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मैनपुरी में मिले 4 हजार साल पुराने हथियार:खेत की खुदाई में बक्से में मिले तीर, कमान, कटारी, छुरी; ASI की टीम ने कब्जे में लिया

मैनपुरी2 महीने पहले
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मैनपुरी में एक खेत में टीले की खुदाई में 4000 साल पुराने हथियार बरामद हुए हैं। आगरा और दिल्ली पुरातत्व विभाग की टीम यानी ASI ने इन्हें अपने कब्जे में ले लिया है। इन हथियारों में तीर कमान, कटारी, छुरी हैं। इन हथियारों को ताम्र पाषाण युग का बताया जा रहा है। जांच में मिले प्रमाण से आर्कियोलॉजिस्ट काफी रोमांचित हैं। 9 जून को खेत के समतलीकरण में हथियार मिले थे, जिसे किसान अपने साथ लेकर चले गए थे।

प्राचीन काल के ये हथियार थाना कुरावली क्षेत्र के ग्राम गणेशपुरा में मिले थे। यहां के रहने वाले बहादुर सिंह उर्फ फौजी का खेत टीले पर है। वह टीले की खुदाई कराकर उसका समतलीकरण करा रहे थे। 9 जून को रात में मजदूर जेसीबी की सहायता से टीले को समतल करने में जुटे थे। तभी खुदाई के दौरान एक बक्सा निकला था। इसमें प्राचीन काल के तीर कमान, कटारी, छुरी भरे हुए थे।

बहादुर सिंह उर्फ फौजी के खेत में प्राचीन हथियारों से भरा बक्सा मिला था।
बहादुर सिंह उर्फ फौजी के खेत में प्राचीन हथियारों से भरा बक्सा मिला था।

हथियार देख उठा ले गए थे किसान
हथियार मिलने के बाद रात में काम कर रहे मजदूर और किसान छीनाझपटी कर अपने साथ ले गए थे। कुछ हथियारों को मौके पर छोड़कर भाग गए थे। 16 जून को एसडीएम कुरावली ने अपने कब्जे में लेकर थाने में जमा करा पुरातत्व विभाग को सौंपा था। बाद में मुनादी कराकर बाकी के भी हथियारों को जमा कराया गया। पुरातत्व विभाग और पुलिस ने खेत की जगह को चिन्हित कर खुदाई पर रोक लगा दी थी।

हथियारों की लंबाई 2 से 2.5 फीट बताई जा रही। इनकी बनावट स्टारफिश यानी मछलीनुमा है।
हथियारों की लंबाई 2 से 2.5 फीट बताई जा रही। इनकी बनावट स्टारफिश यानी मछलीनुमा है।

ताम्र पाषाण काल के बताए जा रहे हथियार
अधीक्षण पुरातत्वविद रामकुमार ने कहा कि हथियारों की जांच से ऐसा लगता है कि यह ताम्र पाषाण युग के हैं। तांबे के 80 हथियारों करीब 4000 साल पुराने हैं। जांच के लिए पुरातत्व विभाग के अतिरिक्त महानिदेशक दिल्ली अजय कुमार यादव के नेतृत्व में एक टीम कुरावली गांव गनेशपुर पहुंची है।

जिला प्रशासन के मुनादी करने के बाद किसानों ने हथियारों को जमा कर दिया। लगभग 80 तांबे के हथियार अब तक मिल चुके हैं।
जिला प्रशासन के मुनादी करने के बाद किसानों ने हथियारों को जमा कर दिया। लगभग 80 तांबे के हथियार अब तक मिल चुके हैं।

टीम ने खेत पर करीब दो घंटे तक जांच की थी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह ताम्र पाषाण काल ( कॉपर एज) के हो सकते हैं। कांसा हड़प्पा काल में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता था। हालांकि, अध्ययनों से पता चला है कि इस प्रकार के हथियार मुख्य रूप से तांबे से बने होते थे। इनमें कांसे का प्रयोग नहीं होता था।

पुरातत्व विभाग ने दो बीघा खेत अपने कब्जे में लिया है। खुदाई कराकर प्राचीन अवशेषों की खोज की जा रही है।
पुरातत्व विभाग ने दो बीघा खेत अपने कब्जे में लिया है। खुदाई कराकर प्राचीन अवशेषों की खोज की जा रही है।

कानपुर के बिठूर में भी मिले थे हथियार
अधीक्षण पुरातत्वविद रामकुमार ने बताया कि ऐसे ही हथियार सबसे पहले 1982 में कानपुर के बिठूर के पास मिले थे। जैसे अवशेष यहां मिल रहे हैं, वह गैरिक मृदभांड परंपरा के हैं। जिससे अनुमान लगाया जा सकता है कि उस समय के लोग यहां पर रहे होंगे, जिन्होंने यह अस्त्र प्रयोग किए गए होंगे।