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पंच महायोगों में आज घर-घर विराजेंगी मां दुर्गा:मेरठ में गूंजेंगे मां भगवती के जयकारे, फूलों से सजाया मां का दरबार

मेरठ2 महीने पहले
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यह तस्वीर मेरठ सदर दुर्गाबाड़ी में बंगाली समाज द्वारा तैयार कराई जा रही माता दुर्गा की मूर्ति की है - Money Bhaskar
यह तस्वीर मेरठ सदर दुर्गाबाड़ी में बंगाली समाज द्वारा तैयार कराई जा रही माता दुर्गा की मूर्ति की है

आज से शारदीय नवरात्रि शुरू हो रहा है। मां दुर्गा की भक्ति और पूजन के इस पर्व के लिए मेरठ में मंदिरों में तैयारियां हो चुकी है। साज सज्जा चल रही है। इस बार शारदीय नवरात्रि 26 सितंबर को प्रारंभ होकर 4 अक्तूबर को नवमी तक रहेंगे। 5 अक्तूबर को विजय दशमी का पर्व मनाया जाएगा। नवरात्रि का पर्व देवी शक्ति मां दुर्गा को समर्पित है। भक्तों ने अपने अपने घरों में भी मां की आराधना करने के लिए तैयारी कर ली है।
पहले दिन बन रहे ये 5 योग

यह तस्वीर मेरठ सदर दुर्गाबाड़ी में बंगाली समाज ने तैयार कराई माता दुर्गा की मूर्ति, इस बार यहां 215वां नवरात्रि उत्सव मनाया जाएगा
यह तस्वीर मेरठ सदर दुर्गाबाड़ी में बंगाली समाज ने तैयार कराई माता दुर्गा की मूर्ति, इस बार यहां 215वां नवरात्रि उत्सव मनाया जाएगा

नवरात्रि में यह पहली बार है जब एक साथ 5 योग बन रहे हैं। तीन अक्टूबर को महाष्टमी, चार को महानवमी और पांच को मनेगा विजयदशमी का पर्व है।

जाने क्या है आज कलश स्थापना शुभ मुहूर्त

यह तस्वीर मेरठ सदर में बने काली माता मंदिर की है, बरसों से इस मंदिर में मां काली का पूजन करने भक्त आते हैं
यह तस्वीर मेरठ सदर में बने काली माता मंदिर की है, बरसों से इस मंदिर में मां काली का पूजन करने भक्त आते हैं

प्रतिपदा तिथि आरंभ 26 सितंबर सुबह 3 बजकर 23 मिनट पर और प्रतिपदा तिथि का समापन 27 सितंबर सुबह तीन बजकर आठ मिनट पर। ज्योतिषाचार्य राहुल अग्रवाल ने बताया कि अभिजीत मुहूर्त कलश स्थापना के लिए श्रेष्ठ मुहूर्त माना जाता है। शारदीय नवरात्रि के घटस्थापना या कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त अभिजीत मुहूर्त में 11 बजकर 48 मिनट से 12 बजकर 36 मिनट के बीच करना उत्तम होगा।

गज पर सवार होकर आएंगी माता

मेरठ के जयदेवी नगर स्थित गोल मंदिर में माता की पूजन का है विशेष महात्मय
मेरठ के जयदेवी नगर स्थित गोल मंदिर में माता की पूजन का है विशेष महात्मय

शारदीय नवरात्रि पर इस बार मां दुर्गा का गज पर आगमन हो रहा है। इसका अर्थ है कि इस बार वर्षा अधिक होगी। जिसके प्रभाव से चारों ओर हरियाली होगी। इससे फसलों पर भी अच्छा प्रभाव पड़ता है। इससे देश में अन्न के भंडार भरे रहेंगे। साथ ही धन-धान्य बढ़ेगा। देवी भागवत पुराण में मां दुर्गा की सवारी के बारे में काफी विस्तार से बताया गया।

शशि सूर्य गजरुढा शनिभौमै तुरंगमे, गुरौशुक्रेच दोलायां बुधे नौकाप्रकीर्तिता। श्लोक के अनुसार यदि नवरात्रि सोमवार या रविवार से प्रारंभ होती है तो माता हाथी पर विराजमान होकर आती है। नवरात्रि शनिवार या मंगलवार से प्रारंभ हो तो माता की सवारी घोड़ा होता है। वहीं यदि शुक्रवार और गुरुवार को नवरात्रि शुरू होती है तो मातारानी डोली में आती हैं। यदि बुधवार से नवरात्रि प्रारंभ हो तो माता का आगमन नौका पर होता है।

अब जानिए इस बार की नवरात्र तिथियां
26 सितंबर प्रतिपदा तिथि मां शैलपुत्री पूजा और घटस्थापना
27 सितंबर द्वितिया तिथि मां ब्रह्मचारिणी पूजा
28 सितंबर तृतीया तिथि मां चंद्रघंटा पूजा
29 सितंबर गुरुवार चतुर्थी तिथि मां कुष्मांडा पूजा
30 सितंबर पंचमी तिथि मां स्कंदमाता पूजा
1 अक्टूबर षष्ठी तिथि मां कात्यायनी पूजा
2 अक्टूबर सप्तमी तिथि मां कालरात्री पूजा
3 अक्टूबर अष्टमी तिथि मां महागौरी पूजा दुर्गा महाष्टमी
4 अक्टूबर नवमी तिथि मां सिद्धरात्री पूजा और दुर्गा महानवमी