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मधुबन में 22 मई को सालाना उर्स का आयोजन:हिंदू-मुस्लिम एकता की प्रतीक है यह मजार, युद्ध स्तर पर चल रही तैयारियां

मधुबनएक महीने पहले
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मऊ की मधुबन तहसील क्षेत्र के ग्रामसभा उन्दुरा स्थित दो संतों की मजार पिछले कई दशक से हिंदु-मुस्लिम एकता का प्रतीक बना हुआ है। हर साल की भांति इस साल भी दो सूफी संतों के मजार पर लगने वाले उर्स की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। हालांकि उर्स 22 मई को है, मगर मजार पर जयरीनों के आने का सिलसिला अभी से शुरू हो गया है।

मठाधीश ने दी जानकारी

मजार के मठाधीश शाह मुहम्मद इजहार अहमद मोईनी ने बताया कि इस सालाना उर्स में महाराष्ट्र, गुजरात, विहार, बंगाल सहित कई प्रांतों से जायरीन अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे और इन जायरिनों एवं मुरिदिनों के ठहरने के लिए परिसर की साफ सफाई का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है। मजार प्रशासन जयरीनों को तेज हवाओं एवं गर्मी से बचाव के लिए टेंट लगाने एंव शुद्ध पेयजल आपूर्ति को चुस्त दुरुस्त बनाने में जुटा हुआ है ताकि जायरिनो एवं मुरिदिनों को किसी प्रकार की दुश्वारियां न झेलनी पड़े।

क्षेत्र स्थित मज़ार
क्षेत्र स्थित मज़ार

यहाँ दो संतों की है मजार

आपको बता दें कि इस स्थान के प्रति हिंदू मुस्लिम दोनों समुदाय को लोगों की विशेष आस्था है। यहाँ सूफी संत शाह मोहम्मद मोइनुद्दीन एंव शाह मोहम्मद मुख्तार का मजार अगल बगल स्थित है। हर साल यहां आयोजित होने वाले उर्स में देश के कोने कोने से हजारों की संख्या में जायरीन एकत्रित होते हैं।

जोरों से जारी तैयारियां
जोरों से जारी तैयारियां

22 मई को है आयोजन

इस साल सूफी संत शाह मुहम्मद मोइनुद्दीन का 74 वां एवं हरजत शाह मुहम्मद मुख्तार अहमद का 36 वां उर्स का आयोजन किया जाना है। 21 मई को जयरीनों का बटोर होगा तथा 22 मई को उर्स का आयोजन किया जायेगा वहीं साथ में मजार पर चादर पोशी की रस्म अदा की जाएगी।

उर्स की सभी तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं। मौसम को देखते हुए शुद्ध पेयजल की व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया गया है ताकि जयरीनों को किसी प्रकार की दिक्कतों का सामना ना करना पड़े। सुरक्षा व्यवस्था के लिए तहसील प्रशासन को लिखित सूचना दे दी गई है। इस मजार के प्रति दोनों समुदाय के लोगों की विशेष आस्था है। प्रत्येक गुरुवार को यहां बड़ी संख्या में जायरीन इकट्ठा होते हैं। ऐसी मान्यता है कि यहां सच्चे दिल से मांगी गई हर दुआएं पूरी होती हैं।

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