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दूसरी फसलों से ज्यादा मुनाफा देगा बासमती चावल:बासमती निर्यात प्रतिष्ठान मेरठ में कृषि वैज्ञानिक बोले- वेस्ट यूपी के बासमती की विदेशों में अधिक डिमांड

मेरठ3 महीने पहले
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मेरठ में आयाेजित कार्यक्रम में कृषि वैज्ञानिक - Money Bhaskar
मेरठ में आयाेजित कार्यक्रम में कृषि वैज्ञानिक

बासमती निर्यात विकास प्रतिष्ठान के द्वारा बुधवार को केपेसिटी बिल्डिंग ऑन प्रोडक्शन एंड क्वालिटी एश्योरेंस इन एक्सपोर्ट ऑफ बासमती राइस विषय पर एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम मेरठ में बासमती निर्यात विकास प्रतिष्ठान सरदार पटेल एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी मोदीपुरम में आयोजित हुआ। कार्यक्रम में भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ आजाद सिंह पंवार ने देश भर से जुटे बासमती निर्यातक और किसानों से कहा कि बासमती से सबसे ज्यादा विदेशी मुद्रा अर्जित की जाती है।

वेस्ट यूपी में अधिक उपजाऊ है मिट्‌टी

कार्यक्रम में आये किसान व एक्सपोर्ट हाउसेस से जुड़े मेंबर
कार्यक्रम में आये किसान व एक्सपोर्ट हाउसेस से जुड़े मेंबर

भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ आजाद सिंह पंवार ने कहा की बासमती चावल हमारे देश से 155 देशों में निर्यात किया जाता है। वेस्ट यूपी में मिट्‌टी अधिक उपजाऊ है। यहां बिना कीटनाशक के भी चावल उगाया जाता है। यहां के किसानों को जागरूक होना होगा। समयानुसार किसान अधिक पैसा कमा सकते हैं।

बासमती निर्यात विकास प्रतिष्ठान के निदेशक डॉ डीडीके शर्मा ने बासमती धान में गुणवत्ता के बारे में कहा की वेस्ट यूपी के किसान अच्छी गुणवत्ता का बासमती उत्पादन करते हैं। लेकिन पेस्टिसाइड्स के अनुचित उपयोग के कारण कई बार निर्यात में दिक्कतें आ रही हैं।

समय पर करें धान की रोपाई

चावल की पैदा के लिए समय का विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता है हमें मिल में उसकी गुणवत्ता को उच्चतम बनाना है। जिससे कि अधिक से अधिक मूल्य हम प्राप्त कर सकें। बीईडीएफ की इंटरनेशनल लेवल में चावल की गुणवत्ता जांची जाए।

कार्यक्रम में अखिल भारतीय चावल निर्यातक संघ के कार्यकारी निदेशक डॉ विनोद कॉल ने निर्यात में आने वाली विभिन्न समस्याओं एवं मिल में चावल के रखरखाव उसकी उचित पैकिंग भंडारण की जानकारी दी।

अच्छी वैरायटी जरूरी
डॉ गोपालाकृष्णन प्रधान वैज्ञानिक भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान नई दिल्ली ने बताया कि ऐसी प्रजातियां विकसित कर रहे हैं जिससे रसायनों के प्रयोग की आवश्यकता ही नहीं हो और जो प्रजातियां विकसित हो रही हैं वे सभी रोग और कीट प्रतिरोधी होंगी।

1930 में रिलीज हुई बासमती 370 से लेकर और 2022 में अनुमोदित हुई पूसा बासमती 1847 तक का सफर बहुत बेहतर रहा। बासमती से सामान्य चावल की तुलना में दोगुने से अधिक तक हमारे किसान आय प्राप्त कर रहे हैं ।बीईडीएफ कि अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रयोगशालाओं में निर्यातक किसान या अन्य संस्थाएं अपने चावल की गुणवत्ता की जांच करा सकती हैं।

12 एक्सपोर्ट के प्रतिनिधि रहे मौजूद

रितेश शर्मा प्रधान वैज्ञानिक बासमती निर्यात विकास प्रतिष्ठान मेरठ ने कहा की यदि समय पर रोपाई की जाए तो दवाइयों की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। कार्यक्रम में देश के प्रतिष्ठित 12 एक्सपोर्ट हाउसेस के प्रतिनिधि, कृषि वैज्ञानिक, एफपीओ के मेंबर, प्रगतिशील किसान सहित विभिन्न संस्थाओं के अधिकारियों ने भाग लिया जिसमें करीब 100 लोगों ने प्रतिभाग किया।

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