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रंगनाथ मन्दिर में मना विजय दशमी पर्व:सोने के घोड़े पर विराजमान होकर निकले भगवान रंगनाथ , शमी के वृक्ष का किया पूजन

मथुराएक महीने पहले
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दक्षिण भारतीय शैली के रंगनाथ मन्दिर में विजय दशमी पर्व पूरे विधि विधान एवं वैदिक परंपरा के अनुसार मनाया गया - Money Bhaskar
दक्षिण भारतीय शैली के रंगनाथ मन्दिर में विजय दशमी पर्व पूरे विधि विधान एवं वैदिक परंपरा के अनुसार मनाया गया

विजय दशमी पर्व पर जगह जगह पर अलग अलग कार्यक्रम होते हैं । कहीं रावण दहन किया जाता है कहीं शस्त्र पूजन होता है। उत्तर भारत के विशालतम दक्षिण भारतीय शैली के रंगनाथ मन्दिर में भी विजय दशमी पर्व पूरे विधि विधान एवं वैदिक परंपरा के अनुसार मनाया गया।

भगवान रंगनाथ की निकली सवारी

दक्षिण भारतीय शैली के वृंदावन स्थित श्री रंगनाथ मन्दिर में विजय दशमी पर्व शुक्रवार को पूरे विधि विधान से नियम पूर्वक मनाया गया। विजय दशमी पर्व पर भगवान रंगनाथ की सवारी प्रातः निज मन्दिर से बड़े बगीचा पहुंची । जहां भगवान की आरती उतारी गई और प्रसाद लगाया गया। शाम को गौधुली बेला में बड़े बगीचा स्थित मण्डप से भगवान स्वर्ण अश्व पर विराजमान होकर हाथ मे भाला , धनुष , तलवार एव अन्य शस्त्र लेकर शमी वृक्ष के समीप पहुंचे ।

भगवान रंगनाथ की सवारी प्रातः निज मन्दिर से बड़े बगीचा पहुंची । जहां भगवान की आरती उतारी गई और प्रसाद लगाया गया
भगवान रंगनाथ की सवारी प्रातः निज मन्दिर से बड़े बगीचा पहुंची । जहां भगवान की आरती उतारी गई और प्रसाद लगाया गया

शमी वृक्ष का किया गया पूजन

शमी ( छौंकरा) वृक्ष के समीप पहुंचने पर मन्दिर के स्वामी गोवर्धन रंगाचार्य जी के नेतृत्व में वृक्ष का पूजन वैदिक मंत्रोचारण के मध्य पूरे विधि विधान से किया गया। मंदिर के पुजारियों ने वृक्ष का पूजन करने के बाद धनुष बाण का पूजन किया । इसके बाद आरती उतारी गई।

वन से वापस आने पर पांडवों ने वृक्ष का पूजन किया और फिर आठों दिशाओं में शस्त्र चलाकर परीक्षण किया
वन से वापस आने पर पांडवों ने वृक्ष का पूजन किया और फिर आठों दिशाओं में शस्त्र चलाकर परीक्षण किया

यह हैं मान्यता

मन्दिर के सेवायत रघुनाथ स्वामी ने बताया कि मान्यता है कि पांडव जब वन गए तब अपने अस्त्र शस्त्र शमी के वृक्ष पर ही रखकर गए । दशहरा पर जब वह वापस आये तो पहले उन्होंने वृक्ष का पूजन किया और फिर आठों दिशाओं में शस्त्र चलाकर परीक्षण किया । इसी परंपरा का निर्वहन करते हुए भगवान रंगनाथ की सवारी निज मन्दिर से बड़े बगीचा आती है और शाम को शमी वृक्ष का पूजन कर वापस परम्परागत वाद्य यंत्रों की मधुर ध्वनि के बीच निज मन्दिर पहुंचती है। विजय दशमी पर्व के अवसर पर यतिराज स्वामी , रंगा स्वामी , चौवी स्वामी , मन्दिर के पुरोहित गोविंद मिश्र , तिरुपति राव , कन्हैया, आदि उपस्थित रहे ।