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39 साल की हथनी पहुंची मथुरा के हाथी हॉस्पिटल:भदोही में वन विभाग ने कराया मुक्त, 20 साल से मालिक जंजीरों में बांधकर मंगवाता था भीख

मथुराएक महीने पहले
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हाथी अस्पताल पहुंचने पर संस्था के पदाधिकारियों ने रोजी का इस अंदाज में स्वागत किया - Money Bhaskar
हाथी अस्पताल पहुंचने पर संस्था के पदाधिकारियों ने रोजी का इस अंदाज में स्वागत किया

भदोही वन विभाग ने 39 साल की हथिनी 'रोजी' को उसके क्रूर मालिकों से आजाद करा लिया है। रोजी के जरिए उसके मालिक भीख मांगते थे। इसके लिए उसे लोहे की मोटी जंजीर से जकड़ रखा था। इससे उसके पैरों के नाखून फट गए थे। तलवों पर भी जख्म हैं। शरीर पर कई फोड़े निकल आए हैं। अब उसे वाइल्डलाइफ एसओएस के मथुरा स्थित हाथी अस्पताल में लाया गया, जहां रोजी को विशेष चिकित्सा उपचार और पौष्टिक भोजन दिया जा रहा है।

रोजी के आगे और पीछे के पैरों के चारों ओर नुकीली जंजीर भी बंधी हुई थी।
रोजी के आगे और पीछे के पैरों के चारों ओर नुकीली जंजीर भी बंधी हुई थी।

20 साल से कैद में रही हथिनी रोजी
बात 24 मई की है। भदोही वन विभाग को वाइल्ड लाइफ एसओएस एक इनपुट दिया। बताया कि एक हथिनी को अवैध तरीके से कुछ लोगों ने बंधक बनाकर रखा है। उससे भीख मंगवाई जा रही है। भदोही वन विभाग की टीम हथिनी को जब्त कर लिया।

हथिनी के पैरों को चारों ओर से भारी नुकीली जंजीरों से बांधा गया था। इससे उसके पैरों में गहरे घाव हो चुके हैं। उसके साथ ऐसा कई सालों से हो रहा था। लेकिन हथिनी को पालने वाले शैलेश तिवारी सीजेएम कोर्ट चले गए। शैलेश भदोही में ज्ञानपुर के बलभद्रपुर गांव के रहने वाले हैं।

शैलेश ने दावा किया कि उन्होंने हथिनी 5 नवंबर 2002 को कुशीनगर के कृष्ण बिहारी से खरीदी थी। इसका उन्होंने बिक्रीनामा भी दिखाया। कृष्ण बिहारी ने इस हथिनी को 2001 में बिहार के किसी शख्स से खरीदा था। रसीद भी कोर्ट के सामने रखी। हालांकि, वन विभाग ने पूरे दस्तावेजों को अवैध बताया।

दलीलों को सुनने के बाद कोर्ट ने वन विभाग के पक्ष में फैसला दिया। अब इस प्रकरण की 13 जुलाई को सुनवाई होगी। गुरुवार को पशु डॉक्टरों की एक टीम उसे अपनी देखरेख में मथुरा लेकर आई है।

बता दें कि मथुरा में वाइल्ड लाइफ एसओएस की तरफ से भारत का पहला हाथी अस्पताल बना है। यहां विशेषज्ञों के अलावा लेजर थेरेपी, डिजिटल वायरलेस रेडियोलॉजी और थर्मल इमेजिंग जैसी विशेष चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हैं।

रोजी के शरीर पर कई जगह फोड़े और चोटें भी हैं।
रोजी के शरीर पर कई जगह फोड़े और चोटें भी हैं।

रोजी का चिकित्सक कर रहे इलाज
चुनौतियों के बावजूद, रोजी को आखिरकार कष्ट भरे जीवन से आजादी मिली और उसे वाइल्डलाइफ एसओएस की एक्सपर्ट देखरेख में लाया गया। रोजी को उत्तर प्रदेश वन विभाग के सहयोग से वाइल्डलाइफ एसओएस द्वारा स्थापित भारत के एकमात्र हाथी अस्पताल परिसर में विशेषज्ञों के हाथों लेजर थेरेपी, डिजिटल वायरलेस रेडियोलॉजी और थर्मल इमेजिंग जैसी विशेष चिकित्सा सुविधाएं मिलेंगी।

विशेषज्ञों के हाथों लेजर थैरेपी, डिजिटल वायरलेस रेडियोलॉजी और थर्मल इमेजिंग जैसी विशेष चिकित्सा सुविधाएं मिलेंगी।
विशेषज्ञों के हाथों लेजर थैरेपी, डिजिटल वायरलेस रेडियोलॉजी और थर्मल इमेजिंग जैसी विशेष चिकित्सा सुविधाएं मिलेंगी।

वाइल्डलाइफ एसओएस की पशु चिकित्सा सेवाओं के उप-निदेशक डॉ इलिया राजा ने बताया कि वर्षों की उपेक्षा और दुर्व्यवहार ने रोजी के स्वास्थ्य पर गहरा असर डाला है। उसके पैर बहुत खराब स्थिति में हैं और उसके शरीर पर कई चोटों के निशान भी हैं। उसके स्वास्थ्य की स्पष्ट तस्वीर प्राप्त करने और उसे आवश्यक देखभाल प्रदान करने के लिए विस्तृत चिकित्सा जांच कर रहे हैं।

'दुर्व्यवहार ने हथिनी के स्वास्थ्य पर डाला गहरा असर''
वाइल्ड लाइफ पशु चिकित्सा सेवा के उप निदेशक डॉ इलियाराजा ने बताया, ''हथिनी के शरीर पर चोटों के निशान हैं। उसके पैर बहुत खराब स्थिति में हैं।'' डीएफओ नीरज कुमार आर्य ने बताया, ''रोजी विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित है। इस कारण यह निर्णय लिया गया कि हथिनी को तत्काल हाथी अस्पताल में स्थानांतरित किया जाए।''

''दर्द से भरा होता है भीख मांगने वाले हाथी का जीवन''
संस्था के डायरेक्टर बैजूराज एम.वी ने वन विभाग का अभार जताया है। उन्होंने कहा, ''भीख मांगने वाले हाथी का जीवन दर्द से भरा होता है। साथ ही वह गंभीर मानसिक तनाव से पीड़ित हो जाते हैं। जिसे ठीक होने में वर्षों लग जाते हैं। अब रोजी हाथी अस्पताल में सुरक्षित है।''

वाइल्डलाइफ एसओएस की सह-संस्थापक गीता शेषमणि ने कहा, ''नुकीली जंजीरों का उपयोग अवैध है। खींचने पर यह नुकीले कांटे मांस को फाड़ देते हैं। इससे हाथी को असहनीय दर्द होता है। इस तरह उनके मालिक उन्हें दर्द और भय का उपयोग करके नियंत्रित करते हैं। घाव अक्सर ठीक नहीं होते हैं और समय के साथ संक्रमित हो जाते हैं।''