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सपा MLA की आमरण अनशन वाली दिवाली ​​​​​​​:लखनऊ में गांधी प्रतिमा के सामने दीये से लिखा- संघर्ष ही जीवन; सड़क के लिए दिया था इस्तीफा

लखनऊ8 महीने पहले
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उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव में होने पर तीन महीने से कम समय है। ऐसे में राजनीति के अजब-गजब रंग दिखने शुरू हो गए हैं। एक ऐसी तस्वीर लखनऊ के GPO स्थित गांधी प्रतिमा स्थल की है। जहां अमेठी की गौरीगंज सीट से सपा विधायक राकेश प्रताप सिंह का आमरण अनशन चल रहा है।

उन्हें अन्न-जल त्यागे हुए 24 घंटे से ज्यादा वक्त बीत चुका है। राकेश सिंह ने दीपावली की रात भी यहीं गांधी प्रतिमा के नीचे बिताई। अनशन के दूसरे दिन शुक्रवार सुबह विधायक ने स्थल की साफ-सफाई की और गांधी प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। राकेश ने अपने क्षेत्र की दो सड़कें न बनवाए जाने से नाराज होकर 31 अक्टूबर को इस्तीफा दिया था। तब से उनका अनशन चल रहा है।

राकेश प्रताप सिंह ने अपने क्षेत्र में विकास कार्य न होने की बात कहकर इस्तीफा दे दिया था। हालांकि इस्तीफे की टाइमिंग को लेकर सवाल उठ रहें है। लोगों का कहना है कि अब चुनाव में महज कुछ महीने ही बचे है। ऐसे में विधायक के इस्तीफे और अब आमरण अनशन के मायने क्या है?

लखनऊ में हजरतगंज स्थित गांधी प्रतिमा के पास अनशन जारी है। दिवाली पर उन्होंने संघर्ष ही जीवन है का दीप जलाते हुए अपना विरोध जताया।
लखनऊ में हजरतगंज स्थित गांधी प्रतिमा के पास अनशन जारी है। दिवाली पर उन्होंने संघर्ष ही जीवन है का दीप जलाते हुए अपना विरोध जताया।

विधायक ने 31 अक्टूबर को दिया था इस्तीफा

अमेठी के गौरी गंज विधानसभा क्षेत्र से लगातार दूसरी बार विधायक चुने गए राकेश प्रताप सिंह ने 31 अक्टूबर को विधानसभा की सदस्यता से त्यागपत्र दे दिया था। विधायक ने त्यागपत्र विधानसभा अध्यक्ष से मिलकर दिया था। इसके बाद विधायक लखनऊ में GPO पहुंचे और धरना शुरू कर दिया। विधायक अपने क्षेत्र की दो जर्जर सड़कों का पुर्ननिर्माण नहीं होने से नाराज हैं। विधायक ने इस संबंध में पिछले दो अक्तूबर को जिला प्रशासन को ज्ञापन देकर अंतिम चेतावनी दी थी।

विधायक ने कहा था कि 31 अक्तूबर को सुबह 11 बजे तक दोनों सड़कों का निर्माण शुरू नहीं हुआ तो वे अपने पद से इस्तीफा दे देंगे। सड़कों का निर्माण नहीं हो पाया, लिहाजा इस्तीफा दे दिया और अब आमरण अनशन पर हैं।

विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित से मिलकर इस्तीफा दिया था।
विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित से मिलकर इस्तीफा दिया था।

इस्तीफे की राजनीति

सपा विधायक राकेश प्रताप सिंह की इस्तीफे और आमरण अनशन को लेकर सियासी गलियारों में जमकर चर्चा हो रही है। कुछ लोग इसे पॉलिटिकल स्टंट करार दे रहें है तो कुछ इसे प्रेशर पॉलिटिक्स बता रहें है। समाजवादी पार्टी की राजनीति कर रहे कुछ नेताओं का कहना है कि लोकसभा 2019 के चुनाव में विधायक राकेश सिंह ने भाजपा उम्मीदवार स्मृति ईरानी की मदद की थी। इसी मामले पर अपनी पार्टी से उनकी दूरी भी बढ़ गई थी। राजनीति के जानकार कहते हैं कि भाजपा से टिकट कन्फर्म नही हुआ और अपनी पार्टी ने भी वेटिंग में डाल दिया, लिहाजा अपने अस्तित्व के लिए विधायक को यह कदम उठाना पड़ा है।

अखिलेश यादव के करीबी माने जाते है विधायक

सपा के टिकट पर 2012 के विधानसभा चुनाव में राकेश प्रताप सिंह गौरीगंज विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए थे। 2012 में पहली बार विधायक चुने गए राकेश प्रताप की गिनती सपा सुप्रीमो व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के करीबियों में होती है। 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले अखिलेश के चाचा व तत्कालीन पीडब्ल्यूडी मंत्री शिवपाल यादव ने प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के नाम से नई पार्टी बना ली थी। विधानसभा चुनाव के दौरान राकेश प्रताप को समाजवादी पार्टी के अलावा प्रगतिशील समाजवादी पार्टी ने भी टिकट दिया। हालांकि वे सपा के टिकट पर चुनाव लड़े और जीतकर दोबारा विधानसभा पहुंचे।

विधायक राकेश सिंह के समर्थन में आए समाजवादी पार्टी के नेता, जीपीओ पहुंच कर दिया समर्थन।
विधायक राकेश सिंह के समर्थन में आए समाजवादी पार्टी के नेता, जीपीओ पहुंच कर दिया समर्थन।

विधायक राकेश सिंह का राजनीतिक सफर

  • 1992 से 1997 तक राष्ट्रीय छात्र संगठन के जिलाध्यक्ष रहे।
  • 2003 से 2011 तक समाजवादी पार्टी युवजन सभा के जिलाध्यक्ष रहे।
  • 2006 में अपने गांव मऊ से क्षेत्र पंचायत सदस्य निर्वाचित हुए।
  • 2006 में हुए ब्लॉक प्रमुख के चुनाव में रवींद्र प्रताप सिंह को हराकर ब्लॉक प्रमुख बने।
  • 2006 से 2011 तक ब्लॉक प्रमुख संघ के जिलाध्यक्ष व प्रदेश संगठन में उपाध्यक्ष रहे।
  • 2012 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर गौरीगंज से विधायक चुने गए। कांग्रेस प्रत्याशी मो. नईम को मामूली अंतर से हराया।
  • 2017 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर दोबारा विधानसभा पहुंचे। कांग्रेस के मो. नईम को 26479 से अधिक वोटों से हराया।
  • 31 अक्तूबर 2021 को कार्यकाल पूरा होने से पहले जनहित के मुद्दे पर दिया इस्तीफा।
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