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दशहरा स्पेशल:रावण का पुतला दहन का लंकेश भक्त मण्डल ने किया विरोध , विजयदशमी पर यमुना किनारे हुआ रावण का पूजन

मथुरा2 महीने पहले
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लंकेश भक्त मंडल के पदाधिकारी विजय दशमी पर यमुना किनारे रावण का पूजन करते हुए - Money Bhaskar
लंकेश भक्त मंडल के पदाधिकारी विजय दशमी पर यमुना किनारे रावण का पूजन करते हुए

बुराई पर अच्छाई की जीत के पर्व दशहरा पर जहां देश भर में रावण का पुतला दहन किया जाता है वहीं कृष्ण की जन्मभूमि मथुरा में रावण का पूजन किया जाता है। यमुना किनारे प्रतिवर्ष दशहरा पर लंकेश भक्त मण्डल के पदाधिकारी रावण का पूजन करते हैं और पुतला दहन की परंपरा का विरोध करते हैं।

विजय दशमी को होगी मथुरा में दशानन की महा आरती

लंकेश भक्त मंडल ने विजय दशमी को मथुरा में प्रकांड विद्वान दशानन रावण की महा आरती कर पुतला दहन का विरोध किया ।पूजन में बड़ी संख्या में रावण के अनुयायी शामिल हुए ।लंकेश भक्त मण्डल के पदाधिकारी शिव तांडव स्तोत्र के रचयिता रावण के विष्णु लोक गमन के दिन विजय दशमी को उनकी महा आरती करते है ।

रावण ने की थी एकाग्र चित होकर घनघोर तपस्या

लंकेश भक्त मंडल के अध्यक्ष ओमवीर सारस्वत एडवोकेट ने बताया कि त्रिकाल दर्शी प्रकांड विद्वान का हर वर्ष पुतला दहन करना एक कुरीति है। हिंदू धर्म में एक बार ही व्यक्ति के अंतिम संस्कार करने की व्यवस्था है।परंतु हमारी समाज में पुतला दहन की कुरीति प्राचीन समय से गलत आधारों पर अपनाई जा रही हे ।लंकेश भक्त मंडल दशानन के भक्त और अनुयाई होने के नाते पुतला दहन का विरोध करता हे। लंकेश की अच्छाइयों से सीख लेनी चाहिए। जिन्होने एकाग्र चित्त होकर घन घोर तपस्या की थी जिसके आधार पर शक्ति हासिल की ।तभी भगवान राम ने युद्ध में विजय प्राप्ति के समय जब दशानन विष्णु लोक को जा रहे थे तो उन्होंने अपने छोटे भाई लक्ष्मण को राजनीति की शिक्षा लेने के लिय रावण के पास भेजा था।

राम में आस्था है तो रावण का भी सम्मान करना चाहिए

लंकेश भक्त मण्डल के अध्यक्ष ओमवीर सारस्वत ने बताया कि भगवान श्री राम ने लंका पर विजय प्राप्ति के लिए सेतु बंधु रामेश्वरम की स्थापना के लिए जामवंत को रावण के पास आचार्य बनाने के लिए निमंत्रण भेजा था जिसे रावण ने स्वीकार किया था। रावण स्वयं सीता जी को साथ लेकर आए थे।राम जी को पूजन कराके उन्होंने स्वयं लंका पर विजय प्राप्त करने के लिए आशीर्वाद दिया था। जब हम लोग भगवान राम में आस्था रखते है तो हमे रावण का भी सम्मान करना चाहिए।

यह रहा कार्यक्रम

विजय दशमी के दिन शुक्रवार को दोपहर बारह बजे यमुना पार स्थित यमुना पुल के नीचे तलहटी में शिव मंदिर पर लंकेश भगवान भोले नाथ की पूजा की गयी । इसके बाद दशानन की महा आरती हुई . इसके बाद लंकेश भक्त मण्डल के सभी सदस्यों ने लंकेश की जयजयकार की ।

रावण का था मथुरा से नाता

दशानन लंकापति रावण की दो बहनों सुपर्णखा और कुंभिनी थी । कुंभनी का विवाह मथुरा के राजा मधु राक्षस के साथ विवाह हुआ था। क्योंकि मथुरा का प्राचीन नाम मधुपुरा है। इसके साथ ही कुंभनी राक्षस लवणासुर की भी थी। इसलिए लंकापति रावण का आना-जाना मथुरा में लगा रहता था।

25 वर्षों से कर रहे पूजन

दशहरा पर्व पर लंकेश भक्त मंडल के पदाधिकारी यमुना किनारे पहुँचते हैं . यहाँ वह पहले वहाँ बने एक शिवलिंग का रावण बने स्वरूप के साथ पूजन करते हैं . इसके बाद लंकेश का पूजन कर महा आरती करते हैं . लंकेश भक्त मंडल के पदाधिकारी यह पूजन पिछले 25 वर्षों से करते चले आ रहे हैं .

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