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मरने के बाद गर्भवती को किया रेफर:महोबा में तीन घंटे भर्ती करने के बाद प्राइवेट एम्बुलेंस बुलाकर भेजा, परिजनों ने कहा- खेला जा रहा कमीशनखोरी का खेल

महोबाएक महीने पहले
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महोबा के महिला जिला अस्पताल में लापरवाही का ऐसा मामला सामने आया, जिसे सुनकर लोग हैरत में पड़ गए। गर्भवती महिला की मौत होने के बाद भी डॉक्टरों ने उसे इलाज के लिए अस्पताल से रेफर कर दिया। यही नहीं अस्पताल स्टाफ द्वारा प्राइवेट एंबुलेंस खुद मंगाकर परिजनों को जल्द से जल्द रेफर कर ले जाने के लिए कहा गया।

जब परिजनों ने उसे मृत देखा तो हंगामा खड़ा हो गया और अस्पताल के बाहर शव रखकर परिजनों ने जाम लगा दिया। सूचना पर एसडीएम सदर और शहर कोतवाली पुलिस पहुंच गई। परिजनों को समझाया गया है तो वहीं पूरे मामले की मजिस्ट्रेट जांच के निर्देश दिए गए हैं।

3 घंटे तक अस्पताल में भर्ती रही गर्भवती

उत्तर प्रदेश सरकार की मंशा स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने की भले हो मगर महोबा के महिला जिला अस्पताल में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं तो दूर बल्कि आने वाले मरीजों और उनके परिजनों के साथ धोखा किया जा रहा है। दरअसल महोबा के ग्राम छिकहरा निवासी चेतराम गर्भवती पत्नी तुलसा (32वर्ष) को लेकर महिला जिला अस्पताल पहुंचा था। जहां डॉक्टरों द्वारा नॉर्मल डिलीवरी होने की बात कही थी। तकरीबन 3 घंटे तक अस्पताल में गर्भवती को भर्ती रखा गया और डॉक्टर द्वारा आश्वासन दिया गया कि नॉर्मल डिलीवरी हो जाएगी, लेकिन अचानक उसकी तबीयत बिगड़ने लगी।

इसके बाद डॉक्टरों ने उसे रेफर कर दिया। हद तो तब हो गई जब अस्पताल के स्टाफ द्वारा एक प्राइवेट एंबुलेंस भी बुला ली गई और परिजनों को उसी एंबुलेंस से ले जाने के लिए कहा गया। जैसे ही परिवार के लोग उसे एंबुलेंस में रखकर ले जाने लगे तो देखा कि उसका शरीर ठंडा है। वह मृत हो चुकी है। ऐसे में परिजन आक्रोशित हो गए और देखते ही देखते अस्पताल के बाहर शव को रखकर जाम लगा दिया गया।

नॉर्मल डिलीवरी का आश्वासन देकर दिया धोखा

परिजनों का कहना है कि वह इलाज के लिए अस्पताल स्टाफ और डॉक्टर से मिन्नत करते रहे, लेकिन हर बार नॉर्मल डिलीवरी होने का आश्वासन दिया जाता रहा। उनके सूचना मिलते ही एसडीएम सदर जितेंद्र कुमार और शहर कोतवाली पुलिस ने मौके पर पहुंच परिजनों को बमुश्किल शांत कराया। वहीं इस पूरे मामले को लेकर अस्पताल में तैनात डॉक्टर रचना बताती हैं कि महिला की हालत बिगड़ने पर परिजनों को जल्द से जल्द ले जाने के लिए कहा गया था, लेकिन देरी होने के चलते उसकी मौत हुई है। डॉक्टर से जब पूछा गया कि क्या मृत होने के बाद उसे रेफर किया गया तो सवाल का जवाब टालती नजर आई।

प्रशासन ने कार्रवाई का दिया आश्वासन

प्राइवेट एंबुलेंस चालक नरेंद्र ने बताया कि उसे अस्पताल स्टाफ द्वारा ही गर्भवती को ले जाने के लिए फोन आया था। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिरकार जिला अस्पताल के कर्मचारियों को प्राइवेट एंबुलेंस बुलाने में क्या दिलचस्पी है। कहीं यह पूरा खेल कमीशनखोरी का तो नहीं है।

एसडीएम सदर जीतेन्द्र कुमार बताते हैं कि जिलाधिकारी ने पूरे मामले को गंभीरता से लिया है। डीएम ने पूरे मामले की मजिस्ट्रेट जांच कराने के आदेश दिए हैं। जिसको लेकर जांच की जा रही है, जो भी इस मामले में दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ कार्यवाही तय है।

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