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रिटायरमेंट उम्र तय होने से पहले डॉक्टरों में विवाद:यूपी सरकार डॉक्टरों की अवकाश प्राप्ति की उम्र 70 साल करने पर कर रही विचार, लखनऊ के तीन बड़े मेडिकल संस्थान आपस में भिड़े

लखनऊ2 महीने पहले
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योगी सरकार यूपी में चिकित्सा संस्थाओं और मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों की रिटायरमेंट उम्र को 65 से बढ़ाकर 70 साल करने पर विचार कर रही है। लेकिन इससे पहले ही उम्र बढ़ाए जाने का विरोध शुरू हो गया है। हालांकि, कुछ डॉक्टर इसके समर्थन में भी हैं। SGPGI लखनऊ के फैकल्टी फोरम ने सरकार की औपचारिक घोषणा से पहले ही निर्णय के खिलाफ रविवार को मोर्चा खोल दिया।

वहीं, लोहिया संस्थान और KGMU के फैकल्टी फोरम के सदस्य भी सरकार के संभावित फैसले के समर्थन में खड़े होते दिख रहे हैं। अलग-अलग संगठनों के आमने-सामने आने के बाद अब प्रदेश के सुपर स्पेशलिटी चिकित्सा संस्थानों के डॉक्टर भी आमने-सामने आ गए हैं। KGMU में डॉक्टरों के करीब 500 पद स्वीकृत है। जिसकी तुलना में अभी 15 फीसदी पद खाली हैं। वहीं SGPGI में चिकित्सकों के करीब 250 पद है। जिनमें से करीब 20 फीसदी पद खाली है।

  • भास्कर रीडर पोल-

UP में डॉक्टरों की रिटायरमेंट उम्र कितनी होनी चाहिए... यहां अपना जवाब दें-

SGPGI ने विरोध में दिया तर्क

1.सरकार का यह निर्णय जल्दबाजी में लिया गया फैसला है। इसमें कई खामियां है, इसलिए इसे लागू नहीं किया जा सकता।

2. एम्स दिल्ली और पीजीआई चंडीगढ़ में भी डॉक्टरों की रिटायरमेंट उम्र 65 वर्ष ही है,वहां भी इसे लागू नहीं किया गया।

3.अभी 65 साल की जो रिटायरमेंट की उम्र है, उसमें भी चिकित्सकों को रिटायरमेंट बेनिफिट नहीं मिल रहा है। यह जब 70 साल कर दिया जाएगा, तब भी यह बेनिफिट्स मिलते नजर नहीं आ रहे हैं।

4.प्रो.साहू का दावा है कि संस्थान के 250 फैकल्टी समेत लगभग सभी बड़े चिकित्सा संस्थानों के फैकल्टी फोरम का भी यही मत है।

5.सरकार रिटायरमेंट की एज बढ़ा रही है, पर चिकित्सकों को VRS का ऑप्शन नहीं दे रही।

6.सरकार चिकित्सा संस्थानों में रोटेशन बेसिस पर HOD शिप लागू करें,जिससे चिकित्सा संस्थानों को विकसित करने के अलावा फैकल्टी के ऑल राउंड डेवलपमेंट में भी सहयोग मिलेगा।

SGPGI फैकल्टी फोरम की सरकार से ये है मांग?

सरकार चिकित्सकों से जुड़े इस अहम मसले पर पहले एक्सपर्ट पैनल का गठन करके डॉक्टरों से राय शुमारी करे और फिर उनसे जुड़े फैसलों पर मुहर लगाएं।

लोहिया संस्थान - लखनऊ
लोहिया संस्थान - लखनऊ

बेहतर काम करने वाले डॉक्टरों को किया जाए प्रोत्साहित: लोहिया संस्थान
सरकारी सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल डॉ. राम मनोहर लोहिया चिकित्सा संस्थान के फैकल्टी फोरम के महासचिव डॉ. ईश्वर राम ने सरकार के समर्थन में खड़े हो गए। उन्होंने SGPGI के प्रो.साहू पर निशाना साधा। कहा कि इससे सिर्फ वे लोग दुखी हैं, जो विभागाध्यक्ष बनने का सपना देख रहे हैं। जो डॉक्टर मरीजों की सेवा और बेहतरीन चिकित्सक तैयार करने के अभियान में लगे हैं, उन्हें प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए। अपनी मांग के पक्ष में उन्होंने कई तर्क दिए।

लोहिया फैकल्टी फोरम ने समर्थन में दिए तर्क

1. अनुभवी चिकित्सक हमारे लिए धरोहर के समान हैं। ऐसे चिकित्सकों को एक सिरे से रिटायर कर देना, उचित करार नहीं दिया जा सकता।

2.उम्र सिर्फ एक पहलू पर काबिलियत को इससे नहीं मापा जा सकता है, यदि डॉक्टर खुद को उम्र के इस पड़ाव पर भी मरीजों का इलाज करने लायक खुद को समझता है तो उसे जरूर यह काम जारी रखना चाहिए।

3. देश-दुनिया के तमाम ऐसे चिकित्सक हैं, जो 80-85 वर्ष की आयु तक भी लगातार मरीजों का उपचार कर रहे हैं। उनकी सर्जरी कर रहे हैं, इसलिए हमें ऐसे अंतरराष्ट्रीय मानकों को ही फॉलो करना चाहिए। ऐसे फैसले लेने में परहेज नहीं करना चाहिए।

4. प्रदेश सरकार सभी 75 जनपदों में मेडिकल कॉलेज खोलने जा रही है। इस फैसले से अनुभवी डॉक्टरों की होने वाली भारी कमी को भी दूर किया जा सकता है।

5. चिकित्सक को सेवा में रहना है या वीआरएस लेना है। इसका निर्णय लेने की छूट उसकी खुद के विवेक पर होना चाहिए। उसके ऊपर कोई भी निर्णय बाध्यकारी कतई नहीं होना चाहिए।

6. हमारा फोकस सभी मेडिकल कॉलेज में सुपर स्पेशयलिटी विंग की स्थापना पर होना चाहिए। देश के तमाम ऐसे राज्य हैं, जहां पर पहले से इन प्रयासों को लागू किया गया है।

प्रदेश में डॉक्टरों और अस्पतालों की संख्या पर एक नजर

डॉक्टरों के स्वीकृत पद18,700
वर्तमान तैनाती11,500
कुल मेडिकल कालेज40
अन्य(1 पीजीआई और 2 एम्स)03
सरकारी जिला अस्पताल करीब158
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र(सीएचसी)800+
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी)300+
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