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मुजफ्फरनगर की आबोहवा खराब, AQI 380 रिकॉर्ड:लखनऊ में भी बढ़ने लगा प्रदूषण, वाराणसी में कुछ बेहतर; जानिए अपने शहर का हाल

लखनऊ7 महीने पहले
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यूपी में प्रदूषण बढ़ना शुरू हो गया है। मुजफ्फरनगर की आबोहवा में सांस लेना आपको परेशानी में डाल सकता है। ऐसा हम पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के ताजा आंकड़ों के जरिए कह रहे हैं। क्योंकि, 15 नवंबर को UP में मुजफ्फरनगर की हवा सबसे खराब रिकॉर्ड हुई। यहां का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 380 पहुंच गया है। दूसरे नंबर पर बुलंदशहर (366 AQI), तीसरे पर मेरठ (354 AQI) है।

वहीं, एक सप्ताह की राहत के बाद अब राजधानी लखनऊ की हवा में भी प्रदूषण बढ़ने लगा है। AQI 270 (खराब स्तर) के साथ लखनऊ प्रदूषण मामले में यूपी में आज 10वें नंबर पर पहुंच गया है। उधर, वाराणसी (252 AQI) वासियों के लिए अभी राहत बनी हुई है। हालांकि, हवा खराब होने पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के साथ ही जिला प्रशासन और नगर निगम समेत अन्य जिम्मेदार विभाग एलर्ट मोड पर आ गए हैं।

खराब सड़क और निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल प्रदूषण का कारण
अक्टूबर से फरवरी तक यूपी की राजधानी लखनऊ में वायु प्रदूषण की स्थिति काफी खतरनाक हो जाती है। यह हर साल हो रहा है। बीते सालों में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए शासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के कड़े फैसलों के बाद भी इसमें कोई खास सुधार नहीं आया है।

नगरीय क्षेत्र में वायु प्रदूषण का कारण जानने के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने IIT कानपुर और पर्यावरण संरक्षण के लिए काम करने वाली विश्व स्तरीय संस्था 'टेरी' के विशेषज्ञों से जांच कराई है। दोनों ही संस्थाओं ने शहर के प्रदूषण पर शोध किया।

रिपोर्ट में कहा कि लखनऊ के वायु प्रदूषण को बढ़ाने में 80 से 87 प्रतिशत तक का योगदान खस्ताहाल सड़कों और निर्माण इकाइयों से उड़ने वाली धूल है। बीते एक सप्ताह से दिल्ली NCR क्षेत्र में वायु प्रदूषण की स्थिति क्रिटिकल तक पहुंच चुकी थी। वहीं, लखनऊ की वायु गुणवत्ता काफी बेहतर रही। लखनऊ का AQI बीते एक सप्ताह से 200 के अंदर बना था। अब लखनऊ की हवा में एक बार फिर तेजी से प्रदूषण बढ़ा है।

AQI 270 (खराब स्तर) के साथ लखनऊ प्रदूषण मामले में यूपी में आज 10वें नंबर पर पहुंच गया है।
AQI 270 (खराब स्तर) के साथ लखनऊ प्रदूषण मामले में यूपी में आज 10वें नंबर पर पहुंच गया है।

प्रमुख स्थानों का AQI

शहरAQI
मुजफ्फरनगर380
बुलंदशहर366
मेरठ354
हापुड़352
बागपत340
गाजियाबाद328
गोरखपुर330
कानपुर296
आगरा292
लखनऊ270
फिरोजाबाद268
प्रयागराज267
वाराणसी252

लखनऊ में यहां प्रदूषण रिकॉर्ड

इलाकाAQI
गोमती नगर184
अलीगंज249
कुकरैल249
अंबेडकर विवि267
लालबाग313
तालकटोरा369

मुजफ्फरनगर में गुड़ बनाने से फैल रहा प्रदूषण
मुजफ्फरनगर में प्रदूषण बढ़ने का मुख्य कारण कोल्हू हैं। यहां गुड़ बनाने के लिए ईंधन के रूप में लकड़ी की जगह प्लास्टिक जलाए जाते हैं। 15 दिन पहले प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने 9 कोल्हुओं पर 25-25 हजार रुपए का जुर्माना ठोंका था। तहसील सदर के गांव दीदाहेडी पोस्ट रोहाना कला में इंस्पेक्शन के दौरान ईंधन के रूप में प्लास्टिक को जलाकर गुड़ बनाया जाता मिला था। इस पर कार्रवाई हुई थी।

मुजफ्फरनगर में 3 हजार से ज्यादा कोल्हू ग्रामीण और नगरीय क्षेत्र में चलते हैं। खर्च बचाने के लिए कोल्हू मालिक पारंपरिक ईंधन का प्रयोग करने के बजाए प्रतिबंधित ईंधन जैसे वेस्ट प्लास्टिक आदि का प्रयोग करते हैं। इससे क्षेत्र में वायु प्रदूषण बढ़ता है।

सरकारी विभाग ही फैला रहे प्रदूषण
लखनऊ के वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए DM अभिषेक प्रकाश ने एलडीए, नगर निगम आवास विकास सहित सभी सरकारी विभागों को सख्त निर्देश दिया था। कहा कि वह अपने-अपने विभाग में होने वाले निर्माण कार्यों में वायु प्रदूषण नियंत्रण मानकों का कड़ाई से पालन कराएं। हालांकि, आवास विकास विभाग के लोग इन निर्देशों को हवा में उड़ा रहे हैं।

रविवार को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड लखनऊ मंडल के क्षेत्रीय अधिकारी डॉ. रामकरन को जानकारी मिली कि अवध विहार कॉलोनी में हो रहे सड़क निर्माण कार्य में तारकोल जलाया जा रहा है। इसपर तत्काल एक्शन लेते हुए आवास विकास को नोटिस भी भेजा गया।

गुड़ बनाने के लिए मुजफ्फरनगर में ईंधन के रूप में प्लास्टिक को जलाया जाता है। इससे निकलने वाला धुंआ प्रदूषण को बढ़ा रहा है।
गुड़ बनाने के लिए मुजफ्फरनगर में ईंधन के रूप में प्लास्टिक को जलाया जाता है। इससे निकलने वाला धुंआ प्रदूषण को बढ़ा रहा है।

एयर क्वालिटी इंडेक्स का मानक

AQIमानक
0-50अच्छा
51-100संतोषजनक
101-200थोड़ा प्रदूषित
201-300खराब
301-400बहुत खराब
401- 500खतरनाक