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महोबा में दीपावली नृत्य की धूम:धार्मिक स्थलों पर दिवारी नृत्य किया, गौ माता की पूजा कर मौन व्रत तोड़ा

महोबा3 महीने पहले
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मौनियों ने दिवारी नृत्य कर लाठी चलाने की कला कौशल का प्रदर्शन किया। - Money Bhaskar
मौनियों ने दिवारी नृत्य कर लाठी चलाने की कला कौशल का प्रदर्शन किया।

महोबा के सूर्य कुण्ड, रामकुण्ड, ग्राम काकुन के बजरंग बलि मंदिर आदि धार्मिक स्थलों पर ग्रामीण अंचलों से आये मौनियों ने दिवारी नृत्य कर लाठी चलाने की कला कौशल का प्रदर्शन किया। देरशाम अपने अपने यथा स्थान पहुंचकर पुनः गौमाता की पूजा कर मौन व्रत तोड़ा। सारे दिन ग्रामीण अंचलों मे दीपावली नृत्य की धूम मची रही। दिवारी नृत्यकर्ताओ ने लाठी चलाने की कला कौशल का प्रदर्शन किया।

लाठियों से हाेता था युद्ध

ज्ञातव्य हो कि द्वापर युग मे होने वाले युद्धों के लिए भगवान कृष्ण ने ग्वालवालो को लाठी से अपनी और देश की रक्षा करना तथा दुश्मन पर किस तरह लाठी से प्रहार किये जाये, इस सारी कला कौशल से अपने ग्वालवालो और सैनिको को लाठी चलाने की कला से दक्ष किया था।

चूंकि उस समय ढाल तलवार और लाठियों से युद्ध होता था। लाठी चलाने की परम्परा आज भी ग्रामीण परिवेश मे जीवंत है और दीवारी पर्व पर जगह जगह इस लाठी चलाने की कला कौशल के दर्शन इसी दीपावली पर्व पर देखने को मिलता है।

एक दशक से हो रहा कार्यक्रम

एक दशक पहले महोबा शहर के विभिन्न मुहल्लों से मोनियों की टोली यहां के धार्मिक स्थल रामकुण्ड तथा जलाशयों में रामकुण्ड स्थल भूतल मे पहुंचकर अपनी- अपनी टोलियो के साथ गौमाता की पूजा अर्चना कर मौन साधन का संकल्प लेते थे।

मौनियों के साथ दिवारी नृत्य करने वाले युवक भी गाजे बाजे के साथ नृत्य करते और उनके साथ 12 कोशी परिक्रमा लगाते देखे जाते थे। इसी तरह शहर के मुहल्ला भटीपुरा नैकानापुरा, सत्तीपुरा, मलकपुरा के यदुवंशी अपने अपने यथा स्थान से टोलियो में मौन चराने निकलते थे। मौन चराने की परम्परा अहिस्ता- अहिस्ता शहरी और कस्बाई लोगो मे विलुप्त होती जा रही है।