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महराजगंज में सदर सीट पर गरमाई सियासत:इस सीट पर कोई भी विधायक दुबारा नहीं आया, सपा और भाजपा के बीच है मुकाबला

महराजगंज7 महीने पहले
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सदर सीट के लिए मची खींचा तानी। - Money Bhaskar
सदर सीट के लिए मची खींचा तानी।

महराजगंज की सदर सीट के लिए सभी दल के प्रत्याशी इन दिनों टिकट लेने के लिए पूरा दम खम दिखा रहे हैं। टिकट की दौड़ में भाजपा और सपा के कई कार्यकर्ता भी शामिल हैं। सदर विधानसभा में भाजपा के वर्तमान विधायक जयमंगल कन्नौजिया व पूर्व मंत्री चंद्रकिशोर की पत्नी अर्चना चंद्रा के बीच टिकट की रेस है। वहीं सपा में पूर्व विधायक श्रीपत आजाद, बिन्द्रेश कन्नौजिया और बसपा को छोड़ सपा में आए निर्मेष मंगल ने टिकट के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है।

हमेशा चुनती है दूसरा विधायक

देखना ये होगा कि भाजपा अपने विधायक जयमंगल कन्नौजिया पर फिर से भरोसा जताते हुए उन्हें टिकट देती है या अर्चना चंद्रा पर दाव लगाती है। इन सबके उलट कोई चौंकाने वाली सियासी पारी खेलते हुए किसी तीसरे को पार्टी के टिकट पर सदर सीट के चुनावी मैदान में उतारती है। फिलहाल जनता के मूड के मुताबिक सियासत के इस खेल में भाजपा और सपा के बीच ही असली मुकाबला है।

सदर सीट के मतदाताओं की ये खासियत है कि वो जिस जनप्रतिनिधि को भारी संख्या में वोट देकर विधायक चुनती है। उसको अगले चुनाव में हराने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ती। पिछले दो दशक के चुनावी नतीजे पर गौर करें, तो लगातार दो बार से अधिक कोई भी विधायक नहीं बन सका है।

सपा में टिकट को लेकर त्रिकोणीय संघर्ष

सूबे की सियासत में जिस तरह भाजपा के मुकाबले में सपा खड़ी हुई है। उसे देखते हुए सदर सीट से टिकट के लिए पार्टी में मारामारी की स्थिति है। पार्टी की सियासी हलचल पर गौर करें, तो पूर्व विधायक श्रीपति आजाद, युवा व भरोसेमंद कार्यकर्ता बिन्द्रेश कन्नौजिया और गीता रत्ना के बीच टिकट की होड़ है। सभी की निगाहें पार्टी मुख्यालय पर टिकी हैं। सदर की सीट पर सपा कई बार काबिज हो चुकी है। पिछले चार चुनाव के नतीजों पर गौर करें, तो चौदहवीं विधानसभा में पूर्व मंत्री चंद्रकिशोर चुनाव जीते थे।

सपा से टिकट मिलने पर मिल सकती है जीत

वहीं पन्द्रहवीं व सोलहवीं विधानसभा चुनाव में सपा के प्रत्याशी श्रीपत आजाद व सुदामा प्रसाद को जीत मिली। जबकि सत्रहवीं विधानसभा में अपने विपक्षियों को पराजित कर भाजपा के जयमंगल कन्नौजिया ने जीत का ताज पहना था। इस बार सदर की सीट पर अपनी जीत को लेकर सपा पूरी तरह आश्वस्त है। वहीं बसपा से तीन बार दूसरे नंबर पर रहने वाले निर्मेष मंगल भी इस उम्मीद में हैं कि अगर सपा से टिकट मिला, तो वो चुनाव जीत जाएंगे। क्योंकि पिछले पन्द्रह साल से वो सदर विधानसभा की सियासत में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

भाजपा पर है सपा की नजर

फिलहाल टिकट को लेकर अटकलों का बाजार तभी थमेगा जब पार्टी आधिकारिक रूप से टिकट का ऐलान कर देगी। सपा समर्थक भाजपा के टिकट वितरण पर भी पैनी निगाह जमाए हैं। सपा के एक बड़े वर्ग की चाहत है कि टिकट जयमंगल कन्नौजिया को ही मिले। ऐसे समर्थकों का मानना है कि मौजूदा विधायक जयमंगल कन्नौजिया के खिलाफ एंटी इन्कम्बेंसी फैक्टर का लाभ सपा को मिल सकता है। सपाई जयमंगल की तुलना में अर्चना चंद्रा को अपना कड़ा प्रतिद्वंद्वी मान रहे हैं।

सदर सीट से पिछले चार चुनाव का ये है जनादेश

सत्रहवीं विधानसभा में भाजपा प्रत्याशी जयमंगल कन्नौजिया ने बसपा प्रत्याशी निर्मेष मंगल को पराजित किया था। इस चुनाव में जयमंगल को 1 लाख 25 हजार 154 वोट मिले थे। जबकि बसपा प्रत्याशी निर्मेष मंगल को 56 हजार 793 वोट मिले। कांग्रेस प्रत्याशी आलोक प्रसाद 50 हजार 217 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे।

बसपा व कांग्रेस में तीसरे व चौथे नंबर की लड़ाई का अनुमान

सदर सीट से बसपा कभी खाता नहीं खोल पाई है। इस बार के विधानसभा चुनाव में बसपा की सक्रियता भी उतनी आक्रामक नहीं दिख रही है, जो उसकी पहचान है। इस बार अमरनाथ पासवान बसपा की दावेदारी कर रहे हैं। लेकिन सियासी चौपालों पर जो अटकलबाजी हो रही है, उसे देखते हुए ये कहा जा रहा है कि चुनावी रेस में बसपा जीत की फिनिश लाइन तक नहीं पहुंच पाएगी।

कांग्रेस के लिए जीत मुश्किल

कांग्रेस के आलोक प्रसाद सत्रहवीं विधानसभा के चुनाव में तीसरे नंबर पर थे। उनको 20.31 फीसदी यानी 50 हजार 217 वोट मिले थे। जबकि चुनाव जीतने वाले भाजपा प्रत्याशी जयमंगल कन्नौजिया को 50.63 फीसदी यानी 1 लाख 25 हजार 154 मत प्राप्त करने में सफल रहे। चुनाव जीतने वाले प्रत्याशी और आलोक के बीच 74 हजार 936 वोटों का फासला था। इस बार भी आलोक प्रसाद को कांग्रेस ने अपना उम्मीदवार घोषित किया है। कांग्रेस को जीत के लिए जिस माहौल की दरकार है, वो मिल नहीं पा रही है।

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