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मऊ में बांटी गई फाइलेरिया की दवा:स्वास्थ्य कर्मियों ने घर-घर जाकर बांटी दवा, CMO ने कहा- दूषित खान-पान के सेवन से बचें लोग

मऊ2 महीने पहले
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मऊ में बांटी गई फाइलेरिया की दवा। - Money Bhaskar
मऊ में बांटी गई फाइलेरिया की दवा।

मऊ जनपद में मास एडमिनिस्ट्रेशन राउंड (एमडीए) के तहत स्वास्थ्य कार्यकर्ता फाइलेरिया की दवा लोगों को खिला रहे हैं। इसी क्रम में गुरुवार को भी जनपद के कई इलाकों में फाइलेरिया की दवा खिलाई गई।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. श्याम नरायण दुबे ने बताया कि पेट में कीड़े होने की कई वजह होती हैं, लेकिन मुख्य रूप से यह दूषित खान-पान के सेवन की वजह से होता है। गंदे हाथों से भोजन करना, खुले में रखे हुए भोजन को खाना, अधिक मीठा खाना, दिन भर सिर्फ आराम करना और परिश्रम न करने से पेट में कीड़े या कृमि हो जाते हैं।

रोगी आसानी से किसी भी रोग का शिकार हो जाता

कृमि लंबे, आवरणहीन और बिना हड्डी वाले होते हैं। कृमि परजीवी वह कीटाणु हैं, जो व्यक्ति में प्रवेश करके बाहर या भीतर (ऊतकों या इंद्रियों से) जुड़ जाते हैं और सारे पोषक तत्व को चूस लेते हैं। इनके बच्चे अंडे या कृमि के रूप में बढ़ते हुए त्वचा, मांस पेशियां, फेफड़ा या आंत (आंत या पाचन मार्ग) के उस ऊतक (टिशू) में कृमि के रूप बढ़ते जाते हैं। कृमि संक्रमित करने के साथ व्यक्ति को कमजोर और उसके अंदर मौजूद रोग से लड़ने की क्षमता को खत्म कर देता है, जिससे रोगी आसानी से किसी भी रोग का शिकार हो जाता है।

डॉ. श्याम नरायण दुबे ने बताया कि पेट में कीड़े के लक्षणों में पेट में दर्द होना, रोगी के वजन कम हो जाना, आंखे लाल होना, जीभ का सफेद होना, मुंह से बदबू आना, गले पर धब्बे पड़ना, शरीर पर सूजन आना, गुप्तांग में खुजली का होना है। पेट में होने वाले कीड़े या कृमि से व्यक्तियों के शरीर में खुराक नहीं लगती और व्यक्ति शारीरिक व मानसिक रूप से कमजोर होने लगता है।

इसलिए असाध्य और लाइलाज हो जाता है यह रोग

वहीं फाइलेरिया के लक्षणों में बुखार, बदन में खुजली और पुरुषों के जननांग में तथा उसके आसपास दर्द या सूजन, पैरों व हाथों में सूजन, हाथी पांव और हाईड्रोसील तथा काइलूरिया (पेशाब में सफेद पदार्थ का जाना जिसे धातु रोग भी कहते हैं। फाइलेरिया रोग के शरीर में उभरने के बाद असाध्य और लाइलाज हो जाता है, इसलिये इसे शरीर में मौजूद होते हुए भी पहले ही दवा का सेवन करा के प्रभावहीन और निष्क्रिय कर दिया जाता है।

अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी नोडल डॉ. आरवी सिंह ने बताया कि पेट में कृमियों को समाप्त करने के लिए एल्बेंडाजोल दी जा रही है। फाइलेरिया के संक्रमण से बचाने के लिये डीईसी (डाई एथायिल कार्बामेजिन साईट्रेट) की दवा नियमानुसार खिलाई जा रही है।