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कन्हाई के लिए लिखे पद कानों में गूंज रहे:अयोध्या घराने के यतींद्र मिश्रा बोले- दुखद... बिरजू महाराज के रहते किताब पूरी नहीं कर पाया

लखनऊ4 महीने पहलेलेखक: मनीषा भल्ला/अनुज शुक्ल
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प्रसिद्ध कथक नर्तक पंडित बिरजू महाराज का हार्ट अटैक से निधन हो गया है। पद्म विभूषण से सम्मानित 83 साल के बिरजू महाराज ने रविवार और सोमवार की दरमियानी रात दिल्ली के साकेत हॉस्पिटल में अंतिम सांस ली। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, गायक मालिनी अवस्थी और अदनान सामी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए उन्हें श्रद्धांजलि दी है।

कला और संस्कृति के विषयों पर नामी किताबों के लेखक और इन दिनों बिरजू महाराज की किताब पर काम कर रहे यतींद्र मिश्रा ने ​बिरजू महाराज के निधन पर शोक जताया है। उन्होंने कहा कि मुझे यह दुख हमेशा रहेगा कि उनके रहते मैं किताब को पूरी न कर सका। दैनिक भास्कर के साथ विशेष बातचीत में उन्होंने बिरजू महाराज के साथ बिताए पलों को साझा किया...

बिरजू महाराज को दीनानाथ मंगेशकर अवार्ड देतीं लता मंगेशकर और लखनऊ स्थित घर में बिरजू महाराज का कमरा।
बिरजू महाराज को दीनानाथ मंगेशकर अवार्ड देतीं लता मंगेशकर और लखनऊ स्थित घर में बिरजू महाराज का कमरा।

यतींद्र मिश्रा ने दैनिक भास्कर से बातचीत में कहा, 'बिरजू महाराज का जाना कला जगत में बड़ा नुकसान है। एक शानदार, जीवंत, कहकहों से गुलजार शख्सियत जो नृत्य कला का प्रतिमान थी, आज नहीं रही। उनके सुनाए ढेरों किस्से याद आ रहे हैं। अपने कन्हाई के लिए लिखे उनके पद कानों में गूंज रहे हैं। उनकी गमकदार आवाज में ढेरों बंदिशें थी। पंडितजी का अद्भुत लालित्य और चपल गतियों में समाई मुद्राएं- केशव कहि न जाय का कहिए... वाली स्थिति है।'

बिरजू महाराज की पोती रागिनी महाराज अपने दादा की पार्थिव देह को अंतिम प्रणाम करते हुए।
बिरजू महाराज की पोती रागिनी महाराज अपने दादा की पार्थिव देह को अंतिम प्रणाम करते हुए।

यतींद्र मिश्रा कहते हैं, 'यह सिर्फ लखनऊ का ही नहीं, बल्कि पूरे देश का नुकसान है। कथक का सबसे बड़ा सितारा अब नहीं रहा। कालका बिंदादीन महाराज की परंपरा में उनके पिता अच्छन महाराज, चाचा शंभू महाराज, लच्छू महाराज और अब बिरजू महाराज सभी कला के चमकते सितारे थे। यह सब बड़े लोग थे। बड़ा नाम, बड़ा काम यानी इस खानदान की कला में मौजूदगी में कोई तुलना ही नहीं की जा सकती है। नृत्य में लालित्य, नवाचार और इनोवेशन डालने वाले बिरजू महाराज ने कला को बहुत आगे बढ़ाया। बहुत सारे शिष्य पैदा किए। सिनेमा में उनके चाचा लच्छू महाराज और बिरजू महाराज ने बड़ा योगदान दिया।'

लखनऊ घराने में बिरजू महाराज के घर को सरकार ने संग्रहालय बनाया है।
लखनऊ घराने में बिरजू महाराज के घर को सरकार ने संग्रहालय बनाया है।

यतींद्र मिश्रा ने कहा कि बीते दो साल से कोविड वाले समय में बिरजू महाराज के आदेश पर उनका जीवन, संस्मरण, साधना और नृत्य के पक्षों पर उन्हें रिकॉर्ड करना शुरू किया था। उन्हें टैगोर फैलोशिप मिली थी, जिसमें मैं उन्हें असिस्ट कर रहा था। ये सिलसिला लगभग छह महीने तक अनवरत चला। उनके घर पर मिलने के साथ उनकी कई वर्कशॉप में शामिल होने का मौका मिला, जिसमें मुंबई यात्रा सबसे अहम थी।

बिरजू महाराज की बहन राजेश्वरी
बिरजू महाराज की बहन राजेश्वरी

बिरजू महाराज को जल्दी थी कि किताब आ जाए
यतींद्र मिश्रा ने कहा, 'महाराज जी को जल्दी थी कि उनकी किताब अब प्रकाशित हो जाए।अपनी तैयारी और अध्ययन को बिना जाने-समझे लिखना नाकाफी लगता था। बिरजू महाराज की किताब पर काम करना मेरे लिए बड़े तमगे से कम नहीं था। मुझे गौरव महसूस होता है कि इस काम के लिए उन्होंने मेरा चुनाव किया। मेरे मन में अब ये ग्लानि जीवन भर रहेगी कि उनके रहते किताब पूरी न कर सका।' उनकी सहज मानवीय उपस्थिति का ब्योरा यदि दर्ज कर पाया, तो उन पर लिखी जा रही किताब शायद मेरे मन को कुछ राहत दे सकेगी।

लखनऊ के गोलागंज में है पुश्तैनी घर

लखनऊ में गोलागंज में बिंदादीन महाराज की ड्योढ़ी आज भी है। वहीं, उनका पुश्तैनी घर भी है, जिसे सरकार ने अब म्यूजियम बना दिया है। पहले पूरा परिवार वहीं रहता था, वहीं सब पले बढ़े हैं। यतींद्र मिश्रा ने कहा कि लखनऊ की कालका बिंदादीन ड्योढ़ी का अंतिम बड़ा हस्ताक्षर आज इतिहास बन गया।