुलायम सिंह की
  • 1985- कांग्रेस से हरशरण सिंह चुने गए विधायक, वीर बहादुर सिंह बने सीएम
  • 1980- एनडी तिवारी की सरकार में झग्गर सिंह बने कांग्रेस से विधायक
  • 1977- भारतीय जनता पार्टी से रेवती शरण मौर्य ने दर्ज की जीत. सीएम बने रामनरेश यादव
  • 1974- कांग्रेस से रेवती शरण मौर्य चुने गए विधायक, सरकार बनी हेमवती नंदन बहुगुणा की
  • 1969- आशाराम इंदू- भारतीय क्रांति दल
  • 1967- चंद्रभान गुप्ता की सरकार में रामजी लाल सहायक कांग्रेस से चुने गए विधायक
  • 1962- प्रीतम सिंह- कांग्रेस
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